2 इतिहास 29:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब हिजकिय्याह कहने लगा, “अब तुमने यहोवा के निमित्त अपना अर्पण किया है*; इसलिए समीप आकर यहोवा के भवन में मेलबलि और धन्यवाद-बलि पहुँचाओ।” तब मण्डली के लोगों ने मेलबलि और धन्यवाद-बलि पहुँचा दिए, और जितने अपनी इच्छा से देना चाहते थे उन्होंने भी होमबलि पहुँचाए। (लैव्य. 7:12)

पिछला पद
« 2 इतिहास 29:30
अगला पद
2 इतिहास 29:32 »

2 इतिहास 29:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास 29:31—कथन-स्नippet का संदर्भ और अर्थ

संघी प्रकरण में हिजकिय्याह के राज्य के समय यहूदा के मंदिर की पूर्ति-स्थापना का एक निर्णायक क्षण दिखाया गया है। राजा ने यहोवा के निमित्त मंदिर में मेलबलि और धन्यवाद-बलि की व्यवस्था की पुष्टि की और लोगों ने अपनी इच्छा से भी अतिरिक्त बलि दी। यह पाठ उस समय की धार्मिक पुनर्स्थापना का प्रतीक है जब प्रभु के सामने लौटना और उसकी इच्छा के अनुसार बलि-समर्पण बुधवार था।

ईश्वर और विश्वास के संदर्भ में पाठ का अर्थ

यह पद यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर की उपासना में न केवल औपचारिक क्रियाविधि है, बल्कि दिल से समर्पण भी आवश्यक है। हिजकिय्याह के नेतृत्व में यहूदियों ने यहोवा के भवन में मेलबलि और धन्यवाद-बलि पहुँचाकर उसकी पवित्रता और उसकी कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह दर्शाता है कि धर्म सुधार का परिणाम अनुभव-आधारित विश्वास और सामुदायिक भागीदारी के रूप में सामने आता है; जब लोग परमेश्वर के नाम पर समर्पण करते हैं तो समाज का हर सदस्य एक साथ चल पड़ता है।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की व्याख्या

  • भवन में मेलबलि और धन्यवाद-बलि— मंदिर में आयोजित बलि यह दर्शाती है कि उपस्थिति और प्रार्थना के साथ धन्यवाद भी परमेश्वर के सामने प्रस्तुत किया गया है। यह एक फार्म-प्रैक्टिस नहीं बल्कि मन का आभार और विश्वास का सार्वजनिक स्वीकृत होना है।
  • अपने अर्पण को समीप आकर देना— यह आंतरिक समर्पण को बाह्य-अभिनय के साथ मिलाकर दिखाता है; समुदाय ने मिलकर एक साथ बलि देने की इच्छा प्रकट की और इससे धार्मिक पुनर्निर्माण का संकेत मिलता है।
  • लैव्य. 7:12 का संदर्भ— यह संकेत देता है कि धन्यवाद-बलि के नियम और तौर-तरीके प्राचीन परमादेश में स्पष्ट थे, और यह घटना इन नियमों के अनुरूप एक समुदायिक संगठित क्रिया के रूप में दिखाई देती है।

अनुसार पाठ से सम्बद्ध अन्य शास्त्रीय टिप्पणी

Matthew Henry की परंपरागत व्याख्या में यह पुनर्स्थापना का निर्णायक क्षण माना गया है जहाँ राजा और प्रजा एक साथ अपने विश्वास की गवाही देते हैं। Albert Barnes लिखा है कि यह प्रसंग समुदायिक एकता और पूजा में सामंजस्य का उत्कृष्ट उदाहरण है—जहां नेतृत्व और संगठित पहल की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। Adam Clarke ने भी संकेत किया है कि यह सामान्य प्रार्थना के साथ-साथ उत्सव और धन्यवाद की व्यापक अभिव्यक्ति का संकेत है, जो लोगों के हृदयों को परमेश्वर के प्रति समर्पित करता है। (संदर्भ: Henry के उद्धृत विचार, Barnes के टिप्पणी-खंड और Clarke के व्याख्या के समेकन में सामान्य निष्कर्ष)।

अन्य आयामों के लिए नज़दीकी विचार: यह घटना पूनःस्थापना के समय दैनंदिन पूजा-क्रिया का पुनःलागत दिखाती है—क्योंकि यहूदा ने पुरानी पूजा-पद्धति को नहीं छोड़ा, बल्कि उसे पवित्र तरीके से पुनर्जीवित किया।

संबद्ध cross-references (संकेतित संदर्भ, बिना पूर्ण व verses का टेक्स्ट)

  • लैव्य. 7:12 — धन्यवाद-बलि के नियम का स्पष्ट उल्लेख; पाठ-व्याख्या से जुड़ा प्रत्यक्ष नियम-संदर्भ।
  • 2 इतिहास 30:23-24 — पाप के बाद पुर्नस्थापन और सामुदायिक उत्सव का महत्त्व; समान भाव यह दर्शाता है कि उद्धार और पुनःस्थापना सामुदायिक भागीदारी से होती है।
  • 2 इतिहास 31:2 — राजा के आह्वान से राज्य-व्यवस्था और पूजा-कृत्यों का सामंजस्य; एक नेतृत्व-उदाहरण जो विश्वास को ठोस बनाता है।

इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट है कि धार्मिक पुनर्स्थापना में नेतृत्व, समुदाय-एकता और मान्यता का संतुलन आवश्यक है।

आज के लिए अनुप्रयोग

आज के पाठक के लिए यह संदेश है कि ईश्वर के सामने आना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जिसमें हम अपने हृदयों को भी समर्पित करते हैं। सामूहिक विश्वास का भाव, दैनंदिन आस्था की समर्पणशीलता और धन्यवाद की प्रार्थना हमारी व्यक्तिगत और समुदायिक वृद्धि को प्रेरित करती है। यदि हम अपनी सेवाओं, निष्ठा और सहयोग के साथ देह-आत्मा-समुदाय की सामंजस्य बढ़ाते हैं, तो परमेश्वर आशीष देता है और हमारा मिलन-समापन प्रार्थना का पल बन जाता है।

सार-सार: यह दृश्य यह दर्शाता है कि विचारशील नेतृत्व और सामुदायिक सहभागिता से पूजा की प्रथा मजबूत होती है, और यह एक जागरण-काल की ध्वनि बन जाती है जो विश्वास को आगे बढ़ाती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 29:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 इतिहास 13:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 इतिहास 13:9 (HINIRV) »
क्या तुमने यहोवा के याजकों को, अर्थात् हारून की सन्तान और लेवियों को निकालकर देश-देश के लोगों के समान याजक नियुक्त नहीं कर लिए? जो कोई एक बछड़ा और सात मेढ़े अपना संस्कार कराने को ले आता, वह उनका याजक हो जाता है जो ईश्वर नहीं है। (यिर्म. 2:11)

निर्गमन 35:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 35:22 (HINIRV) »
क्या स्त्री, क्या पुरुष, जितनों के मन में ऐसी इच्छा उत्‍पन्‍न हुई थी वे सब जुगनू, नथनी, मुंदरी, और कंगन आदि सोने के गहने ले आने लगे, इस भाँति जितने मनुष्य यहोवा के लिये सोने की भेंट के देनेवाले थे वे सब उनको ले आए।

निर्गमन 35:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 35:5 (HINIRV) »
तुम्हारे पास से यहोवा के लिये भेंट ली जाए, अर्थात् जितने अपनी इच्छा से देना चाहें वे यहोवा की भेंट करके ये वस्तुएँ ले आएँ; अर्थात् सोना, रुपा, पीतल;

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें