Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 9:1 1 राजाओं 9:2 1 राजाओं 9:3 1 राजाओं 9:4 1 राजाओं 9:5 1 राजाओं 9:6 1 राजाओं 9:7 1 राजाओं 9:8 1 राजाओं 9:9 1 राजाओं 9:10 1 राजाओं 9:11 1 राजाओं 9:12 1 राजाओं 9:13 1 राजाओं 9:14 1 राजाओं 9:15 1 राजाओं 9:16 1 राजाओं 9:17 1 राजाओं 9:18 1 राजाओं 9:19 1 राजाओं 9:20 1 राजाओं 9:21 1 राजाओं 9:22 1 राजाओं 9:23 1 राजाओं 9:24 1 राजाओं 9:25 1 राजाओं 9:26 1 राजाओं 9:27 1 राजाओं 9:28



1 राजाओं 9:16 — पाठ का तात्कालिक संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह उद्धरण सुलईमान के शासन के पहले भाग से जुड़ा है, जब बिशप्ति के बाद राजा डेविड के उत्तराधिकारी राजा शालूमन के विरुद्ध कुछ कदम उठाने लगते हैं। गेजर नामक नगर, जो पुराने समय का एक प्रमुख किला था, इस पवित्र अवसर में मिस्र के फिरौन के हाथ अनुभव किया गया एक युद्ध-प्रारम्भ का प्रतीक बनता है। इस पाठ के भीतर एक कठोर दृश्य आता है: एक नगर पर चढ़ाई, आग, नर-नुकसान, और कानानियों का विनाश, जो इतिहास के एक कालखण्ड के दुखद सत्य को सामने रखता है।
पवित्रता, अपराध और दायित्व: ईश्वर के बारे में पाठ से मिलता संकेत
यह पाठ सीधे तौर पर बताता है कि परमेश्वर के वादों के पथ पर चलना किसी राष्ट्र की सुरक्षा और उन्नति के लिए अति आवश्यक है, तथा ईश्वर की सामर्थ्य और निर्णयों के सामने मानव-योजना कितनी छोटी पड़ जाती है। इस घटना के माध्यम से यह स्थापित होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ नियमों और अधिकारों के अनुरूप ही आगे बढ़ता है, और यदि राष्ट्र अपने परमेश्वर के पक्ष से भटकता है तो परिणाम भी भयावह हो सकते हैं।
मुख्य शब्द और छवियाँ
गीगर-चढ़ाई, आग लगाना, नगर-नाश — यह सब चित्र बता रहे हैं कि प्रतिशोध और दण्ड की शक्ति परमेश्वर के न्यायप्रिय हाथों में है। इस प्रकार के शब्द-चित्र इतिहास के कठोर वास्तविकताओं की ओर इशारा करते हैं: जो देश अपनी और परमेश्वर की अघोषित दूरी बनाते हैं, उन्हें सामाजिक-आर्थिक विनाश भी झेलना पड़ता है।
अन्य टिप्पणियाँ जो पाठ से जुड़ती हैं
1) परमेश्वर के अनुयायियों के लिए सावधानीपूर्ण पालन: इतिहास के अन्य भागों में भी देखा गया है कि राजा या राष्ट्र, जो ईश्वर के नियमों के अनुरूप नहीं चलते, उन्हें संघर्षों का सामना करना पड़ता है।
2) दायित्व और उत्तरदायित्व: कुटुंब, राज्य और समाज सभी पर ईश्वर के नियमों के अनुरूप आचरण का दबाव बना रहता है; असफलता के समय परिणाम स्पष्ट होते हैं।
सम्बन्धित प्रस्थान
अर्थपूर्ण संकेतन के लिए निम्नCross-References विचार करें:
इन संदर्भों के साथ विचार यह है कि ईश्वर की दिशा में स्थिर और सजग रहने से सुरक्षा और शांति मिलती है, जबकि अवहेलना से विनाश के मार्ग खुलते हैं।
आज के युग में अनुप्रयोग
- नागरिकता, नीति-निर्माण और नेतृत्व-निर्णय में ईश्वर के मार्ग को प्रथम स्थान देना चाहिए।
- समुदाय के हर स्तर पर नैतिकता, न्याय और शांति के सिद्धांतों को बनाए रखना चाहिए, ताकि दण्डपूर्ण घटनाओं से बचा जा सके।
- व्यक्तिगत आस्था में ईश्वर के साथ निष्ठा बनाए रखना और अधर्म से दूरी बनाए रखना आज भी आवश्यक है; क्यों कि इतिहास के पाठ से स्पष्ट है कि निष्ठा ईश्वर की आशीषों को जन्म देती है।
टिप्पणी नोट: इस पाठ के स्पष्ट शब्द-चित्र और दायित्वगत संदेश के संदर्भ में मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के पारंपरिक टिप्पणी-स्त्रोतों से संबद्ध विचारों के छोटे-छोटे उद्धरण क्षितिज पर आते हैं, परन्तु यहाँ हम उनके पूर्ण पाठ नहीं उद्धृत करते। यदि आप चाहें तो मैं उनके संक्षिप्त कथनों का संकलन दे सकता हूँ।