Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 3:1 2 शमूएल 3:2 2 शमूएल 3:3 2 शमूएल 3:4 2 शमूएल 3:5 2 शमूएल 3:6 2 शमूएल 3:7 2 शमूएल 3:8 2 शमूएल 3:9 2 शमूएल 3:10 2 शमूएल 3:11 2 शमूएल 3:12 2 शमूएल 3:13 2 शमूएल 3:14 2 शमूएल 3:15 2 शमूएल 3:16 2 शमूएल 3:17 2 शमूएल 3:18 2 शमूएल 3:19 2 शमूएल 3:20 2 शमूएल 3:21 2 शमूएल 3:22 2 शमूएल 3:23 2 शमूएल 3:24 2 शमूएल 3:25 2 शमूएल 3:26 2 शमूएल 3:27 2 शमूएल 3:28 2 शमूएल 3:29 2 शमूएल 3:30 2 शमूएल 3:31 2 शमूएल 3:32 2 शमूएल 3:33 2 शमूएल 3:34 2 शमूएल 3:35 2 शमूएल 3:36 2 शमूएल 3:37 2 शमूएल 3:38 2 शमूएल 3:39



पलायन की पूर्णता: 2 शमूएल 3:34 का संदर्भ और अर्थ
तथा उस समय का दृश्य सामने आता है जब इस्राइल के भीतर सत्ता-संघर्ष के कारण राजा टोबा (तेलवाहक) या एक अन्य प्रतिपक्षी नेता को मार डाला गया। पाठ 2 शमूएल 3:34 में वह दृढ़ और कठोर साम्राज्य-यंत्रणाओं का दृश्य मिलता है: “न तो तेरे हाथ बाँधे गए, और न तेरे पाँवों में बेड़ियाँ डाली गईं; जैसे कोई कुटिल मनुष्यों से मारा जाए, वैसे ही तू मारा गया।” यह वाक्य एक अत्यंत निंदनिय और निष्कर्षपूर्ण अन्तर्द्वन्द्व का चित्रण करता है जिसमें बिना भिन्न-भिन्न शास्ती पहचाने, एक निर्दोष-सा प्राणहीन मृत्यु हो जाती है। subsequently, लोगों की प्रतिक्रिया भी व्यक्त की गई है—“तब सब लोग उसके विषय फिर रो उठे”—जो द्रवीकरण और शोक का प्रकटीकरण है।
ईश्वर और आस्था के प्रकाश में पाठ की खोज
यह उद्धरण एक समय की कठोरताओं के बीच ईश्वर की नीति और न्याय के संकेत देता है। God का प्रत्यक्ष क्रिया-वाद नहीं दिखता, पर कृत्यों की परिणति और मानवीय व्यवहार के बीच एक नैतिक क्रम प्रकट होता है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के योजनागत शासन में भी सत्ता के खेलों के परिणाम काटकर दूषित नहीं रहते, बल्कि अन्यायपूर्ण हत्या के विरुद्ध एक सामाजिक और आध्यात्मिक प्रत्युत्तर उभरता है—दूसरों के हृदयों में करुणा और न्याय की आवाज जगी।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य अभिलेखों से सम्बन्ध
यहां नीचे दिए गए सम्बन्ध पाठ संतुलन और धार प्राप्त करते हैं:
हाल के दिनों के लिए अनुप्रयोग
हम अपने समाज में भी अन्याय, हिंसा और सत्ता-संघर्ष के समय एक नैतिक उत्तर की आवश्यकता देखते हैं। इस पाठ से सीख मिलती है कि: - हर व्यक्ति की गरिमा को सम्मान देना आवश्यक है, भले ही परिस्थितियाँ कठिन क्यों न हों। - शोक और मूक करुणा से सामाजिक एकता बनती है; बहस से भी अधिक, संवेदनशीलता और न्याय की प्रस्तुति आवश्यक है। - परमेश्वर के न्याय पर विश्वास बनाए रखें, क्योंकि मानव बोध और राजनीतिक हलचल के बीच भी ईश्वर की योजना चलती है।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफ़रेंसे
छोटी-छोटी क्रॉस-रेफ़रें: दुख, न्याय और सुरक्षा के विषय में अन्य पंक्तियाँ जो पाठ के साथ संबंध स्थापित करती हैं—
यह विश्लेषण 2 शमूएल 3:34 के दृश्य को एक समेकित प्रकाश में प्रस्तुत करने का प्रयास है—परमेश्वर के न्याय के प्रति विश्वास और समाज में दया की ज़रूरत को रेखांकित करते हुए।
उद्धरण स्रोत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-भंडार से सम्बन्धित विचारों के सामान्य अर्थ-विचार साझा किए गए हैं; इनमें से किसी एक से सीधे वाक्य उद्धृत नहीं किए गए हैं।