1 इतिहास 19:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु अरामी इस्राएलियों से भागे, और दाऊद ने उनमें से सात हजार रथियों और चालीस हजार प्यादों को मार डाला, और शोपक सेनापति को भी मार डाला।

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1 इतिहास 19:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 19:18—पृष्ठभूमि और मुख्य विचार

यह पाठ पीछे के युद्ध-प्रसंग की कथा में आता है जब दाऊद की सेना ने अरामियों के भागते हुए बलों को परास्त किया। शूर्पख (शोपक) सेनापति की मौत सहित कई अरामी सैनिकों का वध हुआ। यह घटना दाऊद के युद्ध-प्रचंडता और उसकी सेना की फिर से संगठित छवि को दिखाती है, जिसमें परमेश्वर की सहायता और डटे रहने का महत्व बना रहता है।

मुख्य आशय (Central Meaning)

विधर्मियों के विरुद्ध दाऊद की विजय यह बताती है कि परमेश्वर की सहायता और नेतृत्त्व में सुरक्षा मिलती है। हार चुकते समय भी शत्रु पीछे नहीं हटते; परन्तु प्रभु की कृपा से उनकी योजनाएं उलटी पड़ती हैं। इस verses में दिख रहा है कि आदर्श सैन्य सफलता निर्भर नहीं, बल्कि परमेश्वर की दिव्य सहाय और आशीष पर है—जो दाऊद के नेतृत्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

मुख्य विषय (Key Themes)

  • वह पराक्रम जो परमेश्वर के साथ जुड़कर आता है: दाऊद کی सेना द्वारा अरामी सेना पर विजय उसे दिखाती है कि ईश्वर के संग होने पर सीमायें कैसे टूटती हैं।
  • युद्ध में निरंतरता और शौर्य: सात हजार रथियाँ और चालीस हजार प्यादे—ये संख्या बताती है कि दाऊद की सेना काफी सक्षम और दृढ़ है, फिर भी विजय का आधार परमेश्वर की सहायता है।
  • शोषण और नीति का संतुलन: शोपक सेनापति की मृत्यु से यह संकेत मिलता है कि युद्ध न केवल बल का खेल है, बल्कि लक्ष्य, संस्था और नेतृत्व का भी महत्त्व है।

क्रॉस-रेफरेंस (Related Passages)

1 राजा 8:57-58 — दाऊद के नेतृत्व में परमेश्वर के साथ रहने की रक्षा, उद्धार और आशीष के साथ जुड़ाव का महत्व बताती है।

2 इतिहास 17:9 — दाऊद के समय की विजय-मुक्ति में परमेश्वर के निर्देश का पालन करने का परिणाम दर्शाती है।

उद्धरण के लिए संक्षेप: इन संदर्भों में यह स्पष्ट है कि युद्ध की सफलता केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा और आशीर्वाद पर निर्भर है, जो दाऊद के विरासत-निर्देशन के साथ जुड़ा है।

व्यावहारिक चिंतन (Practical Reflection)

  • परित्राण और नेतृत्व: कठिन समय में भी ईश्वर की दया और मार्गदर्शन पर स्थिर विश्वास रखना चाहिए।
  • धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा: सफलता के समय दाऊद जैसी प्रेरणा से नैतिक और नीति-संगत निर्णय लेने चाहिए।
  • समुदाय के लिए जिम्मेदारी: पराजय में भी साथियों की सुरक्षा और नेतृत्व की स्पष्टता बनाए रखना आवश्यक है।

संक्षिप्त समापन (Brief Summary)

इस पद में अरामियों के विरुद्ध दाऊद की सैन्य विजय परमेश्वर की सहायता के परिणामस्वरूप दिखती है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के साथ योद्धा होने पर शत्रु सीमाओं से परे विजयी हो सकता है, और शोपक सेनापति की मृत्यु जैसे क्षण यह याद दिलाते हैं कि नेतृत्व और रणनीति भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

विद्वानों के संकेत का संक्षिप्त synthesis: Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के पुराने-भाषा-आधारित टिप्पणी-उद्धरणों में वे कहते हैं कि परमेश्वर की शक्तिशाली सहायता बिना साहस और कौशल के भी सर्वोच्च विजय दिलाती है; और यह भी कि राष्ट्रीय या सामरिक सफलता परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप होनी चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 19:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 शमूएल 10:18 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 शमूएल 10:18 (HINIRV) »
परन्तु अरामी इस्राएलियों से भागे, और दाऊद ने अरामियों में से सात सौ रथियों और चालीस हजार सवारों को मार डाला, और उनके सेनापति शोबक को ऐसा घायल किया कि वह वहीं मर गया।

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1 इतिहास 19:13 (HINIRV) »
तू हियाव बाँध और हम सब अपने लोगों और अपने परमेश्‍वर के नगरों के निमित्त पुरुषार्थ करें; और यहोवा जैसा उसको अच्छा लगे, वैसा ही करेगा।”

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कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता।

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