Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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अर्थ का स्पष्ट सार
2 इतिहास 28:2 का अर्थ यह है कि राजा यहोराम ने ईश्रायली राजाओं की चाल चलकर बेएत के देवताओं की मूर्तियाँ बनवाईं और उनकी पूजा आरंभ की, जिससे परमेश्वर के प्रति विपक्ष और अविश्वास बढ़ा। यह पथ भ्रष्ट होना दिखाता है कि राजा ने प्रभु द्वारा दिए गए निर्देशों और धर्मी नेतृत्व को छोड़कर लोक-लिप्सा और अत्युक्ति को अपनाया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटनाक्रम उस काल का है जब यह्रायली राज्य अशांत और उथल-पुथल से गुजर रहा था। इस्राएल के राजा अपनी साम्राज्यवादी योजनाओं में मग्न थे और आराधना के वैकल्पिक तरीकों की तलाश में थे। मूर्तिपूजा का यह व्यवहार स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि परमेश्वर के विधान के विरुद्ध चलना, सामाजिक-धर्मिक कलुष और नैतिक ढलान को उकसाता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीम-आधारित संक्षेप
अनुकरणीय संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
यदि आप आस्था को राष्ट्र-राजनीति या लोक-फायदे से मिलाकर नहीं समझते, तो यह पंक्ति एक स्पष्ट चेतावनी है कि परमेश्वर के साथ की गई प्रतिज्ञाओं के अनुरूप चलना ही आध्यात्मिक सुरक्षा है। अपने जीवन में ऐसी किसी भी प्रवृत्ति से बचें जो ईश्वर की आज्ञाओं के विरुद्ध हो।
इस पाठ के स्पष्ट व्याख्यान के लिए प्रसिद्ध प्रकाशक मनोद्देश्यों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उद्धरण मिलते हैं; उल्लेखनुसार उनके संकलनों में निम्न उद्धृत विचार उपलब्ध रहते हैं: - Henry: “...यह पापी राजा मूर्तिपूजा के मार्ग पर चला और यह अपने देश के लिये विनाशकारी ठहर गया।” - Barnes: “राजाओं की इन क्रियाओं में आस्था और धर्म के बीच टकराव स्पष्ट है।” - Clarke: “यह परमेश्वर के विरुद्ध एक राष्ट्र की गहरी अस्थिरता का कारण बना।”