Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 10:16 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 10:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और हदादेजेर ने दूत भेजकर फरात के पार के अरामियों को बुलवाया; और वे हदादेजेर के सेनापति शोबक को अपना प्रधान बनाकर हेलाम को आए।
2 शमूएल 10:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 10:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 इतिहास 19:16 (HINIRV) »
फिर यह देखकर कि वे इस्राएलियों से हार गए हैं, अरामियों ने दूत भेजकर फरात के पार के अरामियों को बुलवाया, और हदादेजेर के सेनापति शोपक को अपना प्रधान बनाया।

2 शमूएल 8:3 (HINIRV) »
फिर जब सोबा का राजा रहोब का पुत्र हदादेजेर फरात के पास अपना राज्य फिर ज्यों का त्यों करने को जा रहा था, तब दाऊद ने उसको जीत लिया।

1 इतिहास 18:3 (HINIRV) »
फिर जब सोबा का राजा हदादेजेर फरात महानद के पास अपने राज्य स्थिर करने को जा रहा था, तब दाऊद ने उसको हमात के पास जीत लिया।
संक्षिप्त अर्थ
2 शमूएल 10:16 का यह वाक्य अरामियों के एक दल के फरावत के पार पहुँचने तथा हदादेजेर के नेतृत्व में उनके सैनिकों के संचालन की योजना को दर्शाता है। शबक नामक अरामी सेनापति बनते हैं और हेलाम के विरुद्ध व्यवस्था बनती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय ऐबीगर के युद्ध के समय का है, जहां דוד के परिवार के प्रति दूरी और शत्रुओं के साथ राजनीतिक-军事 संधियाँ चल रही थीं। हदादेजेर एक प्रमुख अर्मानी शासक जिसकी सेना करीब-करीबी इस समय फैल गई है। फरात के पार अरामियों को बुलाने की कार्रवाई से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में परिवर्तन आता है और हेलाम के विरुद्ध नयी चाल चली जाती है।
व्याख्यात्मक बिंदु
संदेशात्मक निष्कर्ष
यह पाठ reminding देता है कि संकट के समय नये alliances बनते हैं और नेतृत्व में परिवर्तन से डिफेन्स और आक्रामकता दोनों का संतुलन प्रभावित होता है। साथ ही यह सच बताता है कि राजनीतिक चालें स्थानीय सुरक्षा और युद्ध-योजना के लिए आवश्यक हो जाती हैं।
सांस्कृतिक और धर्मार्थ विचार
कथा में दलों के बीच समझौतों का राजनीतिक आयाम है, परन्तु परमेश्वर की योजनाएँ भी किसी-न-किसी प्रकार से चलती रहती हैं। यह याद दिलाता है कि विश्वसनीयता और विश्व-नीय नेतृत्व संघर्ष के समय भी प्रमुख रहते हैं।
संकेत-युक्त क्रॉस-रेफरेंस
1) 2 शमूएल 8–9: דוד की सत्ता और पड़ोसी राज्यों के साथ व्यवहार — ये संदर्भ बताते हैं कि युद्ध-स्थिति में नेतृत्व कैसे बनता है।
2) 1 राजा 20:1–3: आक्रमणकारी शक्तियों के गठजोड़ और नेताओं के चयन का चित्रण — एक समान राजनैतिक प्रकाश डालता है।
3) चन 46:9–11: परमेश्वर की योजना के तहत युद्ध-रणनीति का बदलाव — यह समझ देता है कि मानवीय चालों के पीछे ईश्वर की योजना भी है।
संक्षिप्त Practical takeaway
व्यवस्था और नेतृत्व समय के अनुसार बदलते हैं; लेकिन परमेश्वर पर निर्भर विश्वास और नैतिक नेतृत्व ही संकट-समय में स्थिरता देता है। हम अपने कार्यों में योजना बनाते समय ईमानदारी और विवेक बनाए रखें।
उद्धरण (पूर्व-स्वरचित टिप्पणीकारों से)
यदि आवश्यक हो, इन स्त्रोतों से संक्षिप्त, सीधे उद्धरण शामिल किए जा सकते हैं:
Matthew Henry और Albert Barnes के विशिष्ट वाक्यों की संक्षिप्त पद-रचना और Adam Clarke के टिप्पणी-टुकड़े जिनमें वे इस प्रकार के राजनीतिक-युद्ध-परिदृश्यों की व्याख्या करते हैं—ध्यान दें कि यहाँ उद्धृत पंक्तियाँ केवल संकेतात्मक हैं और पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं की जा रहीं।