Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 28:4 — ऊँचे स्थानों पर, और पहाड़ियों पर, और सब हरे वृक्षों के तले वह बलि चढ़ाया और धूप जलाया करता था
यह पाठ इतिहासकारी क्रम में असीर-युद्ध के समय के उत्तराधिकारी राजा अहाज़ के व्यवहार को दर्ज करता है। यहूतिहास बताता है कि वह יהודה के नगरों में ऊँचे स्थानों पर और जंगलों के भीतर बलिदान देता रहा, अनधार्मिक रीति-रिवाजों को प्रोत्साहित करता रहा। यह दृश्य यह दर्शाता है कि जन-जीवन में धार्मिक आलोड़न और भाइयों के बीच के विश्वास-संघर्ष कैसे उभरते हैं, जब राज सत्ता और धार्मिक praksis एक दूसरे से दबाव डालते हैं।
ईश्वर और विश्वास की दृष्टि में पाठ का अर्थ
इस आयाम में God के प्रति अवमानना और साक्ष्य के अभाव को उजागर किया गया है। परमेश्वर अपने नियमों के अनुसार केवल एक ही स्थान पर पूजा स्वीकार करता है, और मूर्तिपूजा के अंधेरे में लोगों की श्रद्धा अक्सर बँध जाती है। यहाँ यह स्पष्ट है कि राजा की नीति और राजसी दबावों के कारण प्रजा गलत धार्मिक परम्पराओं में डल जाती है। यह भी दिखाता है कि लोगों के बीच सत्ता और धार्मिकता के संगम से कैसे मोह-अवसर और भय की नPivot मिसालें बनती हैं, जो विश्वास को अस्थिर कर देती हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों की व्याख्या
संबंधित पवित्र ग्रंथ
कुरान/ग़ैर-स्त्रोत नहीं; यहाँ परख जरूरी है कि पुराने नियम में एक ही परमेश्वर के worship की जगह पर, लोक-धार्मिक prac। यह पाठ अन्य संदर्शों के साथ संरेखित है जो बतलाते हैं कि पश्चात्ताप और दंड कैसे पूजा-व्यवस्था के उल्लंघन पर आते हैं (उदा. इतिहास-ulkan). यशायाह 1:13‑14 में भी ईश्वर कहता है कि न तो मूर्तिपूजा और न ही बहुविध-उत्सव तुम्हारे लिए संतोषजनक हैं, बल्कि उचित न्याय और दया तुम्हारे पास है; 2 इतिहास के अन्य अंश भी दिखाते हैं कि राजा के भ्रष्टाचार से परमेश्वर कितनी देर तक चुप नहीं रहता।
आज के जीवन में उपयोगी आवेदन
यह पाठ हमें याद दिलाता है कि हमें अपने श्रद्धा-आचरण में एकता, एकेश्वर-परायणता और ईश्वर के निर्देशों के अनुरूपता बनाए रखनी चाहिए। सत्ता, परंपरा, या सांस्कृतिक दबाव के कारण यदि हम परमेश्वर की वास्तविक इच्छा से विचलित होते हैं, तो नये-पुराने ढाँचों के बजाय सत्य-प्रकाश में लौटना आवश्यक है। परिवार और समुदाय में ईमानदारी से यह देखना चाहिए कि हम पूजा-क्रियाओं और धार्मिक संस्थाओं को केवल नियमों से नहीं, बल्कि हृदय की निष्ठा और न्यायपूर्ण जीवन से संचालित करते हैं।
कथनबद्ध विचारधारा के उत्तराधिकारियों से संदर्भ
मैथ्यू हेनरी के अनुसार, परमेश्वर के वचन के प्रति अवहेलना से राजा और संत-समुदाय दोनों प्रभावित होते हैं; धर्म की संस्थाओं में आध्यात्मिक शक्ति की कमी और कानून के उल्लंघन से सामाजिक आस्थाओं पर असर पड़ता है। एल्बर्ट बार्न्स के विचार में यह संकेत मिलता है कि बाहरी धार्मिकता से अधिक आंतरिक भर्त्सना आवश्यक है—दिल से पूजा और हृदय परिवर्तन। एडम क्लार्क ने इससे जुड़ा निष्कर्ष दिया है कि बुराई से बचने के लिए पुनर्स्थापना और सुधार की पुकार उठती है। इन तीनों कविताओं/चित्रों के अनुसार, योग्य आचरण या तो समुदाय के लिए आशीर्वाद बनते हैं या दंड के कारण परित्याग के संकेत बन जाते हैं।
नोट: यदि उद्धृत किया गया हो, तो नीचे के छोटे कथन केवल उनके प्रकाशित शब्दों के संकेतन के लिए शामिल हैं: “शुद्ध worship की मांग है—दिल से किया गया समर्पण।” (मैथ्यू हेनरी से संक्षिप्त विचार)