2 इतिहास 28:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस समय राजा आहाज ने अश्शूर के राजाओं के पास दूत भेजकर सहायता माँगी।

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2 इतिहास 28:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का कथन

उस समय राजा आहाज ने अश्शूर के राजाओं के पास दूत भेजकर सहायता माँगी।

परिप्रेक्ष्य की संदर्भ-भूमि

2 इतिहास 28 अध्याय में आहाज़राज की कड़ी परीक्षा और उसकी विवेकहीन नीतियाँ सामने आती हैं। आस्सा की धड़पड़ से Judah (यहूदा) को असुरक्षित बनाते समय आहाज़ ने शक्तिशाली पड़ोसी के पास सुरक्षा माँगी—अश्शूर के राजाओं से। यह समय एक राजसत्ता के भीतर विश्वासघात, भय और जलप्राय युद्ध की स्थितियों का मिश्रण दिखाता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • आहाज़ की नीति: अपने मजबूत पड़ोसियों के भरोसे पर सुरक्षा ढूंढना—यह दिखाता है कि उसने परमेश्वर पर भरोसा नहीं किया, बल्कि राजनीति और शक्ति-तरीकों पर निर्भर रहने की कोशिश की।
  • आंतरिक संकट: यहूदा के धर्मी नेतृत्व के स्थान पर भय और असुरक्षा का वातावरण बन रहा था, जो राजा के निर्णयों में स्पष्ट झलकता है।
  • आशीर्वाद बनाम सावधानी: समय-समय पर सावधानी आवश्यक है, परन्तु ईश्वर के निर्देश के बिना रक्षा मार्ग चुनना, परमेश्वर के प्रस्तावों से दूरी बनाता है।

मुख्य निष्कर्ष (संक्षिप्त थीम सूची)

अन्य आधुनिक-देखे गए उद्धरण (Cross-references) और संबंध

यहोवा पर भरोसा बनाम मनुष्य के उपाय—यही विषय 2 इतिहास के अन्य अंशों में भी उभरता है:

  • 2 इतिहास 32:7-8 — इंतिज़ार और परमेश्वर पर दृढ़ विश्वास रखने की महत्ता।
  • नीतिवचन 21:31 — घोड़े के प्रदर्शन पर नहीं, प्रभु के मार्ग पर भरोसा करना।
  • यहोशू 1:9 — साहस और नiddhata को परमेश्वर की प्रेरणा से प्राप्त करना।

ये संदर्भ बताते हैं कि मानव-उपायों के साथ भी परमेश्वर की योजना सर्वोपरि रहती है और भय के बावजूद विश्वास की राह ही सच्ची सुरक्षा देती है।

पुनरावलोकनात्मक दर्शन

आहाज़ की दशा एक चेतावनी है कि परमेश्वर के साथ संबंध में नहीं रहने पर सत्ता-लिप्सा हमें गलत रास्तों की ओर ले जा सकती है। परमेश्वर पर स्थिर विश्वास बनाकर चलना, संकट के समय भी आकाशीय सुरक्षा देता है।

व्यावहारिक सीख

उद्धृत टिप्पणीकारों के मत से संक्षेप

हार्नी, Barnes, Clarke आदि के विश्लेषण से यह निकट आता है कि आहाज़ की नीति एक सामान्य मनुष्य-धर्मशास्त्र की त्रुटि है—यानी अस्थिर सुरक्षा हेतु परमेश्वर के आयोग से विमुख होना। यदि किसी पाठक को स्पष्ट उद्धरण चाहिए, तो यह उल्लेखित किया जा सकता है कि Matthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke के टिप्पणियों में इस प्रकार की नीति पर सामान्य आलोचनात्मक दृष्टि मिलती है कि भरोसा केवल earthly kingdoms पर डालना विफलताओं को जन्म देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 28:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब अराम के राजा रसीन, और रमल्याह के पुत्र इस्राएल के राजा पेकह ने लड़ने के लिये यरूशलेम पर चढ़ाई की, और उन्होंने आहाज को घेर लिया, परन्तु युद्ध करके उनसे कुछ बन न पड़ा।

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यहोवा तुझ पर, तेरी प्रजा पर और तेरे पिता के घराने पर ऐसे दिनों को ले आएगा कि जब से एप्रैम यहूदा से अलग हो गया, तब से वैसे दिन कभी नहीं आए - अर्थात् अश्शूर के राजा के दिन।”

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यहूदा का राजा आहाज जो योताम का पुत्र और उज्जियाह का पोता था, उसके दिनों में आराम के राजा रसीन और इस्राएल के राजा रमल्याह के पुत्र पेकह ने यरूशलेम से लड़ने के लिये चढ़ाई की, परन्तु युद्ध करके उनसे कुछ न बन पड़ा।

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