Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 10:13 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 10:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब योआब और जो लोग उसके साथ थे अरामियों से युद्ध करने को निकट गए; और वे उसके सामने से भागे।
2 शमूएल 10:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 शमूएल 10:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 राजाओं 20:13 (HINIRV) »
तब एक नबी ने इस्राएल के राजा अहाब के पास जाकर कहा, “यहोवा तुझ से यह कहता है, 'यह बड़ी भीड़ जो तूने देखी है, उस सब को मैं आज तेरे हाथ में कर दूँगा, इससे तू जान लेगा, कि मैं यहोवा हूँ।'”

1 राजाओं 20:28 (HINIRV) »
तब परमेश्वर के उसी जन ने इस्राएल के राजा के पास जाकर कहा, “यहोवा यह कहता है, 'अरामियों ने यह कहा है, कि यहोवा पहाड़ी देवता है, परन्तु नीची भूमि का नहीं है; इस कारण मैं उस बड़ी भीड़ को तेरे हाथ में कर दूँगा, तब तुम्हें ज्ञात हो जाएगा कि मैं यहोवा हूँ।'”

1 इतिहास 19:14 (HINIRV) »
तब योआब और जो लोग उसके साथ थे, अरामियों से युद्ध करने को उनके सामने गए, और वे उसके सामने से भागे।
सीधे अर्थ की दिशा
2 शमूएल 10:13 में कहा गया है कि योआब और उसके साथ के लोग अरामियों से लड़ाई के लिए निकट गए, और वे उनके सामने से भाग गए। इसका सरल अर्थ यह है कि योआब की सेनाओं ने अत्यधिक प्रतिद्वंद्वी शक्ति के सामने पीछे हटना चाहा, पराक्रम के साथ आक्रमण करने की स्थितियों में वे पीछे हट गए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय इस समयाम के युद्ध-युपर स्थितियों को दर्शाता है जहाँ पति-पत्नी के पुत्र राजा হাস्काह और अन्य राजा-प्रतिद्वंद्वियों के बीच शासन-संकट है। योआब, दावीद की सेना-नेतृत्व में, अपने सामीप्य और रक्षा-नीति के अनुरूप अरामियों के खिलाफ युद्ध में आगे बढ़ता है। इस verse में युद्ध की तत्कालीन गति और मनोविज्ञान स्पष्ट है: विजय के प्रति विश्वास के साथ भी एक क्षणिक संदेह या जोखिम-स्वीकार्यता दिखती है, जिसके कारण वे पीछे हट जाते हैं।
व्याख्यात्मक बिंदु
थीमेटिक सार
अन्य संदर्भों से संकलित विचार
लेखक माता-हेनरी के अनुसार यह स्थिति दिखाती है कि सेना की धैर्य और संसाधनों का संतुलन बनाये रखना ज़रूरी है, ताकि युद्ध-स्थिति में भी आंतरिक स्तर पर विश्वास कायम रहे. ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के अभिलेखों से भी यह मिलता-जुलता विचार है कि वीरता के साथ विवेक भी आवश्यक है, ताकि असफलता की स्थिति में भी भागने से नहीं, बल्कि सोच-समझकर आगे बढ़ने से परिणाम सुधरें. यदि आवश्यक उद्धरण मिलते हैं, तो वे संक्षेप में यह कह सके हैं कि नेतृत्व को हर परिस्थिति में सूझ-बूझ से निर्णय लेने चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके उद्देश्य
1) 2 शमूएल 10:12 — एक नायाब संकेत कि मित्र-शत्रु के बीच साहस के साथ-साथ वास्तविक खतरे की पहचान आवश्यक है।
2) 1 शमूएल 17-18 — निर्णय की नैतिकता और नेतृत्व की आवश्यकता पर विचार दें, जहाँ धैर्य और योजनाबद्ध आक्रमण दोनों आवश्यक हैं।
3) भजन 20:7 — विश्वास और सहायता-आशा के संगठन की भूमिका, युद्ध की घड़ी में मानसिक संबल देता है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
युद्ध-स्थिति में भी निर्णय-समय पर ठहरना और योजना बनाकर करना ही सफलता के नियम होते हैं। योआब की स्थिति से सीख यह है कि हमेशा हर कदम का उद्देश्य स्पष्ट रखें—साधन, साथी और समय का संतुलन। कठिनाई या खतरे के सामने निराश न हों; टीम के साथ मिलकर सही दूरी और आक्रमण-समय चुनें।