Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 7:1 2 इतिहास 7:2 2 इतिहास 7:3 2 इतिहास 7:4 2 इतिहास 7:5 2 इतिहास 7:6 2 इतिहास 7:7 2 इतिहास 7:8 2 इतिहास 7:9 2 इतिहास 7:10 2 इतिहास 7:11 2 इतिहास 7:12 2 इतिहास 7:13 2 इतिहास 7:14 2 इतिहास 7:15 2 इतिहास 7:16 2 इतिहास 7:17 2 इतिहास 7:18 2 इतिहास 7:19 2 इतिहास 7:20 2 इतिहास 7:21 2 इतिहास 7:22



मुख्य व्याख्या अंश
स्तुति और परमेश्वर के भवन के लिए अनुपम विशाल बलिदान से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के आशयपूर्ण भवन की प्रतिष्ठा सर्वस्व समर्पण से होती है। 2 इतिहास 7:5 में सुलैमन ने रonieाविद् इतनी बड़ी न्योछावरियाँ कीं कि लोग और राजा दोनों मिलकर यहोवा के मंदिर की महिमा का उद्घोष कर सके। यह परमेश्वर के अधिकार, योजना और समाज के योगदान का संयुक्त स्मारक है।
पाठ का साहित्यिक संदर्भ
यह वाकया राजाओं के इतिहास में महिमामण्डित इबादत-गाथाओं का एक हिस्सा है, जहाँ भवन-निर्माण पूजन के साथ है। इतिहास-की-पुष्टि में सुलैमन के शासनकाल की सुव्यवस्थित व्यवस्था और धर्म-कार्य के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता सामने आती है। इस दृश्य में बलिदान का आयतन दर्शक को मंदिर-स्थापत्य की महिमा के साथ समुदाय की भागीदारी का महत्व दिखाता है।
धार्मिक महत्व
बलिदान की मात्रा बड़ी होने से यह संकेत मिलता है कि प्रजा और राजा दोनों ही परमेश्वर की पवित्रता, अनुग्रह और मंदिर की महिमा के प्रति गहरी आस्था के साथ आहुति दे रहे हैं। यह इबादत-निर्माण के लिए एक सामूहिक समर्पण है, जो मंदिर की प्रतिष्ठा के साथ साथ परमेश्वर के दिल की प्रसन्नता को भी दर्शाता है।
अनुच्छेद: अन्य पवित्र बाइबल में संबद्ध विचार
- परमेश्वर के मंदिर के महिमायुक्त उद्घाटन में बड़े बलिदान की कथा का पवित्र स्थान कई बार दोहराया गया है; यह यहूदियों की धार्मिक पहचान के लिए एक स्मारक बन गया।
- राजा के नेतृत्व में समुदाय की सामूहिक भागीदारी से इबादत-कार्य का महत्व उभरता है; यह प्रेरणादायक उदाहरण नई पीढ़ी के लिए धार्मिक समाज-निर्माण की भूमिका बताता है।
वाक्य-संरचना और परिवर्तनशील विचार
2 इतिहास के इस भाग में, बलिदान का आयतन कहते हैं कि मंदिर की महिमा एकत्रित परिश्रम और दया-योग्यता से बनती है। यह आधुनिक पाठक के लिए भी यह पुष्ट करता है कि समुदाय के सहयोग से धार्मिक स्थल का निर्माण सामाजिक-आध्यात्मिक समृद्धि का स्रोत बन सकता है।
आंतरिक प्रश्न विचारणीय
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
- दूसरी जगह मंदिर-निर्माण और सामुदायिक योगदान के प्रमाण: यह क्रमभंग का स्वयं-प्रकाशन है कि एक समाज भगवान की पूजा में कैसे एकजुट रहता है।
- पवित्र तीर्थ-स्थल की महिमा: स्थायित्व और भक्ति के साथ मंदिर के निर्माण का संकेत मिलता है कि परमेश्वर के कथा-संयोजन में समुदाय की भागीदारी आवश्यक है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर के भवन की प्रतिष्ठा सिर्फ स्थापत्य नहीं, बल्कि समर्पित दास-समुदाय की एक संयुक्त प्रार्थना और बलिदान का परिणाम है। राजा सुलैमन और पूरा प्रजा-समूह मिलकर यहोवा के भवन को महिमा प्रदान करते हैं, जो धार्मिक जीवन के सामूहिकता और पवित्रता के आध्यात्मिक मूल्यों की वर्तमान व्याख्या है।
नोट: इस पंक्ति के लिए उपलब्ध प्राचीन पाठ-टिप्पणियाँ (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) से संक्षिप्त उद्धरण नीचे दिए गए हैं:
Matthew Henry: “The people with their king gave many sacrifices, and thus testified their reverence to the temple.”
Albert Barnes: “Great numbers of offerings denote a public joy in the house of God and the assurance of His blessing upon the enterprise.”
Adam Clarke: “The multiplied sacrifices signify that the whole nation engaged in the solemn building and worship of the Lord.”