2 इतिहास 28:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब अश्शूर का राजा तिग्लत्पिलेसेर उसके विरुद्ध आया, और उसको कष्ट दिया; दृढ़ नहीं किया।

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2 इतिहास 28:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास 28:20 – immediate setting

पढ़ने पर देखा जाए कि यह पाठ राजा अहाज़ के समय की घटनाओं का भाग है। अश्शूर का राजा तिग्लत्पिलेसेर के आक्रामक अभियान के बीच यह वाक्य आता है, जहाँ वह राजा अक़्त के पुत्र—याईशील का भाग्य, बड़प्पन और साम्राज्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा था। यह संदर्भ उस भारी संकट की ओर इशारा करता है जिसमें यहूदियों पर अश्शूर का दबाव बढ़ रहा था, और राजा तिग्लत्पिलेसेर के बावजूद भी यह कठिनाई दिखाती है कि मानव-योजना कितनी तेजी से नष्ट हो सकती है जब परमेश्वर की रक्षा नहीं मिलती।

ईश्वर या विश्वास के बारे में टेक्स्ट से जो स्पष्ट होता है

यह पाठ यह दर्शाता है कि मानव शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो, ईश्वर की सहायता के बिना टिक नहीं सकती। तिग्लत्पिलेसेर शक्तिशाली योद्धा है, पर उन्हें “उसके विरुद्ध आया, और उसको कष्ट दिया; दृढ़ नहीं किया” कहा गया है—यानी यह आक्रमण उनके दृढ़ विश्वास के कारण नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रमाण से प्रेरित नहीं था। इस वाक्य के भीतर दया और न्याय की वेधपूर्ण चेतावनी है कि सत्ता चाहे कितनी भी विशाल क्यों न हो, ईश्वर के साथ सम्बद्ध न होने पर उसे स्थायी सुरक्षा नहीं मिलती।

महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता

  • – वहाँ संघर्ष और दबाव का विवरण है; यह संकेत है कि शत्रु की ताकत प्रयोग में है, परन्तु असली निर्णायकता परमेश्वर ही के हाथ में है।
  • – शारीरिक शक्ति या साम्राज्य की स्थायित्व में कमी; भरोसा और सुरक्षा का स्रोत टूट सकता है जब ईश्वर के सुझाव और मार्गदर्शन न हो।

संबंधित बाइबिल पाठ

उद्धरण के रूप में बड़े पाठों से कुछ विचार मिलते हैं:

  • यहोआ के द्वारा समर्पण और विश्वास पर निर्भरता का संदेश अन्य इतिहासग्रंथों में बार-बार उभरता है—जहाँ मजबूत सेनाओं के बावजूद परमेश्वर का संरक्षण ही वास्तविक सुरक्षा देता है।
  • यमन-परिस्थितियों में परमेश्वर की योजना के विरुद्ध चलने पर अत्याचार बढ़ सकता है, परन्तु वह न्याय और चंद कार्रवाईयों के अनुसार उत्तर देता है।

कृपया ध्यान दें: यहाँ पूर्ण श्रेणी के उद्धरण नहीं दिए गए, क्योंकि पाठ के अनुरूप केवल संदर्भ और अर्थगत संकेत प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

आज का अनुप्रयोग

हमारे समय में भी जब जीवन में बड़े संकट आते हैं—नौकरी, स्वास्थ्य, या व्यक्तिगत असफलताएं—तो यह पाठ स्मरण कराता है कि बाहरी ताकत कितनी भी मजबूत क्यों न हो, परमेश्वर की अनुग्रह और सहायता के बिना टिक पाना कठिन है। हम अधिकार-शक्ति की बजाय विश्वास और प्रार्थना के साथ समाधानों की तलाश करें। कठिन समय में भी ईश्वर की योजनाओं पर भरोसा रखना चाहिए, न कि केवल मानव-योजना पर।

संदर्भित टिप्पणी-आघात

मैथ्यू हेन्करी, अर्बन बॉर्न्स और एडम क्लार्क की सार्वजनिक-डायरी-शैली Commentary से मिलते-जुलते सूत्र नीचे संदर्शित हैं:

— "क्योंकि विश्वासी व्यक्ति परमेश्वर के संरक्षण में रहता है, और निर्भरता जहाँ ज्यादा होगी, वहां से ईश्वरीय सहायता स्पष्ट होगी।" (उद्धरण सार केवल सार-सार तत्व के रूप में समाहित है।)

संयोजनात्मक समरी: इस पाठ से अन्य पुराने टिप्पणीकारों के संकेत मिलते हैं कि शासन-शक्ति भली-भांति दिखती है, पर असली सुरक्षा परमेश्वर की है—जो प्रभु की योजना के अनुसार काम करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 28:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस्राएल के राजा पेकह के दिनों में अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर ने आकर इय्योन, आबेल्वेत्माका, यानोह, केदेश और हासोर नामक नगरों को और गिलाद और गलील, वरन् नप्ताली के पूरे देश को भी ले लिया, और उनके लोगों को बन्दी बनाकर अश्शूर को ले गया।

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इसलिए इस्राएल के परमेश्‍वर ने अश्शूर के राजा पूल और अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर का मन उभारा, और इन्होंने उन्हें अर्थात् रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्र के लोगों को बन्धुआ करके हलह, हाबोर* और हारा और गोजान नदी के पास पहुँचा दिया; और वे आज के दिन तक वहीं रहते हैं।

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तुमने कहा, “नहीं, हम तो घोड़ों पर चढ़कर भागेंगे,” इसलिए तुम भागोगे; और यह भी कहा, “हम तेज सवारी पर चलेंगे,” इसलिए तुम्हारा पीछा करनेवाले उससे भी तेज होंगे।

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