Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 3:1 2 शमूएल 3:2 2 शमूएल 3:3 2 शमूएल 3:4 2 शमूएल 3:5 2 शमूएल 3:6 2 शमूएल 3:7 2 शमूएल 3:8 2 शमूएल 3:9 2 शमूएल 3:10 2 शमूएल 3:11 2 शमूएल 3:12 2 शमूएल 3:13 2 शमूएल 3:14 2 शमूएल 3:15 2 शमूएल 3:16 2 शमूएल 3:17 2 शमूएल 3:18 2 शमूएल 3:19 2 शमूएल 3:20 2 शमूएल 3:21 2 शमूएल 3:22 2 शमूएल 3:23 2 शमूएल 3:24 2 शमूएल 3:25 2 शमूएल 3:26 2 शमूएल 3:27 2 शमूएल 3:28 2 शमूएल 3:29 2 शमूएल 3:30 2 शमूएल 3:31 2 शमूएल 3:32 2 शमूएल 3:33 2 शमूएल 3:34 2 शमूएल 3:35 2 शमूएल 3:36 2 शमूएल 3:37 2 शमूएल 3:38 2 शमूएल 3:39



अर्थ का प्रत्यक्ष संदेशन
2 शमूएल 3:25 में यह कहा गया है कि अब्नेर ने राजा डेविद के प्रति छल के भीतर काम किया और जानबूझकर उनके आने-जाने और हर कार्य की भेद-भंग सूचना रखने का प्रयास किया। यह बताता है कि असत्य और राजनीतिक चालें समाज के भीतर कैसे फैलती हैं, विशेषकर सत्ता के खींच-तान के समय।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ शमूएल के उत्तराधिकार और दाविद की सत्ता-युद्ध के समय की व्यवस्था का भाग है। अब्नेर, नेर के पुत्र, इर्त-बहुत चालाकी से दाविद के विरुद्ध काम कर रहा था ताकि अपने सत्तोचित उद्देश्य प्राप्त कर सके। इस verses में उसका छल उजागर होता है, और अगले भागों में दाविद की प्रतिक्रिया तथा शांति-सामंजस्य के प्रयास का चित्रण है।
व्याख्यात्मक बिंदु
कथा से जुड़ी विचारशील टिप्पणियाँ
पाठ में छल का पता चलना दाविद के लिए एक नैतिक परीक्षण है: क्या वह अशांत राजनीतिक वातावरण में अपनी एकता बनाए रख पाएगा? Matthew Henry और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के अनुसार यह घटना दिखाती है कि प्रभु के उद्देश्य के प्रति Faithfulness बनाये रखना कितना आवश्यक है, भले ही समय अत्यंत कठिन हो। Clarke और Barnes के प्रकाशनों में इस तरह के विश्वासघात को आस्था-परख के रूप में समझाया गया है, ताकि विश्वासी अपने भरोसे को सीधे रखें और परमेश्वर की योजना को स्वीकार करें।
संकीर्ण cross-reference (संक्षिप्त प्रभाव)
उपयोगी निष्कर्ष (संक्षेप)
इस अंश से मौलिक संदेश है: धोखे से बचने के लिए की गई चतुराई भी अंततः परखनी पड़ती है; ईश्वर के साथ सत्य-निष्ठा ही स्थिर नेतृत्व का आधार है। सामाजिक दलदल में भी नैतिकता और धार्मिक विश्वास बनाए रखना चाहिए ताकि परमेश्वर की योजना को बाधित न किया जा सके।
छोटा practical takeaway
संक्षिप्त उद्धरण आकलन
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्दों से मिलान चाहते हैं, तो वे यह बताते हैं कि छल का पर्दाफाश मानव-निर्मित राजनीति में अवश्य होता है, परन्तु ईमानदारी और प्रभु-आस्था से ही मार्ग प्रशस्त होता है। किसी भी पूर्ण उद्धरण की जगह, उनके सामान्य निष्कर्ष यही रहते हैं: विश्वासघात के समय भी परमेश्वर की योजना सर्वोपरि है और सच्चे जीवन का मार्ग विवेकपूर्ण तथा नैतिक होना चाहिए।