Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 22:1 प्रकाशितवाक्य 22:2 प्रकाशितवाक्य 22:3 प्रकाशितवाक्य 22:4 प्रकाशितवाक्य 22:5 प्रकाशितवाक्य 22:6 प्रकाशितवाक्य 22:7 प्रकाशितवाक्य 22:8 प्रकाशितवाक्य 22:9 प्रकाशितवाक्य 22:10 प्रकाशितवाक्य 22:11 प्रकाशितवाक्य 22:12 प्रकाशितवाक्य 22:13 प्रकाशितवाक्य 22:14 प्रकाशितवाक्य 22:15 प्रकाशितवाक्य 22:16 प्रकाशितवाक्य 22:17 प्रकाशितवाक्य 22:18 प्रकाशितवाक्य 22:19 प्रकाशितवाक्य 22:20 प्रकाशितवाक्य 22:21



प्रकाशितवाक्य 22:15 का पाठ का इमीडिएट सेटिंग
पवित्र ग्रंथ के अंत के समय में, प्रकाशितवाक्य 22:15 बताता है कि वे सब जो रूप-रेखा में पापी, मूर्तिपूजक और झूठे रहते हैं, उन्हें नगर ईटरन के बाहर ही रहने के लिए कहा गया है। यह वाक्य बंद द्वार की imagery देता है—जहां सच्चे आशीर्वाद और परम आनंद के समुदाय से वे बाहर रहेंगे जो परमेश्वर की राह से भटकते हैं।
ईश्वर भरोसे और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या प्रकट करता है
यह पंक्ति न केवल यह बताती है कि किन लोगों को बाहर रखा जाएगा, बल्कि यह संकेत भी देती है कि परमेश्वर की स्वच्छता और पवित्रता की स्पष्ट सीमा है। परमेश्वर अपने राज्य के भीतर पूर्ण पवित्रता चाहता है; जो लोग पाप, छल और मूर्तिपूजा के साथ जीवन जीते हैं, उनके लिए यह जगह नहीं। परन्तु यह खबर आश्वासन भी देती है कि परमेश्वर अपने योजनाबद्ध राज्य में सत्य और विश्वास के साथ चलने वालों को स्वागत देता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और प्रमाण-चित्रों की व्याख्या
ये शब्द मिलकर एक स्पष्ट तस्वीर बनाते हैं: परमेश्वर वह नगर है जहाँ पवित्रता, सच और प्रेम का राज्य है; जो शुद्धता से भटकते हैं, वे सुरक्षित सामुदायिक जीवन से बाहर रहेंगे।
संबंधित आयतें
1) मरकुस 16:16— विश्वास और baptism के साथ जीवन जीने वाले पावन जीवन के प्रवेश का संकेत देता है।
2) 1 कुरिन्थियों 6:9-11— पापी आचरण के विरुद्ध से प्रेरित चेतावनी और उद्धार का आश्वासन।
3) अन्य कुछ सन्दर्भ— प्रेरितों के काम 26:18 के अनुरूप, परमेश्वर के राज्य में प्रवेश और अंधकार से बाहर आना।
इन cross-references से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का राज्य पवित्रता और सत्य पर टिका है, और विश्वासयोग्य जीवन ही प्रवेश देता है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
यह संदेश हमें याद दिलाता है कि हमारा आचरण और विश्वास सीधे हमारे अंत के साथ जुड़ा है। धार्मिक दावों के साथ जीवन-जीना नहीं; बल्कि दिन-प्रतिदिन प्रभु यीशु के अनुशासन, सत्य और प्रेम में विश्वास के साथ चलना आवश्यक है। किसी भी छल, पथभ्रष्ट विचारों, या व्यभिचारिक आचरण से दूर रहें; ईश्वर के राज्य के प्रवेश के लिए पवित्रता और सच की माँगें स्वीकार करें।
एक संक्षिप्त समेकन
प्रकाशितवाक्य 22:15 हमें स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के नगर में प्रवेश केवल उन लोगों के लिए है जो सत्य, पवित्रता और परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप जीवन जीते हैं। बाहर रहने वाले वे हैं जो कुत्ते-झूठे-व्यभिचारी-हत्यारे- मूर्तिपूजक और झूठे आचरण में डूबे रहते हैं। यह न केवल चेतावनी है, बल्कि परमेश्वर के राज्य की पवित्रता और उद्धार का विश्वास भी है।
उद्धरण उद्धार मार्ग के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलन से आवश्यकता अनुसार संकीर्ण लेकिन सारगर्भित विचार सम्मिलित हैं।