Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 2:1 1 राजाओं 2:2 1 राजाओं 2:3 1 राजाओं 2:4 1 राजाओं 2:5 1 राजाओं 2:6 1 राजाओं 2:7 1 राजाओं 2:8 1 राजाओं 2:9 1 राजाओं 2:10 1 राजाओं 2:11 1 राजाओं 2:12 1 राजाओं 2:13 1 राजाओं 2:14 1 राजाओं 2:15 1 राजाओं 2:16 1 राजाओं 2:17 1 राजाओं 2:18 1 राजाओं 2:19 1 राजाओं 2:20 1 राजाओं 2:21 1 राजाओं 2:22 1 राजाओं 2:23 1 राजाओं 2:24 1 राजाओं 2:25 1 राजाओं 2:26 1 राजाओं 2:27 1 राजाओं 2:28 1 राजाओं 2:29 1 राजाओं 2:30 1 राजाओं 2:31 1 राजाओं 2:32 1 राजाओं 2:33 1 राजाओं 2:34 1 राजाओं 2:35 1 राजाओं 2:36 1 राजाओं 2:37 1 राजाओं 2:38 1 राजाओं 2:39 1 राजाओं 2:40 1 राजाओं 2:41 1 राजाओं 2:42 1 राजाओं 2:43 1 राजाओं 2:44 1 राजाओं 2:45 1 राजाओं 2:46



अर्थ का प्रत्यक्ष सार
1 राजाओं 2:23 में राजा सुलैमान यहोवा की शपथ खाकर प्रतिज्ञान करते हैं कि यदि आदोनिय्याह ने अपने प्राण से खेलकर यह बात कही होगी, तो परमेश्वर मुझे वैसा ही क्या वरन् उससे भी अधिक करे। इसका तात्पर्य है कि सुलैमान ने अपने राज्य-अपमान की कठोर चिंता को दर्शाया है और यह कि परमेश्वर की योजना के भीतर सत्ता की सुरक्षा और समर्थ संकल्प की गूंज है।
प्रसंग-वर्षण (Contextual background)
यह भाग डेविड के पुत्रों के बीच सत्ता के संघर्ष का क्षण है। डेविड के मरते ही सत्ता सुव्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी सुलैमान पर पड़ती है, जबकि आदोनिय्याह सत्ता के लिए दबे-छुपे प्रयास कर रहा था। यह शपथ और कथन उसी निश्चय का प्रतीक है कि जो कुछ भी घटित होगा, परमेश्वर की देन, मार्ग और सुरक्षा के भीतर होगा।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार (Themes)
संबद्ध आध्यात्मिक टिप्पणी (Cross-references with brief explanations)
व्यावहारिक निष्कर्ष (Practical takeaway)
यदि आप नेतृत्व-स्थिति में हों, तो जोखिम का सामना करते समय परमेश्वर की योजना के अनुरूप निर्णय लें, विरोधियों के प्रयासों के सामने भी शान्त और एकचित्त रहें, ताकि सामर्थ्य और प्रशासन में स्थिरता बनी रहे।
इस पाठ का संकल्प यह है कि प्रभु के आदेश में विश्वास रखने वाले नेतृत्व का नैतिक उत्कर्ष और सुरक्षा बनी रहती है, और सत्ता के लिए आवेश-आशा से नहीं, ईश्वर की योजना के अनुरूप चलना चाहिए।
अनुकूलित उद्धरण (यथा आवश्यक): “यदि अदोनिय्याह ने इस प्रकार कहा हो, तो परमेश्वर मुझसे वैसा ही क्या वरन् उससे भी अधिक करे।” (1 राजाओं 2:23)