Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 16:1 1 राजाओं 16:2 1 राजाओं 16:3 1 राजाओं 16:4 1 राजाओं 16:5 1 राजाओं 16:6 1 राजाओं 16:7 1 राजाओं 16:8 1 राजाओं 16:9 1 राजाओं 16:10 1 राजाओं 16:11 1 राजाओं 16:12 1 राजाओं 16:13 1 राजाओं 16:14 1 राजाओं 16:15 1 राजाओं 16:16 1 राजाओं 16:17 1 राजाओं 16:18 1 राजाओं 16:19 1 राजाओं 16:20 1 राजाओं 16:21 1 राजाओं 16:22 1 राजाओं 16:23 1 राजाओं 16:24 1 राजाओं 16:25 1 राजाओं 16:26 1 राजाओं 16:27 1 राजाओं 16:28 1 राजाओं 16:29 1 राजाओं 16:30 1 राजाओं 16:31 1 राजाओं 16:32 1 राजाओं 16:33 1 राजाओं 16:34



1 राजाओं 16:21 का संदर्भ और उसका प्रभाव
उस समय इस्राइल दो भागों में बँटा हुआ था। पाठ कहता है कि तिब्नी नामक गीनत के पुत्र को राजा बनाने के लिये इजरायल की प्रजा दो भागों में विभाजित हो गई—आधे लोग उसके पीछे चले, और आधे ओम्री के पीछे। यह घटना एक मजबूत विभाजन, राजनीतिक संघर्ष और नेतृत्व-प्रत्यक्ष नक्शे के समान है जिसमें जनता के निर्णय ने भविष्य की कीर्ति या विनाश के रस्ते चिन्हित कर दिए।
Immediate setting (तत्काल संदर्भ)
यह पाठ उन दिनों का वर्णन करता है जब शासक के स्थान के लिए इजराइल में सत्ता संघर्ष चल रहा था। राजा का चयन जनता के पक्ष और राजनीतिक गठबंधनों के अनुसार हो रहा था, न कि केवल दायित्व और सामर्थ्य के आधार पर। इस स्थिति में दो विपरीत दल बन जाते हैं: तिब्नी पुत्र गीनत का समर्थक और ओम्री का समर्थक।
God या faith के प्रकट संकेत
यह खंड स्पष्ट करता है कि नेतृत्व के लिये चयन, सामाजिक-राजनीतिक दबावों से प्रभावित होता है, परन्तु परमेश्वर की योजना के बाहर नहीं रहता। दवा-उद्धार का सूत्र यह है कि मानव निर्णय भी परमेश्वर की अपरिहार्य योजना के अंग बनते हैं—भले ही वे किसी-किसी मार्ग से मार्गदर्शित हों। साथ ही, विभाजन से यह भी स्पष्ट होता है कि परमेश्वर लोगन के सामर्थ्य-आधार पर नहीं, बल्कि उनकी आत्म-समझ और मर्म के अनुरूप निर्णयों पर निर्भर करते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
संबंधित पाठ (Cross-references)
- संस्था और विभाजन के बारे में विचार: विधर्मीता और एकता के संदर्भ में अन्य जगहें उपलब्ध हैं जहां लोगों के निर्णय के कारण समाजिक घृणा या सामंजस्य उभरते हैं।
- नेतृत्व और परमेश्वर का चयन: परमेश्वर के विरुद्ध मानवीय आग्रहों के बावजूद, सत्ता-प्राप्ति की दिशा में ईश्वरीय नियंत्रण का सिद्धांत बार-बार उठता है।
- संगठन और समाज: किन्हीं स्थितियों में जन-समर्थन एक राष्ट्र के भविष्य को निर्धारित करता है, जो यहाँ भी परिलक्षित होता है।
आज के संदर्भ में उपयोगी निचोड़
1 राजाओं 16:21 हमारे लिए यह स्मरण कराता है कि सामाजिक दबाव और राजनीतिक ताकतें कभी-कभी बड़े उत्तरदायित्वों के द्वार खोलती हैं—परन्तु ईश्वर के उद्देश्य के अनुसार, समुदाय की एकता और नैतिकता की रक्षा भी आवश्यक है। यह पाठ प्रेरणा देता है कि नेतृत्व में स्पष्ट नीति और नैतिकता के साथ निर्णय लेने चाहिए, ताकि समुदाय विभाजन के बजाय एकता की ओर बढ़े।
संक्षिप्त एक-सूत्री अध्ययन
नोट: इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरण आवश्यकतानुसार शामिल किए जा सकते हैं। उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के अनुसार, यह संकलन मूल विचारों को एक समेकित हिन्दी-वाचन अनुभव में प्रस्तुत करता है।