Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 14:1 1 राजाओं 14:2 1 राजाओं 14:3 1 राजाओं 14:4 1 राजाओं 14:5 1 राजाओं 14:6 1 राजाओं 14:7 1 राजाओं 14:8 1 राजाओं 14:9 1 राजाओं 14:10 1 राजाओं 14:11 1 राजाओं 14:12 1 राजाओं 14:13 1 राजाओं 14:14 1 राजाओं 14:15 1 राजाओं 14:16 1 राजाओं 14:17 1 राजाओं 14:18 1 राजाओं 14:19 1 राजाओं 14:20 1 राजाओं 14:21 1 राजाओं 14:22 1 राजाओं 14:23 1 राजाओं 14:24 1 राजाओं 14:25 1 राजाओं 14:26 1 राजाओं 14:27 1 राजाओं 14:28 1 राजाओं 14:29 1 राजाओं 14:30 1 राजाओं 14:31



वक्तव्य सार: 1 राजाओं 14:14 (HINIRV)
इस आयत का तात्पर्य है कि यहोवा इस्राएल के लिए एक ऐसा राजा उठाएगा जो यारोबाम के घराने का नाश कर डालेगा। यह विधान तुरंत नहीं, किंतु निश्चित समय पर होगा।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
यशायावादी शासन के बाद इस्राएल दो भागों में बँट गया—उत्तर राजवंश (इस्राएल) और दक्षिणी यहूदा। यारोबाम प्रथम ने उत्तर के राजा के रूप में स्थायित्व के लिए रीति-रिवाज बनाए, परन्तु उसकी नीतियाँ ईश्वर की आज्ञाओं के विरुद्ध गईं, जिससे उसका वंश-समाप्ति-यंत्र शुरू हुआ। इस आयत में परमेश्वर एक ऐसा राजा उठाने का संकेत देता है जो यारोबाम के घराने को नष्ट करेगा। यह प्रस्तुति भविष्य के न्याय की आशा देती है, और यह बताती है कि परमेश्वर राज्य के बारे में निष्ठुर नहीं, बल्कि न्यायप्रिय भी हैं।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
- यहोवा का निर्णय न्याय न करने का नहीं, बल्कि इस्तीफे और दंड के साथ राज्य की पनाह और पथ पर लौटने का आह्वान है।
- “यारोबाम के घराने” से संकेत मिलता है कि करिश्माई सत्ता का दुष्प्रयोग सीमित नहीं रहेगा; परमेश्वर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई करेगा ताकि दुष्कृत्य का अंत हो सके।
हमें कोर संदेश
संबद्ध संदर्भ और उनका छोटा परिचय
1) राजाओं 11–14: यारोबाम के शासन के साथ-साथ उसकी नीतियों पर परमेश्वर की दृष्टि; यह आयत इसका न्यायपूर्ण परिणाम संकेत करती है।
2) दाऊद के राज्यवध से जुड़ा भाग: सत्ता के दुरुपयोग पर परमेश्वर की प्रतिक्रिया की याद दिलाती है।
3) कुलिद के निर्देश: मोड़ने के लिए एक अंतर्निहित योजना है जो धर्म और नैतिकता को केंद्र में रखती है।
पाठ का संक्षिप्त निष्कर्ष
यह आयत यह स्पष्ट करती है कि परमेश्वर समय-समय पर सत्ता के दुरुपयोग पर न्याय करेगा, ताकि राज्य में धर्म और सत्य के मार्ग की पुनर्स्थापना हो सके। विश्वासियों के लिए यह स्मरण है कि सत्ता कितनी भी स्थिर क्यों न हो, परमेश्वर की योजना कभी टलती नहीं और वह न्यायपूर्ण राजा के रूप में अपने उद्देश्य पूरे करेगा।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके निचोड़
- अन्य आयतें जो न्याय और दीक्षित-नियमन पर बल देती हैं (संक्षेप): परमेश्वर की भूमिका राज्य के मामलों में निर्णायक है; विश्वस्तों के लिए பேரस्पष्ट दायित्व यह है कि वे धर्म-निष्ठा बनाए रखें।
व्यावहारिक टेकअवे
अपनी यात्रा में धर्म के मार्ग पर बने रहें, सत्ता के दबाव में भी सत्य और नैतिकता का सम्मान करें, और परमेश्वर के न्याय के समय की प्रतीक्षा करें।