Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 29:1 2 इतिहास 29:2 2 इतिहास 29:3 2 इतिहास 29:4 2 इतिहास 29:5 2 इतिहास 29:6 2 इतिहास 29:7 2 इतिहास 29:8 2 इतिहास 29:9 2 इतिहास 29:10 2 इतिहास 29:11 2 इतिहास 29:12 2 इतिहास 29:13 2 इतिहास 29:14 2 इतिहास 29:15 2 इतिहास 29:16 2 इतिहास 29:17 2 इतिहास 29:18 2 इतिहास 29:19 2 इतिहास 29:20 2 इतिहास 29:21 2 इतिहास 29:22 2 इतिहास 29:23 2 इतिहास 29:24 2 इतिहास 29:25 2 इतिहास 29:26 2 इतिहास 29:27 2 इतिहास 29:28 2 इतिहास 29:29 2 इतिहास 29:30 2 इतिहास 29:31 2 इतिहास 29:32 2 इतिहास 29:33 2 इतिहास 29:34 2 इतिहास 29:35 2 इतिहास 29:36



सीधे अर्थ की पुनरावलोकन
2 इतिहास 29:28 का अर्थ है कि परमेश्वर के मंदिर में होमबलि दिए जाने के समय पूरा मंडली-समूह भक्ति-गानों में मग्न रहा, दण्डवत् किया और तुरहीयां बजाईं। यह क्रम तब तक चला जब तक होमबलि पूरी नहीं हो गई।
परिप्रेक्ष्यात्मक पृष्ठभूमि
यहोशी राजा के काल में यह घटना मंदिर की पवित्र पुनर्स्थापना का दृश्य है। व्योम के साथ सीधा संबंध बनाते हुए, लोग ने प्रभु की आराधना में एकजुट होकर गीत-गान कर रहे थे और उत्सव का स्वर होमबलि के चढ़ने तक गूंजता रहा। यह समय एक ताज़े धार्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक है, जब परमेश्वर के प्रतिष्ठान की विधि पुनः स्थापित हो रही हो।
व्याख्यात्मक अवलोकन
2-3 प्रभावी क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप निष्कर्ष)
- स्मरण दें: 2 इतिहास 7:3 में लोग परमेश्वर को आश्चर्यजनक रूप से स्वीकार करते हैं और मंदिर में दण्डवत करते हैं; यह घटना मंदिर-समारोह की स्वीकार्यता और प्रतिष्ठा को दिखाती है।
- पासुकालीन ध्वनि: अन्य स्थलाकृतियों में आराधना-सम्पन्नता और गीत-गान की एकता का बारम्बार उल्लेख है, जो समुदाय के एकजुट बंधन को दर्शाती है।
- आराधना की क्रमबद्धता: परमेश्वर की पुष्टि के समय पूरे समाज का सामूहिक प्रदर्शन आवश्यक है, जो 29 अध्याय में स्पष्ट है।
संक्षिप्त थीम-सूची
व्यावहारिक निष्कर्ष
परमेश्वर के साथ निकटता बनाने के लिए समुदाय का एक साथ आराधना-मंत्र और पूर्ण समर्पण आवश्यक है। जब समर्पण पूरा हो जाए, तब ही आराधना की शुद्धता और Joy पूरी तरह प्रकट होती है। व्यक्तिगत पथ पर भी का-का समर्पण बनाये रखें, ताकि ईश्वर की महिमा उजागर हो सके।
अनुकरणीय टिप्पणी
मत्ती हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक डॉटकमेन्टरी से संक्षेपात विचार मिलते हैं कि आराधना का मकसद मात्र रस्म-दर-रस्म नहीं, बल्कि दिल की पूरी केन्द्रितता और परमेश्वर के प्रति समर्पण है। उनके अनुसार यह दृश्य समुदाय की एकता और परमेश्वर की महिमा के लिए उत्साहपूर्ण सामूहिक आराधना का उत्तम उदाहरण है।
नज़दीकी क्रॉस-रेफरेंस के साथ छोटी व्याख्या
– 2 इतिहास 7:3: मंदिर के महिमा-गीत और दण्डवत् के साथ परमेश्वर की उपस्थिति का आह्वान—समुदाय की एकरूपता का संकेत।
– यशायाह 6:3: पवित्रता के गीत और आकाशीय आराधना की बुलाहट—आराधना की उच्चता और ईश्वर-समक्ष के स्तर का दर्शक।
– निर्गमन 19:16-17: समुदाय का एक साथ सम्मिलन और परमेश्वर के साथ एक पवित्र मिलन—धार्मिक समारोह का सार।