1 शमूएल 28:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पलिश्तियों की सेना को देखकर शाऊल डर गया, और उसका मन अत्यन्त भयभीत हो काँप उठा।

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1 शमूएल 28:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 28:5 — immediate setting

पलिश्तियों की सेना दिखते ही शाऊल का मन चूर-चूर हो गया। उसने डर और भय की एक Sammilit स्थिति अनुभव की, जब युद्ध-भूमि के आस-पास के दृश्य ने उसे असुरक्षित और असाहाय महसूस कराया। यह परिस्थितियाँ उसे ईश्वर की सहायता से बहुत दूर ले जाती हैं और एक पल में उसकी स्थिरता टूट जाती है।

यह पाठ ईश्वर या विश्वास के बारे में क्या बताता है

इस वाक्य में सुरक्षा केवल बाहरी शक्ति पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि आंतरिक विश्वास की स्थिति पर भी निर्भर है। शाऊल का भय दिखाता है कि जब मन परमेश्वर की उपस्थिति और समर्थक मार्ग से कट जाता है, तब भीड़-भाड़, दुश्मन और अस्थिरता के बीच व्यक्ति कितनी जल्दी भयग्रस्त हो सकता है। लेकिन ईश्वर के प्रति विश्वास की कमी उन परिस्थितियों में भी एक गलत रास्ता दिखा सकता है—यही शाऊल के दिन-भर में बार-बार देखने योग्य परिणाम है।

महत्वपूर्ण शब्दों/प्रतीकों की स्पष्टीकरण

- पलिश्ती: एक पुरानी प्रतिद्वंद्वी साम्राज्य, जिसने इस्रायली राज्य के साथ कई वर्षों तक संघर्ष किया और शाऊल के शासन के समय भी आक्रमण की योजना बनायी।

- डर: यहाँ शाऊल का मस्तिष्क-आने वाला भय बाहरी खतरे के कारण नहीं बल्कि आत्म-विश्वास की कमी और परमेश्वर के साथ भक्ति-सम्बन्ध के क्षरण के कारण है।

अन्य संबंधित आयतें

  • यहोवा के लिए दृढ़ विश्वास: प्रेरित करता है कि संकट के समय भी हम प्रभु पर निर्भर रहें।
  • भय और विश्वास के द्वंद्व: जब भय dominates, तो विश्वास की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट होती है।

उल्लेखित कोट्स की जगह यहाँ पूर्ण पाठ नहीं है, पर उल्लेखित विषयों के साथ अन्य आयतें जो इस स्थिति से जुड़ी हैं—यशायाह और भजन में मिलती हैं, जो संकट के समय परमेश्वर के समर्थन का स्मरण कराती हैं।

अन्य भागों से सम्बन्ध (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

  • यहोवा पर अटल भरोसा: संकट के समय परमेश्वर के साथ विश्वास की पुनर्स्थापना की ओर इशारा करता है; यह विश्वास शांति और साहस देता है।
  • मन की स्थिरता बनाये रखना: भय के बीच भी आस्था को स्थिर रखने की प्रेरणा देती है।
  • आत्म-निर्भरता बनाम परमेश्वर-निर्भरता: मानव क्षमताओं की सीमा को दिखाती है और परमेश्वर के गुणों पर भरोसे की महत्ता बताती है।

आज के संदर्भ में प्रयोग

आज के दुखों, आशंकाओं और निर्णयों के समय शाऊल की स्थिति हमें सिखाती है कि भय से पार पाने के लिए ईश्वर की उपस्थिति और उसकी वचन पर अटल विश्वास जरूरी है। कठिन परिस्थितियाँ आएं तो भी ईश्वर के सामने खोल-कर बुलाहट दें: वह हमारे लिए शांति और साहस प्रदान करेगा।

संक्षिप्त समेकित समझ

पलिश्ती युद्ध के खतरे के सामने शाऊल का भय बताता है कि संकट के समय सत्य भय से प्रेरित होकर क्रिया-व्यवहार कैसे प्रभावित होते हैं। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के साथ सच्चा विश्वास ही भय को नियंत्रित कर सकता है और साहस प्रदान कर सकता है।

ध्यान दें: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मूल-उद्धरणों का प्रत्यक्ष संकलन उपलब्ध नहीं है; उनके विचारों के सार को पाठ-संदेश के अनुरूप प्राकृतिक हिन्दी रूप में समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 28:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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चारों ओर से डरावनी वस्तुएँ उसे डराएँगी और उसके पीछे पड़कर उसको भगाएँगी।

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उसके कान में डरावना शब्द गूँजता रहता है, कुशल के समय भी नाश करनेवाला उस पर आ पड़ता है।

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भजन संहिता 73:19 (HINIRV) »
वे क्षण भर में कैसे उजड़ गए हैं! वे मिट गए, वे घबराते-घबराते नाश हो गए हैं।

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