1 राजाओं 16:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह नबात के पुत्र यारोबाम की सी सब चाल चला, और उसके सब पापों के अनुसार जो उसने इस्राएल से करवाए थे जिसके कारण इस्राएल के परमेश्‍वर यहोवा को उन्होंने अपने व्यर्थ कर्मों से क्रोध दिलाया था।

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1 राजाओं 16:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्या बिंदु

1 राजाओं 16:26 में पद यह दर्शाता है कि यारोबाम ने नबात पुत्रों की चाल चलकर अपने दैत्य-पूर्वपद के पथ पर निर्भर रहते हुए इस्राएल के इतिहास में बार-बार किया गया पाप ही दोहराया। यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि परमेश्वर के विरुद्ध विराट रीति से होने वाले पापों के फलस्वरूप उसे और इस्राएल को क्रोध का सामना करना पड़ा और परिणामस्वरूप उनके व्यर्थ कर्मों के कारण यह क्रम चलता रहा।

साहित्यिक संदर्भ

पद में “यारोबाम की सी सब चाल” का उल्लेख यारोबाम-आईंना के शासन के बाद के युग की निरंतरता की तरफ इशारा करता है—जब इस्राएल में एकीकृत राज्य के विघटन के बाद कई पथभ्रष्ट नेता आए और परमेश्वर की योजना के विपरीत मानक स्थापित किये गए। यह शब्दावली पुराने इतिहास की निरंतरता और नैतिक विमर्श को एक साथ प्रस्तुत करती है: एक ही व्यवहार के दोहराव से इतिहास में दोष के क्रम बनते हैं।

आध्यात्मिक महत्व

यह संदेश यह बताता है कि पाप एक तरह से चक्र बनाता है: कई बार नेता अपने पापों के कारण समाज के लिए आघात का कारण बनते हैं, और फिर यह आचरण पूरे राष्ट्र पर प्रभाव डालता है। परमेश्वर की चेतावनियाँ अक्सर उसी क्रम में आती हैं—पहचान, चेतावनी, दंड—ताकि लोग उलटफेर करें और अपने मार्ग बदले।

बाइबल के साथ अन्य पाठों से कड़ियाँ (Cross-references)

  • यहोशुवा 7:11-12 — जब लोग पाप के कारण आँखें खुलेंगी, तब परमेश्वर उनके मार्ग की जिम्मेदारी लेते हैं। यह दिखाता है कि पाप के परिणाम सामर्थ्यवान होते हैं, और चेतावनियाँ कभी-कभी कठोर होती हैं।
  • 1 राजा 14:9 — यारोबाम ने कैसे अपने पवित्र सेवा-उद्धार को भुलाकर नयी पथ लिया, जिससे देश में विभेद और पाप का क्रम बना।
  • 2 राजा 17:7-8 — इस्राएल के पापों की निरंतरता और किन कारणों से विदेशियों के आक्रमण होते हैं, इसका व्यापक चित्रण मिलता है।

यहाँ त्रुटिहीन संदेश है कि पाप का क्रम समाज में धारणाओं और व्यवहारों को प्रभावित करता है, और परमेश्वर की न्याय-योजना के विरुद्ध चलना परिणाम-स्वरूप होता है।

विचारोपरक प्रश्न

  • हम अपने समाज में किन-किन पथभ्रष्ट रुझानों को देखते हैं जो सामूहिक पाप का कारण बनते हैं?
  • क्या चेतावनियाँ मिलने पर भी लोग परिवर्तित होते हैं, या क्रमशः दंड के साथ ही परिवर्तन संभव होता है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

1 राजाओं 16:26 का संदेश है कि इतिहास बार-बार पाप के क्रम को दोहराता है जब नेता और समाज परमेश्वर की राह से हट जाते हैं। परमेश्वर की पवित्रता और न्याय के अनुसार, पाप के परिणामस्वरुप क्रोध और दंड आते हैं, परन्तु वह हमेशा चेतावनी और अवसर देता है ताकि लोग उलटफेर करें और विश्वास की दिशा में लौटें।

पूर्व-चिह्नित बिंदु (कहानी से जुड़ी भाष्य चोटियाँ): मत्ती हेनरी, अलेक्ट बार्न्स, आदि के पारंपरिक टिप्पणी-रेखाओं में यह विश्लेषण मिलता है कि पाप के चक्र से छुटकारा केवल दीर्घ-धैर्य, प्रत्यक्ष चेतावनी और प्रेरित पथ से संभव है।

नोट: नीचे दी गई पंक्तियाँ से सीधे उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के उद्धरण-रीति से हो सकते हैं यदि उपलब्ध हों:

“…”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 राजाओं 16:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यह उसके पापों के कारण हुआ क्योंकि उसने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था, क्योंकि वह यारोबाम की सी चाल और उसके किए हुए और इस्राएल से करवाए हुए पाप की लीक पर चला।

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इसका कारण बाशा के सब पाप और उसके पुत्र एला के भी पाप थे, जो उन्होंने स्वयं आप करके और इस्राएल से भी करवा के इस्राएल के परमेश्‍वर यहोवा को व्यर्थ बातों से क्रोध दिलाया था।

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1 राजाओं 16:7 (HINIRV) »
यहोवा का जो वचन हनानी के पुत्र येहू के द्वारा बाशा और उसके घराने के विरुद्ध आया, वह न केवल उन सब बुराइयों के कारण आया जो उसने यारोबाम के घराने के समान होकर यहोवा की दृष्टि में किया था और अपने कामों से उसको क्रोधित किया, वरन् इस कारण भी आया, कि उसने उसको मार डाला था।

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