Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 28:1 1 शमूएल 28:2 1 शमूएल 28:3 1 शमूएल 28:4 1 शमूएल 28:5 1 शमूएल 28:6 1 शमूएल 28:7 1 शमूएल 28:8 1 शमूएल 28:9 1 शमूएल 28:10 1 शमूएल 28:11 1 शमूएल 28:12 1 शमूएल 28:13 1 शमूएल 28:14 1 शमूएल 28:15 1 शमूएल 28:16 1 शमूएल 28:17 1 शमूएल 28:18 1 शमूएल 28:19 1 शमूएल 28:20 1 शमूएल 28:21 1 शमूएल 28:22 1 शमूएल 28:23 1 शमूएल 28:24 1 शमूएल 28:25



शब्दार्थात्मक अर्थ
यह वाक्य कहता है कि यहोवा ने Saul के विरुद्ध ऐसा निर्णय किया है जैसा उसने उसकी करूणित मर्जी के अनुसार प्रकट किया था—यानी राज्य प्रभुत्व खो देने का भाग्य उसके पास तय हो गया है और वह दाऊद को नहीं, बल्कि उसके पड़ोसी को दे दिया गया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
1 शमूएल 28 अध्याय में साऊल का भयभीत और अस्वीकार्य स्थिति है। फिलिस्तीनी सेनाओं के मुकाबले उसकी सेना कमजोर पड़ रही है, और उसने भविष्य के लिए उत्तरदायित्वपूर्ण निर्णय लेने की कोशिश में कूच किया। यहोवा की स्पष्ट आवाज़ और मार्गदर्शन की कमी दिखती है—साऊल ने दाउद के प्रति शासन-चयन को छोड़कर अपनी सत्ता का एकमात्र भरोसा खो दिया है। इस आयत में कहा गया है कि यहोवा ने साऊल की स्थिति वैसी बनाई है जैसी उसने कहा था: सऊल के पास अब राज्य नहीं रहेगा; उसका शासन गया, और यह दाऊद को दे दिया गया।
व्याख्यात्मक टिप्पणी
- यहोवा की योजना से असंगत निर्णयों के परिणामस्वरूप सत्ता का पलटाव दिखता है। यह बताता है कि परमेश्वर अपने मन मुताबिक शासन-संरचना बदलता है, और मानव के स्वप्न या डर उसे रोक नहीं पाते।
- सोपानिक रूप से, साऊल ने स्वयं के व्यवहार से अपना राज्य गंवाया, न कि किसी बाहरी प्रतिद्वंद्वी के कारण; अभी भी वह इस परिवर्तन के साथ जी रहा है परंगत नहीं है, क्योंकि परमेश्वर का निर्णय अंतिम है।
- यहोवा के निर्णय के पीछे एक गंभीर संदेश है: कृपया सत्ता की सुरक्षा पृथ्वी पर नहीं हो सकती; परमेश्वर के अनुसार जीवन और नेतृत्व रहता है, न कि मनुष्य की योजना।
महत्वपूर्ण नज़रीय बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतात्मक, संक्षेप में)
या संदर्भों में से एक-दो संदेश: - पुराने नियम में सत्ता का परिवर्तन ईश्वर की योजनाओं के अनुरूप होता है; यहूदा की चालों के विपरीत भी हो सकता है पर परिणाम भगवान के नियंत्रण में रहते हैं। - मत्ती पवित्र शास्त्रों के साथ, राजा का पतन और ईश्वर के योजनाओं का प्रसार स्पष्ट होते हैं।
सार और व्यावहारिक अनुसरण
इस आयत से सीख मिलती है कि कष्ट और परिवर्तन के समय भी परमेश्वर की योजना मान्य होती है। हमारे लिए अभ्यास योग्य बातें: - भय या दबाव में निर्णय लेने से बचें; प्रार्थना और परामर्श से मार्ग चुनें। - सत्ता के प्रति संतुलन बनाए रखें, परन्तु परमेश्वर के निर्देश को सर्वोच्च मानें।
उद्धरण संकेत (पिछले पंक्ति): इस तरह के विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्ववर्ती टिप्पणियों में भी पाए जाते हैं कि परमेश्वर की योजना सत्ता के ऊपर है और मनुष्य के कदम उसी के अनुसार निर्धारित होते हैं।
आवश्यक उद्धरण संकेत
यदि उपलब्ध हो, नीचे दिये गए नेताओं के सीधे शब्दों के छोटे अंश देखें: - "यहोवा ने... व्यवहार किया है"—यह कहना एक स्पष्ट प्रकार से परमेश्वर के निर्णय को दर्शाता है।