Old Testament
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यहोशू 16:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु जो कनानी गेजेर में बसे थे उनको एप्रैमियों ने वहाँ से नहीं निकाला; इसलिए वे कनानी उनके बीच आज के दिन तक बसे हैं, और बेगारी में दास के समान काम करते हैं।
यहोशू 16:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 16:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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न्यायियों 1:29 (HINIRV) »
एप्रैम ने गेजेर में रहनेवाले कनानियों को न निकाला; इसलिए कनानी गेजेर में उनके बीच में बसे रहे।

1 राजाओं 9:16 (HINIRV) »
गेजेर पर तो मिस्र के राजा फ़िरौन ने चढ़ाई करके उसे ले लिया था और आग लगाकर फूँक दिया, और उस नगर में रहनेवाले कनानियों को मार डाला और, उसे अपनी बेटी सुलैमान की रानी का निज भाग करके दिया था,

व्यवस्थाविवरण 7:1 (HINIRV) »
“फिर जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उस देश में जिसके अधिकारी होने को तू जाने पर है पहुँचाए, और तेरे सामने से हित्ती, गिर्गाशी, एमोरी, कनानी, परिज्जी, हिव्वी, और यबूसी नामक, बहुत सी जातियों को अर्थात् तुम से बड़ी और सामर्थी सातों जातियों को निकाल दे, (प्रेरि. 13:19)
यहोशू 16:10 का संक्षिप्त संदर्भ और अर्थ
यहोशू के वंशवृत्त में एप्रैम के क्षेत्रीय बटवारे के दौरान, गोत्र-प्राप्ति के बाद भी कुछ नगर-पल्लों के भीतर कनानी लोगों के बसे रहने का उल्लेख मिलता है। यहोशू 16 अध्याय में एप्रैम के अधिकार-क्षेत्र की सीमाओं का विवरण है और बताता है कि कनानी जन पहले से वहाँ थे, और इज़रायली जातियों के साथ उनके बीच संघर्ष के बावजूद वे वहीं बने रहे।
मुख्य विचार
पंक्ति से स्पष्ट है कि जब एप्रैम ने अपनी और अपने क्षेत्र की सीमा निर्धारित कर दी, तब भी कुछ कनानी लोग उनसे नहीं निकले। परिणामस्वरूप वे आज तक उनके बीच बसे रहे और दास-से धंधों में जकड़कर जीवन यापन करते रहे। यह स्थिति इसे दिखाती है कि एजेंडा-निर्धारण के बावजूद कुछ ताक़तें समाज के भीतर बना-बनाया अस्तित्व बनाये रखती हैं।
दो-तीन प्रमुख विषय
पवित्र ग्रंथ से संबंधित कुछ संदर्भ
1) यिर्मयाह/यशायाह जैसे पुराने निर्भूर संघर्षों के संदर्भ याद दिलाते हैं कि सीमा-निर्धारण के बाद भी कुछ समूह अपने दायरे में रहते थे।
2) नीतिवचन में वागधर्म के भीतर व्यवहारिक दास-चिह्न भी मिलते हैं जो सामाजिक-आर्थिक ढांचे को समझाते हैं।
3) यहोशू के कार्यकाल के दौरान स्थिर शासन व्यवस्था और जनता के भीतर विविध जीवन-शैलियों के साथ संतुलन स्थापित करने का यह एक छोटा-सा उदाहरण है।
व्यावहारिक विचार
हम आज भी देख सकते हैं कि अक्सर परिवर्तन के बावजूद पुराने बचे निवास, सामाजिक संरचना और शासकीय निर्णयों के साथ किस प्रकार का संतुलन बनता है। व्यक्तिगत और समुदायिक आचरण में यह सीख मिलती है कि अन्यायपूर्ण निष्कासन के बजाय आवश्यक सुरक्षा, मानवीय करुणा और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाये रखना चाहिए, ताकि हर समूह अपनी पहचान बनाए रख सके, जबकि समुदाय एक साथ विकास कर सके।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 16:10 बताता है कि क्षेत्रीय अधिकार के बावजूद कनानी लोग एप्रैम के भीतर बने रहे। यह हमें यह सिखाता है कि विजय-यात्रा और सामाजिक-आर्थिक जीवन एकदम सरल नहीं होते; विविध जातीय और सामाजिक समूहों के साथ सह-अस्तित्व और न्यायपूर्ण व्यवस्था की आवश्यकता बनी रहती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप में)
– नीचे के संदर्भ दर्शाते हैं कि उत्तराधिकारी राष्ट्रों के भीतर बाहरी समूहों के साथ कैसे व्यवहार किया गया: क्षेत्रों की सीमाओं, दास-प्रथा, और सामाजिक समन्वय के दायरे।
– समान विषय के बारे में अन्य भागों में, जैसे कि क्षेत्रीय वितरण और लोक-जीवन के विविध आयाम, पुराने नियमों की स्थिरता बनाये रखने के प्रयास स्पष्ट होते हैं।
नोट: इस पंक्ति के लिए समान विचारों पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनों से संक्षिप्त उद्धरण आवश्यक हो तो वे अनुमति-योग्य स्रोतों के भीतर ही प्रस्तुत होंगे। फिलहाल मौजूदा पाठ में उनका पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है, पर उनके सामान्य विचार क्षेत्र की प्रेरणा हमें इन कथनों की व्यापक दिशा समझाते हैं।