Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 10:19 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 10:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह देखकर कि हम इस्राएल से हार गए हैं, जितने राजा हदादेजेर के अधीन थे उन सभी ने इस्राएल के साथ संधि की, और उसके अधीन हो गए। इसलिए अरामी अम्मोनियों की और सहायता करने से डर गए।
2 शमूएल 10:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 शमूएल 10:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 शमूएल 8:6 (HINIRV) »
तब दाऊद ने दमिश्क के अराम में* सिपाहियों की चौकियाँ बैठाईं; इस प्रकार अरामी दाऊद के अधीन होकर भेंट ले आने लगे। और जहाँ-जहाँ दाऊद जाता था वहाँ-वहाँ यहोवा उसको जयवन्त करता था।

उत्पत्ति 14:1 (HINIRV) »
शिनार के राजा अम्रापेल, और एल्लासार के राजा अर्योक, और एलाम के राजा कदोर्लाओमेर, और गोयीम के राजा तिदाल के दिनों में ऐसा हुआ,

यहोशू 11:10 (HINIRV) »
उस समय यहोशू ने घूमकर हासोर को जो पहले उन सब राज्यों में मुख्य नगर था ले लिया, और उसके राजा को तलवार से मार डाला।
2 शमूएल 10:19 का संदर्भ और मुख्य संदेश
यह पद उन घटनाओं के क्रम में आता है जहां इजराइल की सेना हारने के बाद राजा होनेडेज़ेर के प्रभाव में रहने वाले राज्यों ने एक जुट होकर इजराइल से संधि कर ली। यह दिखाता है कि युद्ध के भय और सामरिक दबाव ने पड़ोसी साम्राज्यों को एक साथ आना सीखाया। इस्लामी-युग की कथा-रेखा नहीं, बल्कि हर 시대 के नैतिक केंद्रीकरण की ओर भी संकेत है कि विपदा के समय मित्रता और संधि बनना और अपने voisins के साथ समीकरण बनना संभव रहता है।
मुख्य भावार्थ
पद यह बताते हैं कि असफलता के क्षणों में शक्तियाँ एक दूसरे के पक्ष में आ जाती हैं ताकि खतरा कम किया जा सके। स्पष्ट शब्दों में, यह दिखता है कि साम्राज्यवादी खतरे के सामने भिन्न-भिन्न राज्य भी एक जैसी सुरक्षा चाहना लेते हैं और एक-दूसरे के साथ समझौते करते हैं।
2-3 प्रमुख विस्तारणे विषय
संबंधित आयतें
यह घटना, और भी कई बार, अलग-अलग राजा-राज्य मिलकर बाहरी खतरे के सामने एकता दिखाते हैं—जिनमें से कुछ अन्य संदर्भों में युद्ध की दिशा बदलते हैं।
उद्धृत संदर्भों में, हर एक का उद्देश्य यह है कि संकट के समय सक्रिय सुरक्षा-चेतना कैसे बढ़ती है और कैसे संधियों के माध्यम से राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है।
व्यावहारिक विचार
हमारे व्यक्तिगत जीवन में भी यह सिखता है कि विपत्ति के समय धैर्य और विवेक से काम लेना चाहिए। यह उचित समन्वय, संवाद और भरोसे पर टिके हुए संबंधों की महत्ता दिखाता है—चाहे वह निजी रिश्ते हों या संस्थागत सहयोग।
छोटा संदर्भ-चित्रण
मथ्यू Henry, Barnes और Clarke जैसे पुरालेख-आधार के टिप्पणियों से यह उभरकर आता है कि संकट के क्षणों में मजबूती से समझौते और योजना बनाना एक सामान्य मानव-प्रकृति है; परन्तु परमेश्वर की योजना में भी विश्वास की स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण रहता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 10:19 में जो हार के बाद संधियों की संभावना उभरती है, वह यह संकेत देती है कि सत्ता-जीवन में सुरक्षा के लिए सामूहिक चतुराई और रणनीतिक सहयोग आवश्यक होते हैं। यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि संकट के समय विवेकपूर्वक निर्णय लेकर सुरक्षित मार्ग बनाते हैं, लेकिन परमेश्वर की स्थिति और आशीष के बिना सतत स्थिरता नहीं मिलती।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
1) यह तस्वीर अन्य साझे खतरे के समय गठबंधन की दिशा दिखाती है—जहाँ राजनैतिक चालबाजियाँ और सुरक्षा-चालें प्रबल होती हैं।
2) यह भी संकेत देता है कि आंतरिक कमजोरी के बावजूद बाहरी ताकतों के साथ समझौते होते हैं, ताकि क्षेत्रीय अशांति कम हो।
3) नैतिक-स्वास्थ्य के लिए स्मरण: संकट में भी विवेक आधारित प्रतिक्रिया, दया और न्याय को साथ लेकर चलते रहने का पाठ देता है।
उद्धृत सुसंगत टिप्पणियाँ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण अगर उपलब्ध हों, तो उन्हें आवश्यक संदर्भ के साथ पढ़के समझना उपयोगी रहता है।