Old Testament
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2 शमूएल 10:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु अरामी इस्राएलियों से भागे, और दाऊद ने अरामियों में से सात सौ रथियों और चालीस हजार सवारों को मार डाला, और उनके सेनापति शोबक को ऐसा घायल किया कि वह वहीं मर गया।
2 शमूएल 10:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 10:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 इतिहास 19:18 (HINIRV) »
परन्तु अरामी इस्राएलियों से भागे, और दाऊद ने उनमें से सात हजार रथियों और चालीस हजार प्यादों को मार डाला, और शोपक सेनापति को भी मार डाला।

न्यायियों 4:22 (HINIRV) »
जब बाराक सीसरा का पीछा करता हुआ आया, तब याएल उससे भेंट करने के लिये निकली, और कहा, “इधर आ, जिसका तू खोजी है उसको मैं तुझे दिखाऊँगी।” तब उसने उसके साथ जाकर क्या देखा; कि सीसरा मरा पड़ा है, और वह खूँटी उसकी कनपटी में गड़ी है।

न्यायियों 4:2 (HINIRV) »
इसलिए यहोवा ने उनको हासोर में विराजनेवाले कनान के राजा याबीन के अधीन कर दिया, जिसका सेनापति सीसरा था, जो अन्यजातियों के हरोशेत का निवासी था।
2 शमूएल 10:18 पर सार-सार दृश्यावलोकन
इस पंक्ति में दाऊद की सेना ने आक्रमणकारी अरामियोँ के विरुद्ध निर्णायक चटक जीत अर्जित की। क्षेत्रीय संघर्ष के बीच यह verse दिखाता है कि परमेश्वर की सहायता से शत्रु को कुचल देना संभव है, जब ईश्वर के साथ विश्वास और नेतृत्व हो।
पदविश्लेषण का संदर्भ
पद 18 आगे के युद्ध-प्रसंग का निष्कर्ष है: अरामी जो इस्राएल से भिड़े थे, वे भाग गये; दाऊद ने सात सौ रथों और चालीस हजार सवारों को मार डाला, और उनके सेनापति शोबक को ऐसा घायल किया कि वह वहीं मर गया। यह विजय न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि दाऊद के शासनकाल की धार्मिक–धार्मिक संवेदना को भी उजागर करती है—यानी परमेश्वर की सहायता से शत्रु पर विजय।
मुख्य आध्यात्मिक संदेश
अन्य उल्लेखित पाठों के साथ तुलना
यह दृश्य अन्य जगहों से मेल खाता है जहाँ परमेश्वर अपने लोगों को उच्च विजय देता है—जैसे दायित्वपूर्ण लड़ाइयों में विश्वास की विजय। मैथ्यू हेनरी के अनुसार, इस तरह की विजय परमेश्वर की सहायता के कारण होती है और दाऊद के चरित्र में ईमानदार नेतृत्व का प्रमाण है।
ऐल्बर्ट बार्न्स इस संदर्भ में यह बताते हैं कि राजा की सेना की परास्ती ईश्वर की योजना के अनुरूप होती है, ताकि शासक और लोगों में परमेश्वर के लिए डर और आदर बना रहे।
एडम क्लार्क ने कहा है कि ऐसे क्षण परमेश्वर के महत्व को दर्शाते हैं कि सत्ता कैसी भी हो, वह परमेश्वर के मार्गदर्शन के बिना कुछ नहीं कर पाती।
संयुक्त पाठ-विरोधाभासों का छोटा तुलनात्मक विवरण
– 2 शमूएल 8-10 भाग में दाऊद की युद्ध-स्थिति का पुनर्मूल्यांकन दिखाता है कि परमेश्वर उसकी नीतियों और आशीर्वाद से प्रेरित होकर ही विजय दिलाता है।
– कुछ अन्य भागों में भी युद्ध के समय ईश्वर के निर्देश मानना और आस्तीत्व बनाये रखना आवश्यक रहा है, ताकि विजय स्थायी और सुरक्षित रहे।
त्वरित आवेदन
आज हमारे जीवन में भी कठिन परिस्थितियाँ सामने आती हैं—व्यापार, स्वास्थ्य, या रिश्तों के मामलों में। इस पद से प्रेरणा लें: भय के समय भी परमेश्वर के साथ आगे बढ़ें, Prayer, वचन-ध्यान, और नैतिक नेतृत्व से मार्गदर्शन लें। याद रखें कि विजय वह होती है जो सत्य,धैर्य और दया के साथ प्राप्त हो—हमें परमेश्वर की सहायता और लोगों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार की ज़रूरत है।
आखिरी संक्षेप
2 शमूएल 10:18 एक स्पष्ट स्मारक है कि शत्रु पर परमेश्वर की मदद से जीत संभव है जब राजा और जनता एकजुट होकर ईश्वर के निर्देशों पर चलते हैं। यह न सिर्फ एक रणनीतिक विजय है, बल्कि यह धर्मी नेतृत्व और परमेश्वर के संरक्षण की पुष्टि भी है।
क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ संक्षिप्त सम्बन्ध
– यह अनुभाग दाऊद के राज-युग की संरचनात्मक विजय को दर्शाता है, जो अन्य युद्ध-वृत्तांतों में भी सार है।
– विश्वास के साथ आगे बढ़ने पर ईश्वर की सहायता मिलती है, ऐसी नीतियाँ अन्य पुस्तकों में भी बार-बार मिलती हैं।
नोट: नीचे उद्धृत गुरु-टीका से संकेतित पंक्तियाँ यदि उद्धृत हों तो केवल वही छोटे अंश जो मौलिक पाठ से स्पষ্ট हों, ताकि पाठक को मूल भाव और संदर्भ स्पष्ट रहे।