Old Testament
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श्रेष्ठगीत 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मुझे खींच ले; हम तेरे पीछे दौड़ेंगे। राजा मुझे अपने महल में ले आया है। हम तुझ में मगन और आनन्दित होंगे; हम दाखमधु से अधिक तेरे प्रेम की चर्चा करेंगे; वे ठीक ही तुझ से प्रेम रखती हैं। (होशे 11:4, फिली. 3:1-12, भज. 45:14)
श्रेष्ठगीत 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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श्रेष्ठगीत 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 6:44 (HINIRV) »
कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उसको अन्तिम दिन फिर जिला उठाऊँगा।

भजन संहिता 45:14 (HINIRV) »
वह बूटेदार वस्त्र पहने हुए राजा के पास पहुँचाई जाएगी। जो कुमारियाँ उसकी सहेलियाँ हैं, वे उसके पीछे-पीछे चलती हुई तेरे पास पहुँचाई जाएँगी।

होशे 11:4 (HINIRV) »
मैं उनको मनुष्य जानकर प्रेम की डोरी से खींचता था, और जैसा कोई बैल के गले की जोत खोलकर उसके सामने आहार रख दे, वैसा ही मैंने उनसे किया।
θε श्रेष्ठगीत 1:4 पर विस्तृत टिप्पणी
यह पद शृंखला में बहन-प्रेम और आत्म-आस्थापन के उत्साह को व्यक्त करता है। गीत-गीतन में प्रेमिका की भावनाएँ जीवंतtraction से उभरती हैं: वह प्रेमी के अनुराग में बंधी है और उसका स्वागत महल-सी संरचना में होता है। यह पाठ दाँत-चिपी भूख नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रेम की गहराई को दर्शाता है: प्रेमी और प्रेमिका के बीच भक्ति और आनन्द का मधुर समन्वय।
पद का पृष्ठभूमि और मुख्य विचार
छानबीन से ज्ञात होता है कि ये मुक्तक प्रेम की उत्साहपूर्ण स्वीकृति है, जिसमें प्रेमिका अपने प्रेमी के पीछे चलने को कहती है और प्रेमी उसे अपने घर में लाता है। यह एक प्रतीक है: परमेश्वर की आत्मिक उपस्थिति का आनंद लेना और उसकी निकटता में सुकून पाना। दाखमधु की चर्चा प्रेम के महत्त्वपूर्ण अवयव के रूप में प्रयुक्त है—यानी संसारिक उपकारों से अधिक प्रेम का अनुग्रह और गहराई।
मुख्य शास्त्रीय पाठ से तुलना
पद के अंदर एक सामंजस्य दिखता है जिससे अन्यग्रंथों के प्रकाश में गहरी समझ मिलती है:
इन प्रवचनों से स्पष्ट होता है कि प्रेम का असली सुगंध परमेश्वर के समय-सेवा में सम्मिलित होना है, और उसे अपने दिल के महल में आमंत्रित करना है।
काव्य-संदेश और अध्यात्मिक पाठ
इस पद का 핵 중심 बिंदु है: चलना और पीछा करना—यानी मानव की आध्यात्मिक अगुवाई में परमेश्वर-प्रेम की खोज। प्रेमिका की वाक्य-विन्यास यह संकेत देती है कि प्रेम में अगुवाई मिलना है, और प्रेम मुक्त-स्वीकृति से अधिक गहराई को प्राप्त करता है। यह भी दिखाता है कि हमारे भक्तिपूर्ण जीवन में आनंद अहंकार नहीं, बल्कि नम्रता और श्रद्धा के साथ आता है।
व्यावहारिक आवेदन
छोटे cross-reference—संक्षिप्त स्पर्श
इन त्रुटिपूर्ण संदर्भों से समन्वय मिलता है:
संक्षिप्त निष्कर्ष
श्रेष्ठगीत 1:4 प्रेम की उच्चतम दिशा को बताता है: प्रेम अपने महायज्ञ में पूर्ण विश्वास और आनंद की अनुभूति का स्रोत है। यह पाठ बताता है कि सचमुच की निष्ठा और भक्तिभाव परमेश्वर के साथ निकटता को जन्म देता है, जहां जीवन का केंद्र उसका प्रेम-आनंद बन जाता है।
उद्धरण-भूमिका
जहाँ जरूरत पड़ी, नीचे के प्रसिद्ध व्याख्यानकारों के संदेशों का संतुलन लिया गया है:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजानिक-डायरेक्ट उद्धरणों से- अगर उपलब्ध हों- केवल संक्षेप में संदर्भित हैं और पूर्ण वाक्य नहीं दिए गए हैं।