2 इतिहास 29:36 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब हिजकिय्याह और सारी प्रजा के लोग उस काम के कारण आनन्दित हुए, जो यहोवा ने अपनी प्रजा के लिये तैयार किया था; क्योंकि वह काम एकाएक हो गया था।

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2 इतिहास 29:36 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्यों यह वाक्य महत्त्वपूर्ण है

2 इतिहास—यशायाह नहीं, बल्कि इतिहास की पुस्तकों में हमें राजा हिजकिय्याह के काल की स्पष्ट तस्वीर मिलती है। 29:36 बताता है कि राजा और प्रजा एक साथ आनन्दित हुए, क्योंकि यहोवा ने उनके लिये एक आश्वासनानुरूप कार्य पूर्ण कर दिया था। यह वचन वह संदेश देता है कि परमेश्वर अपने लोक के साथ चमत्कारिक ढंग से भागीदारी करता है और उसके काम पूरे होते हैं जब लोग श्रद्धा और परिश्रम से प्रतिक्रिया करते हैं। सरल शब्दों में, यह एक ऐसी समाप्ति है जिसमें भय नहीं, केवल राहत और प्रशंसा है कि परमेश्वर ने सब कुछ सुधारा और गति दी।

पौराणिक परिप्रेक्ष्य

पुस्तक इतिहास स्वयं राजा यूहोलाम"ह्न—मित संबंधों के उलटफेर के बाद, हिजकिय्याह ने मंदिर की मरम्मत और पुनःस्थापना के लिये योजनाएँ बनाईं। देवदत्त निर्देशों के अनुसार, पुजारियों और लाउडों के साथ मिलकर उन्होंने यह कार्य किया। जब सब कुछ पूरा हुआ, तब लोगों ने एकजुट होकर 하나님 की महिमा के गीत गाये। यह घटनाक्रम प्रकट करता है कि भक्ति-उन्नयन समुदाय की एकता को कैसे बढ़ाता है और कैसे उद्धार की राह खोलता है।

मुख्य संदेश

  • ईश्वर का समययुक्त पूर्ण कार्य होना: काम एकाएक हो गया—यानी परमेश्वर ने अपनी कृपा से तेजी से परिणाम दिए।
  • समुदाय की खुशी और प्रतिध्वनि: लोक-राग और आशीर्वचन का संगम—प्रजा की आनन्दमयी प्रतिक्रिया, यह संकेत है कि प्रभावी धार्मिक परिवर्तन सामाजिक संतुष्टि बन जाते हैं।
  • निष्ठा के साथ सहयोग: हिजकिय्याह की योजनाओं और पुजारियों की भागीदारी मिलकर काम करने से सफलता मिलती है।

पवित्रशास्त्रीय थीमों के साथ सम्बन्ध

— वर्तमान संदर्भ में “ईश्वर की योजना का पूर्ण होना” एक सामान्य पंक्ति है—यही निरंतर विषय है कि परमेश्वर जो भी कहता है, वही होता है।

— भक्ति-क्रिया और सामुदायिक सहभागिता: मंदिर का कर्मकांड और अध्यवसाय एकता बनाते हैं और ऐसी एकता से परमेश्वर की कृपा दिखाई देती है।

— तृप्तिपूर्ण प्रतिफल: श्रद्धा, समर्पण, और शांति-भरे परिणाम—यह हमें आगे की आशाओं की ओर ले जाते हैं।

- 2 इतिहास 29:20-30: हिजकिय्याह के मंदिर-उद्धार के दिन और प्रजा की सामूहिक आराधना—यह दृश्य इसVerse से मेल खाता है, जहाँ भगवान के कार्यों के बाद खुशी और पूजा होती है।

- 2 इतिहास 30:20-27: पास्का-उत्सव और समर्पित पूजा—समुदाय की भक्ति से परमेश्वर के आशीर्वाद खुलते हैं, यह भी एक सामुदायिक पुनर्गठन का प्रमाण है।

- भजन 100:1-5: प्रमुख शब्द “खुशी” और “तथ्यात्मक भगवान की करुणा”—यह वाक्यप्रकाशन इस प्रसंग के भीतर मंदिर-उद्धार के खुशियों के साथ सुसंगत है।

आध्यात्मिक अनुप्रेरणा

यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के कार्यों में हमारे विश्वास और सहयोग का भागीदारी कितना बड़ा है। जब हम उसके निर्देशों के अनुसार कदम बढ़ाते हैं और समुदाय के साथ मिलकर काम करते हैं, तो अवसरिक चमत्कार होते हैं—स्वास्थ्य, नई आत्म-समझ, और सामुदायिक एकता के रूप में। यह भी संकेत देता है कि प्रयोगशाला-सीखे हुए पाठ और प्रार्थना के साथ किया गया सामूहिक प्रयास, अचानक परिणाम दे सकता है।

संक्षिप्त देवotional विचार

ईश्वर के काम में देरी नहीं, बल्कि समय पर पूर्णता हमारे विश्वास की परीक्षा है। अगर आप अपने चर्च या परिवार में किसी प्रकल्प में कठिनाई देखते हैं, तो यह वचन स्मरण कराएं: परमेश्वर ने वह किया जो उसने कहा—आज भी वह कर सकता है। प्रार्थना में एकता बनाकर, उद्देश्य के अनुरूप कर्म करें, फिर आनन्द स्वतः उभर कर आएगा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 29:36 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और हे मेरे परमेश्‍वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जाँचता है और सिधाई से प्रसन्‍न रहता है; मैंने तो यह सब कुछ मन की सिधाई और अपनी इच्छा से दिया है; और अब मैंने आनन्द से देखा है, कि तेरी प्रजा के लोग जो यहाँ उपस्थित हैं, वह अपनी इच्छा से तेरे लिये भेंट देते हैं।

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तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्‍न होकर खरे मन और अपनी-अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ।

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यहूदा में भी परमेश्‍वर की ऐसी शक्ति हुई, कि वे एक मन होकर, जो आज्ञा राजा और हाकिमों ने यहोवा के वचन के अनुसार दी थी, उसे मानने को तैयार हुए।

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