Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 3:1 2 शमूएल 3:2 2 शमूएल 3:3 2 शमूएल 3:4 2 शमूएल 3:5 2 शमूएल 3:6 2 शमूएल 3:7 2 शमूएल 3:8 2 शमूएल 3:9 2 शमूएल 3:10 2 शमूएल 3:11 2 शमूएल 3:12 2 शमूएल 3:13 2 शमूएल 3:14 2 शमूएल 3:15 2 शमूएल 3:16 2 शमूएल 3:17 2 शमूएल 3:18 2 शमूएल 3:19 2 शमूएल 3:20 2 शमूएल 3:21 2 शमूएल 3:22 2 शमूएल 3:23 2 शमूएल 3:24 2 शमूएल 3:25 2 शमूएल 3:26 2 शमूएल 3:27 2 शमूएल 3:28 2 शमूएल 3:29 2 शमूएल 3:30 2 शमूएल 3:31 2 शमूएल 3:32 2 शमूएल 3:33 2 शमूएल 3:34 2 शमूएल 3:35 2 शमूएल 3:36 2 शमूएल 3:37 2 शमूएल 3:38 2 शमूएल 3:39



2 शमूएल 3:9 का संदर्भ और संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यह पद दाऊद और अब्नेर के बीच की घटनाओं के संदर्भ में आता है। न यदि दाऊद के प्रति परमेश्वर की प्रतिज्ञा और अनुग्रह की स्मृति हो, तब ग़लती से भी आधिकारिक वैधता का दावा तो नहीं; बल्कि जो भी संबंध परमेश्वर से है, वह सत्य और वफादारी की कसौटी पर कसना चाहिए। इस पर्व में यह संदेश उभरता है कि परमेश्वर के साथ करने का संकल्प कोई हल्का या व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं होना चाहिए; उसे पूरा करने के लिए आचरण, वचनबद्धता और निष्काम सेवा आवश्यक है।
केंद्रीय अर्थ
पद प्रमुख रूप से कहता है कि यदि मैं दाऊद के साथ परमेश्वर की शपथ के अनुसार बर्ताव न करूँ, तो परमेश्वर अब्नेर से वैसा ही, वरन् उससे भी अधिक करे। यह एक शब्द-गत सावधानता है: जो कभी शपथ-बंध क्रिया के अनुसार बर्ताव न करे—उससे परमेश्वर की न्याय की पद-चिह्नें मिलेंगी।(उद्धरण-योग्य विचार: सत्य और स्मरणीय प्रतिज्ञाओं के अनुरूप कार्य का महत्त्व—जो दामन में परमेश्वर के विश्वास पर टिका होता है।)
मुख्य विषय
सम्बन्धित पवित्र ग्रंथ
वैसी विचारधारा के लिए प्रासंगिक संदर्भ जिन्हें आप देख सकते हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि शपथ के अनुसार आचरण एक जीवन-यात्रा है, जिसमें परमेश्वर का सम्मान सर्वोपरि है।
व्यावहारिक विचार
- अपने व्यवहार में आप शपथ और वफादारी के मानकों को कैसे रेखांकित करते हैं? अपने निर्णयों में परमेश्वर की इच्छा को पहले रखें।
- यदि आप किसी प्रतिज्ञा के साथ भ्रमित हों, तो पूछें: क्या यह निर्णय परमेश्वर के चरित्र और वचन के अनुरूप है?
संक्षेप
यह शांति-भंग के समय भी हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर के साथ किए गए बन्धन सत्य, निष्ठा और निश्चय पर टिके रहते हैं। यदि हम दाऊद की तरह शपथ-निष्ठा को गहराई से अपनाते हैं, तो परमेश्वर हमारे लिए भी उसी प्रकार कृपा और न्याय का मार्ग खोलते हैं।
एतिहासिक-आत्म-समीक्षा के उद्धरण
आलेखिक टिप्पणीकारों के मिलते-जुलते विचार इस तरह मिलते हैं: एप्लीकेटिप-आलोचना में विश्वास-आचरण और प्रतिज्ञाओं की निष्ठा का संयोजन एक ईमानदार जीवन के लिए आधार है।
छोटी क्रॉस-रेफरेंसेस: 1 शमूएल 12:15; 2 शमूएल 7:16; निर्गमन 19:5-6 — प्रत्येक जगह प्रतिज्ञाओं की पवित्रता और आचरण के महत्व पर बल दिया गया है।