Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 14:1 1 राजाओं 14:2 1 राजाओं 14:3 1 राजाओं 14:4 1 राजाओं 14:5 1 राजाओं 14:6 1 राजाओं 14:7 1 राजाओं 14:8 1 राजाओं 14:9 1 राजाओं 14:10 1 राजाओं 14:11 1 राजाओं 14:12 1 राजाओं 14:13 1 राजाओं 14:14 1 राजाओं 14:15 1 राजाओं 14:16 1 राजाओं 14:17 1 राजाओं 14:18 1 राजाओं 14:19 1 राजाओं 14:20 1 राजाओं 14:21 1 राजाओं 14:22 1 राजाओं 14:23 1 राजाओं 14:24 1 राजाओं 14:25 1 राजाओं 14:26 1 राजाओं 14:27 1 राजाओं 14:28 1 राजाओं 14:29 1 राजाओं 14:30 1 राजाओं 14:31



1 राजाओं 14:22 का हिंदी व्याख्या और संदर्भ
पद 14:22 में यहूदा के लोगों की धार्मिक और नैतिक गिरावट स्पष्ट होती है, जहां वे अपने पुरखाओं से बढ़कर पाप में लिप्त हो गए और यहोवा की दृष्टि के प्रति उनके असंतोष और जलन को भड़काते हैं। यह पाठ इतिहास के उस चरण का संकेत है जब दास्यों के राज्य में परमेश्वर के नियमों के विरुद्ध चलना चालू हो गया था, और इसके परिणामस्वरूप पाप का चक्र राष्ट्रीय जीवन में गहराने लगा।
मुख्य अर्थ
यह पद यह दर्शाता है कि यहूदा ने कथित धार्मिक रीति-रिवाजों के भीतर भी ऐसी बुराइयाँ कर दीं जो परमेश्वर के दिल से निंदित थीं। यह जलन और क्रोध का कारण बनी, क्योंकि वे पुराने वादों और पवित्र विधान के अनुरूप नहीं चले। इस आंदोलन से यह स्पष्ट होता है कि बाहरी धार्मिक क्रियाओं के बिना भी, आंतरिक चरित्र और नीति की पवित्रता परमेश्वर के लिए अनिवार्य है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ संदर्भ
कई डराने वाले संकेतों के साथ, यह पाठ चरित्र और नीति के मेल के बारे में शिक्षित करता है। उदाहरण के लिए, यहूदियों के समय में एक साथ के कारण उनके नेताओं के निर्णय भी प्रभावित होते, और राष्ट्र के धर्मी नेतृत्व के अभाव में सामाजिक नैतिक ढांचा कमजोर हो गया। अन्य संदर्भ जिन्हें देखना उपयोगी है: (1) यहोवा के कड़वे क्रोध के कारणों पर अभिज्ञात हालात, (2) धर्मिक पुनर्स्थापन के लिए धार्मिक आत्म-नियंत्रण की आवश्यकता, (3) प्ररेणाप्रद आशीषों के लिए विश्वास और समर्पण की प्राथमिकता।
व्यावहारिक चिंतन
आज के पाठकों के लिए यह चेतावनी है कि बाहरी धार्मिक गतिविधियाँ तब तक प्रभावी नहीं होतीं जब तक हमारे दिल में परमेश्वर के प्रति विश्वास और निष्ठा पूरी तरह से नहीं है। अपनी जीवनशैली, विचारों और प्रेरणाओं की जाँच करें—क्या हम भी कभी-भी दिखावट से अधिक आंतरिक पवित्रता पर नहीं डालते? परमेश्वर का यहोवा बने रहना तब संभव है जब हम नम्रता, इमानदारी और प्रायश्चित्त के मार्ग पर चलना चुनते हैं।
संक्षिप्त सारांश
1 राजाओं 14:22 यहूदियों की पापी प्रवृत्ति का स्पष्ट प्रमाण है—यह केवल बाहरी धर्म के प्रदर्शन से नहीं टलता; आंतरिक पवित्रता और ईमानदारी की कमी ने परमेश्वर की दृष्टि में उनकी स्थिति को और बिगाड़ दिया। यह पाठ यह भी सिखाता है कि बुराई के विरुद्ध धारणशीलता और धैर्य के साथ सत्यनिष्ठा बनाए रखना परमेश्वर के करीबी बनने की कुंजी है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके छोटे संकेत
नोट: इस पंक्ति के विशिष्ट शब्द-उद्धरण के लिए मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के पूर्ण उद्धरण आवश्यक हों, परंतु इन पाठकों के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी से जुड़ी संकल्पनाओं को समाहित किया गया है।