Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 9:1 1 राजाओं 9:2 1 राजाओं 9:3 1 राजाओं 9:4 1 राजाओं 9:5 1 राजाओं 9:6 1 राजाओं 9:7 1 राजाओं 9:8 1 राजाओं 9:9 1 राजाओं 9:10 1 राजाओं 9:11 1 राजाओं 9:12 1 राजाओं 9:13 1 राजाओं 9:14 1 राजाओं 9:15 1 राजाओं 9:16 1 राजाओं 9:17 1 राजाओं 9:18 1 राजाओं 9:19 1 राजाओं 9:20 1 राजाओं 9:21 1 राजाओं 9:22 1 राजाओं 9:23 1 राजाओं 9:24 1 राजाओं 9:25 1 राजाओं 9:26 1 राजाओं 9:27 1 राजाओं 9:28



आख्यान का सीधा अर्थ
1 राजाओं 9:5 में कहा गया वचन यह है कि दाऊद के बेटे का राजValidate सदा बना रहे, ताकि इस्राएल की गद्दी पर विराजमान लोग आपके पिता दाऊद के वचन के अनुरूप स्थिर रहें। यह वचन परमेश्वर की पुष्टि और वंशानुक्रम की स्थिरता का संकेत है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ सुलैमान के शासन के अपेक्षित संदर्भ में आता है, जब परमेश्वर ने दाऊद से वंश के लिए वचन दिया था। यह प्राचीन इस्राएल की राजसी अनुशासन और कुटुम्बीय व्यवस्था का हिस्सा है। परमेश्वर के वचन के अनुसार, यदि राजा ईमानदार रहे और परमेश्वर के आचार-विचार के अनुसार शासन करे, तब उसका परिवार और उसका राज्य पीढ़ी दर पीढ़ी सुरक्षित रहेगा।
व्याख्यात्मक बिंदु
3 सूचनात्मक cross-references (संक्रमण सम्बन्धी छोटा विवरण)
- 2 शमूएल 7:16 – दाऊद के घर की perpetual राज्य की प्रतिज्ञा का आध्यात्मिक आधार स्पष्ट करता है; परमेश्वर का वचन राजा के स्थायित्व को निर्देशित करता है।
- 1 राजाओं 3:14 – यदि तुम मेरे मार्गों पर चलो, तो तुम्हारे सामने भी क्षणिक विफलता के बाद परमेश्वर की कृपा स्थिर रहेगी।
- यिर्मयाह 33:17-18 – यद्यपि ऐतिहासिक नाटक में बदलाव आते हैं, परमेश्वर की स्थिर प्रतिज्ञा और राजसी संरचना अंततः उसी उद्देश्य को दोहराती है: प्रभु के साथ सत्य।
इन संदर्भों से समझ आता है कि परमेश्वर की आशीष सत्ता के साथ-साथ नैतिकता और धार्मिक निष्ठा पर टिकती है।
पवित्र विचार
व्यावहारिक निष्कर्ष
हर विश्वासयोग्य नेता के लिए यह पाठ संकेत देता है कि प्रभु की इच्छा में स्थिरता पाने के लिए आचार, नैतिकता और सेवाभाव आवश्यक हैं। राजसी आनुवंशिकता भले ही भौतिक परंपरा है, पर परमेश्वर की आशीष तब ही टिकती है जब शासनकर्ता अपने शासन में सत्य और न्याय को प्राथमिकता दें।
समरी
यह वचन दाऊद-वंश के लिए एक स्थिर, ईश्वर-प्रदत्त आश्वासन है कि उसका राज सदा बना रहेगा, बशर्ते राजा और प्रजा परमेश्वर के मार्ग पर चले। यह एक उच्च अवसर है कि राजसी सत्ता नैतिक और धार्मिक दायित्वों के साथ जुड़ी रहे, ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी आशीष पाएं।
नीचे उद्धृत प्रसिद्ध भाष्यकारों के संक्षेपित विचार सामान्यीकृत हैं; यदि आवश्यकता हो तो आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मूल पंक्तियों के छोटे उद्धरणों के लिए पूछ सकते हैं।