प्रकाशितवाक्य 7:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“आमीन*, हमारे परमेश्‍वर की स्तुति, महिमा, ज्ञान, धन्यवाद, आदर, सामर्थ्य, और शक्ति युगानुयुग बनी रहें। आमीन।”

प्रकाशितवाक्य 7:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ का सरल अर्थ

प्रकाशितवाक्य 7:12 में महिमा, ज्ञान, धन्यवाद, आदर, सामर्थ्य और शक्ति ऐसीPraise सा संचार हैं जो महिमा वाले परमेश्वर के लिए चिरस्थायी हैं: आमीन। यह वाक्य परमेश्वर के अनंत गुणों की सार्वभौम स्तुति और उसकी युगानुयुग बनी रहने वाली सत्ता की अभिव्यक्ति है।

संदर्भ-प्रश्न और पृष्ठभूमि

यह पद, स्वर्गवासी दूतों और पृथ्वी के लोगों के समूह के एक ही समय में बोले जाने वाले वधमों के बाद आता है—जहाँ परमेश्वर के उद्धारात्मक कार्यों, मसीह की विजय, और डिज़ाइन कि सभी परिस्थिति उसकी महिमा के लिए हों, का घोषणापत्र है। यह गाथा उस समय के अंतिम महाकाव्य के दृश्य की ओर संकेत करता है जब परमेश्वर अपने प्रजा को महिमा से भर देगा और सभी रूहें उसकी सत्ता को स्वीकार करेंगी।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

  • महिमा: परमेश्वर की पवित्र महिमा और उसकी जलालत-रहित पवित्रता का प्रकट होना, जो सारे ब्रह्माण्ड में प्रकाशित होती है।
  • ज्ञान: परमेश्वर की बुद्धि और पूर्ण समझ का मान, जिसका कोई सीमा नहीं।
  • धन्यवाद: मानवीय आभार से बढ़कर, सब कुछ को उसकी अनुदान-स्वरूप मानना और उसकी कृपा के लिए आभार प्रकट करना।
  • आदर: परमेश्वर की प्रतिष्ठा और उसे सर्वश्रेष्ठ स्थान देना; उसकी योजना और हर कर्म के पीछे उसका स्वामीत्व मानना।
  • सामर्थ्य और शक्ति: उसकी अटल सत्ता और असाधारण क्षमता का उल्लेख, जो सृष्टि-पालन और उद्धार के सभी कार्यों के लिए समर्थ है।

थीमेटिक सार

  1. स्वर्गीय स्तुति: परमेश्वर की महिमा का सतत उद्घोष।
  2. कृतज्ञता और सम्मान: उसकी दयालुता और सत्ता के लिए पूरे मन से आस्था और प्रशंसा।
  3. अनंतता: यह जयगान कभी समाप्त न होने वाला है—युगानुयुग।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त व्याख्या)

1) डिन-गीत 7:12 का समान विचार: स्वर्ग की प्रशंसा में परमेश्वर के गुणों का वरण—महिमा, ज्ञान, शक्ति। यह दिखाता है कि दिव्य सभा का स्वरूप एक स्थायी प्रार्थना है।

2) फड़ 4:11-12: परमेश्वर के कार्यों के लिए आदर और महिमा का समर्पण; उसकी सत्ताकाल में सीमाओं का अंत नहीं है, और वह हमारी पूजा के केंद्र में है।

3) यशायाह 42:8: मैं ही יהוה हूँ; मेरा नाम ही महिमा है; मेरे אלה किसी और का सम्मान नहीं किया जाएगा। यह वाक्य इस पद के दायरे में एक स्पष्ट जोड़ देता है कि महिमा केवल उसी के योग्य है।

यथार्थ-अनुभव (किफायती takeaway)

हम संघर्षों के बीच भी परमेश्वर की महिमा को याद रखें। हमारी प्रार्थनाओं में gratitude, सम्मान और विश्वास के साथ उसकी शक्ति पर शांति पाई जा सकती है, क्योंकि यह महिमा और सत्ता अनंतकाल तक स्थिर है।

ए० उदाहरणात्मक उद्धरण (public-domain commentaries से संबद्ध दूरी)**

हेल्पर टिप्पणीकारों में जो स्पष्ट उद्धरण मिल सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) — किन्तु पूर्ण पदों को यहाँ नहीं दिया गया है, केवल उनके मान्य विचारों की संरचना का संकेत है। यदि आप चाहें, तो मैं उनके उद्धरणों के विशिष्ट छोटे अंश हिंदी-परिभाषाओं के साथ दे सकता हूँ।

संयुक्त सार

इस पाठ में दिव्य महिमा—ज्ञान, महानता, धन्यवाद और शक्ति—का एक अटूट घोषणापत्र मिलता है। परमेश्वर की यह स्तुति युग-युग बनी रहेगी; इसलिए हमारे जीवन में भी उसकी महिमा को केन्द्रित करके आशीष पाने का मार्ग विकसित करना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

प्रकाशितवाक्य 7:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और वे ऊँचे शब्द से कहते थे, “वध किया हुआ मेम्‍ना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और स्तुति के योग्य है*।” (प्रका. 5:9)

यहूदा 1:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहूदा 1:25 (HINIRV) »
उस एकमात्र परमेश्‍वर के लिए, हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, गौरव, पराक्रम और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।

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प्रकाशितवाक्य 19:4 (HINIRV) »
और चौबीसों प्राचीनों और चारों प्राणियों ने गिरकर परमेश्‍वर को दण्डवत् किया; जो सिंहासन पर बैठा था, और कहा, “आमीन! हालेलूय्याह!”

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