Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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पाठ का स्पष्ट अर्थ
यस्या इतिहास के अनुसार, जो संकेतित है, शम्मू, शोबाब, नातान और सुलैमान—ये चारों बच्चियाँ नहीं, बल्कि उन नर-वत्सलों के नाम हो सकते हैं जो पितृकुल के उत्तराधिकार और यरूशलेम के इर्द-गिर्द उन्हीं दिनों जन्मे थे। इस वाक्यांश में उत्पत्ति-योजना का संकेत है कि राजा के अधिकार और परिवार में आने वाली संतानों के क्रम का उल्लेख है।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
यह संदर्भ 1 इतिहास (प्रधान 14) में है, जिसमें पिता-दादा के वैवाहिक-वंश और शहर-योजना से जुड़ी सूचियाँ मिलती हैं। इस अध्याय में दाऊद का शासन और यरूशलेम के उत्तराधिकार की रेखा स्पष्ट की जाती है। शम्मू, शोबाब, नातान और सुलैमन के नाम के साथ यह दिख रहा है कि परिवार में कई संताने प्रमुख भूमिका निभाती थीं और कुछ का उल्लेख विशेष स्थान पर हुआ है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त थीम-सूची
अनुसंधान-सम्बंधित आयतें
यहाँ कुछ प्रमुख क्रॉस-रेफरेंसेज़ दी जा रही हैं जिनसे पाठ की समझ गहराती है:
व्याख्या: ये संदर्भ बताते हैं कि जन्मों के क्रम से कलह और राज-कार्य कैसे जुड़ते हैं, और कैसे परमेश्वर की योजना इतिहास में क्रम बनाती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
नैतिक विचार यह है कि हमारे जीवन के छोटे-छोटे जन्म-क्रम भी परमेश्वर की योजना का हिस्सा होते हैं। परिवार के नाम और विरासत का सम्मान करें, परन्तु परमेश्वर की सर्व-व्यापक योजना में विश्वास बनाए रखें।
टिप्पणियाँ (संदर्भित उद्धरण)
इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेख संदर्भों से किसी भी सीधे पूर्ण उद्धरणों का प्रयोग वेबसाइट-स्तर पर नहीं किया गया है; पर उनकी विचारधारा के अनुसार यह सुझाव मिलता है कि उत्तराधिकार और परिवार-परंपरा का महत्त्व धार्मिक इतिहास में स्थिर है।