Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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1 इतिहास 3:1 1 इतिहास 3:2 1 इतिहास 3:3 1 इतिहास 3:4 1 इतिहास 3:5 1 इतिहास 3:6 1 इतिहास 3:7 1 इतिहास 3:8 1 इतिहास 3:9 1 इतिहास 3:10 1 इतिहास 3:11 1 इतिहास 3:12 1 इतिहास 3:13 1 इतिहास 3:14 1 इतिहास 3:15 1 इतिहास 3:16 1 इतिहास 3:17 1 इतिहास 3:18 1 इतिहास 3:19 1 इतिहास 3:20 1 इतिहास 3:21 1 इतिहास 3:22 1 इतिहास 3:23 1 इतिहास 3:24



1 इतिहास 3:16 (HINIRV): संदर्भ में संक्षेप एवं व्याख्या
यह पद 1 इतिहास के प्रभारी कथन में राजा दाविद की वंशावली और बाल्यकालीन घटनाओं के क्रम को स्पष्ट करता है। यहाँ वर्णन है कि दाविद के पुत्रों की सूची में यहोयाकीम का पुत्र यहोयाकीम, उसका बेटा यकोन्याह और उसका पुत्र सिदकियाह किस तरह राजवंश के क्रम को आगे बढ़ाते हैं। यह वही परिवार है जो यरूशालेम के राजसी इतिहास को बनाता है। यीशु मसीह के जन्म-रेखाचित्र से भी जोड़ा गया यह क्रम, सामाजिक-राजसी स्थिरता तथा परमेश्वर की योजना के संपन्न होने के प्रतीक रूप में पढ़ा जाता है।
मुख्य अर्थ
घटित क्रम यह दर्शाता है कि परमेश्वर की योजना मानव पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचित हो रही है। इतिहास की इस सूचि में राजा के वंश-क्रम का दर्जा दिख रहा है, जो यह बताता है कि परमेश्वर ने अपने वादों को एक निरंतर धारा में बनाये रखा है, चाहे परिस्थिति कितनी भी परिवर्तित क्यों न हो। यह पाठ आत्म-नैतिक जिम्मेदारी और राजसी उत्तरदायित्व की याद दिलाता है—वंशावली के हर सदस्य के लिए दायित्व है कि वे परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप जीवन जिएं।
मुख्य थीम्स
संबद्ध आयतें (क्रॉस-रेफरंसेस)
यहाँ तीन संक्षिप्त संदर्भ हैं जो पाठ के साथ सामंजस्य बनाते हैं:
अनुभवजनक विचार
व्यावहारिक दृष्टि से यह पाठ स्मरण कराता है कि हमारी पहचान और विरासत भी परमेश्वर की भीतरी योजना के अंग हैं। किसी भी पीढ़ी में हमारा दायित्व है कि हम ईश्वर के वचन के अनुसार व्यवहार करें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी उद्धार और विश्वास के मार्ग पर चलें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 इतिहास 3:16 की उक्त सूचि से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के वादे और राजसी इतिहास एक क्रम से जुड़ा रहता है। यह हमारे लिए एक स्मरण है कि ईश्वर की योजना समय के साथ-के साथ आगे बढ़ती है, और हर पीढ़ी को अपने मन में उसकी पवित्र योजना को जीवित रखना है।
उद्धरण का नोट
यह पाठ सीधे संदेश देता है कि यहोयाकीम का पुत्र यकोन्याह, इसका पुत्र सिदकिय्याह—यह क्रम राजा के वंश के उल्लेख के रूप में आता है। (मर्यादित क्रेडिट: कुछ पारंपरिक टिप्पणीकारों के अनुसार इस प्रकार की वंशावली राजकुल के दृढ़ संस्था-सूचक के रूप में पढ़ी जाती है।)