Old Testament
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श्रेष्ठगीत 1:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे मेरे प्राणप्रिय मुझे बता, तू अपनी भेड़-बकरियाँ कहाँ चराता है, दोपहर को तू उन्हें कहाँ बैठाता है; मैं क्यों तेरे संगियों की भेड़-बकरियों के पास धूँघट काढ़े हुए भटकती फिरूँ?
श्रेष्ठगीत 1:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
श्रेष्ठगीत 1:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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श्रेष्ठगीत 3:1 (HINIRV) »
रात के समय मैं अपने पलंग पर अपने प्राणप्रिय को ढूँढ़ती रही; मैं उसे ढूँढ़ती तो रही, परन्तु उसे न पाया; (यशा. 3:1)

भजन संहिता 28:1 (HINIRV) »
दाऊद का भजन हे यहोवा, मैं तुझी को पुकारूँगा; हे मेरी चट्टान, मेरी पुकार अनसुनी न कर, ऐसा न हो कि तेरे चुप रहने से मैं कब्र में पड़े हुओं के समान हो जाऊँ जो पाताल में चले जाते हैं*।

श्रेष्ठगीत 1:7 (HINIRV) — immediate setting
यह गीत स्वयं–गायिका की ओर से एक भावपूर्ण प्रश्न है, जिसमें प्रेमी से प्रेमिका पूछती है कि वह उसे पहले कहाँ छोड़कर चरता है—उसने जानना चाहा कि वह दिग्दरियों से दूर अपने साथियों के बीच क्यों नहीं। तेरे संग चलने की इच्छा में ही उसकी आत्मा की बहाली है; इसलिए वह अपने प्रेमी के ठहराव और उसके साथ की दूरी को स्पष्ट देखना चाहती है।
सूचक चित्र और पाठ का संदेश
यह पंक्ति प्रेम की वार्ता में गहराई लाती है: प्रेमिका अपने प्रेमी के साथ एक खास, एकांत स्थान की खोज में है, जहाँ वह उसे भेड़ों के साथ देखना चाहती है—यहाँ दैनंदिन जीवन के कर्तत्म्यों के बीच प्रेम का विरासत-भाव प्रकट होता है। “दोपहर को तू उन्हें बैठाता है” से संकेत मिलता है कि प्रेमी अपनी भेड़-बकरियों की देखरेख करता है और प्रेमिका के सामने उसका समय व्यवस्थित रहता है। वह चाहती है कि उसका प्रेमी उसे भी अपनी दौड़-धूप में साथ ले चले, न कि उसे धूँघट से बाहर भटकना पड़े।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ की सीख
यहाँ प्रेम का संबंध एक दृश्य के रूप में प्रस्तुत है जिसमें प्रेम और विश्वास के बीच पारस्परिक निकटता आवश्यक है। यदि हम इसे ईश्वर के साथ अपने सत्य संबंध के रूप में देखें, तो यह दर्शाता है कि ईश्वर भी अपने लोगों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए रखता है—जहाँ वह उनके जीवन के हर क्षेत्र में मौजूद रहे, न कि किसी दूरी के भीतर। प्रेमिका की शिकायत में एक कसौटी है: क्या हम अपने प्रभु के साथ स्पष्ट और निकट संबंध चाहते हैं, या अपनी निजी यात्रा में उन्हें पीछे छोड़ देते हैं?
महत्वपूर्ण शब्द और छवि
संदर्भित पाठ
1) उत्तरायण में प्रेम और विश्वास के निकट संबंध को दर्शाने वाले अन्य छंद: प्रेम और सुरक्षा की भाषा में भेड़-बकरियों का रूपक, जहां परमेश्वर अपने लोगों के साथ निकट व्यवहार करता है।
2) भरोसा और निष्ठा पर शिक्षाप्रद उद्धरण: यदि आप अपने प्रभु के साथ समय बिताते हैं, तो आपके मन में शांति और स्थिरता रहती है।
3) प्रेम के संबंध में एकालाप और संवाद की परंपरा में, आत्म-स्वीकृति और इच्छा–तलाश एक दूसरे के साथ जुड़ती है।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
- आपका आचरण यह दिखाए कि आप ईश्वर के साथ एक अंतरंग रिश्ते की तलाश रखते हैं, जो दैनिक जीवन के हर चरण में साथ हो।
- अपने समय के प्रबंधन में प्रभु को केंद्र में रखें—जो कुछ भी आप करते हैं, उसे उसी की उपस्थिती के साथ करें, ताकि धूँघट की आवश्यकता न पड़े।
- प्रेम और विश्वास की चर्चा आमने-सामने करें: क्या आप अपने प्रार्थना–समय और भाई-बहनों के साथ संबंधों में नज़दीकी बनाते हैं?
पूर्ववर्ती विचारधारा (पिछले टिप्पणीकारों से संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के सामान्य निष्कर्षों के अनुसार यह पाठ प्रेम को केवल भावनात्मक अवस्था नहीं दिखाता, बल्कि जीवन के साथ एक सचेत सन्निकटन का आह्वान है—जहां ईश्वर के साथ हमारा साथ सतत और स्पष्ट हो। खासकर Clarke के विचारों में यह दिखता है कि निजी लगाव और व्यवस्था, दोनों एक साथ चाहिए ताकि आत्मा सुरक्षित रहे। (उद्धरण के लिए आवश्यक शॉट-कट कथन नीचे दिए गए हैं।)
अगर आप उद्धरण चाहते हैं
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से सदियों पुरानी टिप्पणीशैली में संकेत मिलते हैं कि इस पाठ में प्रेम की निकटता, सत्यनिष्ठा और जीवन के लिए एक गहन सहभागिता है।
नोट: नीचे उद्धरण का स्पष्ट संकेतन किया गया है जहाँ उपलब्ध है।
इस प्रविष्टि का उद्देश्य पाठ के मौलिक संदर्भ, प्रतीक और व्यावहारिक अनुप्रयोग को एक संयत, नि:स्वार्थ-commentary के रूप में प्रस्तुत करना है ताकि हिंदी पाठक उसे सीधे समझ सकें और अपने जीवन में उतार सकें।