Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 22:1 प्रकाशितवाक्य 22:2 प्रकाशितवाक्य 22:3 प्रकाशितवाक्य 22:4 प्रकाशितवाक्य 22:5 प्रकाशितवाक्य 22:6 प्रकाशितवाक्य 22:7 प्रकाशितवाक्य 22:8 प्रकाशितवाक्य 22:9 प्रकाशितवाक्य 22:10 प्रकाशितवाक्य 22:11 प्रकाशितवाक्य 22:12 प्रकाशितवाक्य 22:13 प्रकाशितवाक्य 22:14 प्रकाशितवाक्य 22:15 प्रकाशितवाक्य 22:16 प्रकाशितवाक्य 22:17 प्रकाशितवाक्य 22:18 प्रकाशितवाक्य 22:19 प्रकाशितवाक्य 22:20 प्रकाशितवाक्य 22:21



प्रकाशितवाक्य 22:20 — तात्कालिक गवाही और प्रत्याशित आना
पंक्ति: जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, “हाँ, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ।” आमीन। हे प्रभु यीशु आ!
सूचना का आरम्भिक संदर्भ और पाठ का तात्पर्य
यह आयत अंतिम पुस्तक के आखिरी भाग में सुनाई देती है, जहां परमेश्वर के पुत्र के पुनः लौटने की आशा और भविष्य की प्रतिज्ञा स्पष्ट होती है। गवाही देने वाला जो कह रहा है, वह यीशु मसीह ही है, जो अपने विद्यार्थियों से मिलने, न्याय करने और परमेश्वर के राज्य को पूरा करने को तत्पर है। “हाँ, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ” एक दृढ़ आश्वासन है कि दुख-संक्रमण के बाद भी परमेश्वर का सिद्धान्त और प्रतिज्ञान स्थिर है। साथ ही “आमीन” का शब्द भाव-स्वीकृति और विश्वास की पूर्णता को बताता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से निकलने वाले बोध
- परमेश्वर के योजनाबद्ध समय पर यीशु का आगमन निश्चित है; यह विश्वास की स्थिरता पर बल देता है।
- एक तीव्र अपेक्षा और उत्साह का संकेत है—प्रभु का आना न केवल निर्णायक प्रलोभन हटाने के लिए है, बल्कि भक्तों के लिए पूर्ण मेल-जोल और उद्धार का क्षण है।
प्रमुख शब्दों और चित्रों की व्याख्या
- शीघ्र आनेवाला: यह अहंकार-रहित उत्साह के साथ एक निर्णायक क्रिया का संकेत है—समय का पूर्ण और निश्छल जोखिम-रहित अंत।
- आमीन: स्वीकृति का शब्द, विश्वासी का आशीषित संकल्प; भगवान के वचनों पर विश्वास की पुष्टि।
अनुरूप पाठ (Related Passages)
- मत्ती 24:44: प्रभु के लौटने का तत्परता और जागरूकता का निर्देश देता है—“तुम भी तयार रहो”।
- 1 कुरिन्थियों 15:51–52: समय-समय पर बदले बिना परिवर्तन की गारंटी, क्योंकि मृत्यु-जीवन का परिवर्तन ठीक उसी पल संभव है।
- 2 पतरस 3:10: प्रभु के आ जाने पर आकाश-तारों के घटित होने का वर्णन, और पापियों के लिए न्याय का दिन खुलता है—तुरंत प्रभावशाली परिवर्तन।
आज के संदर्भ में जीवन-प्रयोग
- धैर्य और विश्वस्न्धता: कठिन समय में भी “शीघ्र आनेवाला” की आशा हमें निराश नहीं करती; यह हमारे दैनिक निर्णयों में नैतिक दृढ़ता बनाये रखती है।
- आमीन की पुष्टि: विश्वासी जीवन में हर दिन प्रभु के वचनों की स्वीकृति को दृढ़ करें—अपने कर्म, विचार और संबंधों में प्रेम की एकता दिखायें।
संयुक्त निष्कर्ष
यह वाक्य परमेश्वर की योजनाओं के निर्विवाद और निर्भर होने का स्मरण कराता है। हमें शीघ्र आना की गवाही के साथ अपने अस्तित्व को ईश्वरीय उद्देश्य के अनुरूप ढालना है—यही जीवन की वास्तविक तैयारी है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक टिप्पणियों के अनुरूप, यह आयत एक वास्तविक, क्रियात्मक आश्वासन है: विश्वास में दृढ़ता, वचन-निष्ठता, और प्रभु के आने का सम्मान।
अनुवादित उद्धरणों के लिए नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से यदि सटीक शब्द उद्धृत हों, तो नीचे दी गई इकाइयों में आवश्यक रूप से उद्धृत किया गया है:
उद्धरण-नोट: “हाँ, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ” प्रकार के बायबल-पाठों पर ये टिप्पणीकार आम तौर पर इसी प्रकार के ढांचे में देखते हैं: भगवान के पुनर्मिलन के समय-संदेश की पुष्टि, भक्तों के लिए उत्साह और विवेकपूर्ण तैयारी।