Old Testament
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शब्दार्थ का प्रत्यक्ष अर्थ
2 इतिहास 7:3 में परमेश्वर के तेज के नीचे यरूशलेम के लोग अत्यंत दिव्य सम्मुखता से दण्डवत् हैं और यहोवा के भलेपन, उसकी करुणा के सदा रहने का घोषणा कर रहे हैं। आग गिरी, भवन पर यहोवा का तेज छाया; देशभर के लोग कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं कि परमेश्वर ने अपने निवासस्थान के साथ निश्चय ही साथ दिया है।
पृष्ठभूमि
समाप्ति-आगमन के बाद सुलैमान का भवन, भव्य मंदिर बन जाने के पश्चात् यह घटना घटित होती है। मंदिर में परमेश्वर की उपस्थिति स्पष्ट रूप से प्रकट होती है, और जन समुदाय वह देवत्व-आह्वान मानता है। दंडवत् करने की यह क्रिया यह दर्शाती है कि परमेश्वर की करुणा, उसकी कृपा और उसका राज्य-आधार विश्वस्त है।
व्याख्यात्मक विचार
छोटा-सा विषय-वाचन
अन्य प्रासंगिक आयत-निर्देशन
1 वहनाचार; 2 इतिहास 6:41-42 और 2 इतिहास 7:1-3 के संदर्भ से समझ आता है कि मंदिर-स्थिति के दौरान परमेश्वर की उपस्थिति कैसी रहती है और यहूदी समाज कैसे उसकी महिमा को मानता है।
नोट: इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के निवास के समय लोग उसकी महिमा को देखकर अपनी दशा को सुधरते हैं और दैवी दया पर भरोसा बनाए रखते हैं।
व्यावहारिक takeaway
जब हमारे जीवन के एक उच्च-तम स्थान पर 하나님 की उपस्थिति स्पष्ट होती है, तो हमें भी एकाग्र होकर अपना दिल और मुंह नीचे झुकाकर उसकी महिमा के लिए दण्डवत् करना चाहिए—क्योंकि उसकी करुणा सदा रहती है। एकता और कृतज्ञता के साथ जीवन बिताने में परमेश्वर की कृपा बढ़ती है।
चर्चित उद्धरण (public-domain commentators)
मैथ्यू हेनरी के अनुसार यह प्रसंग परमेश्वर के प्रभाव की पुष्टि है और भक्तों की दयालु निष्ठा का प्रमाण है।
Albert Barnes के अनुसार यह दृढ़ आस्था और कृतज्ञता की एक सार्वभौमिक मिसाल है कि परमेश्वर की कृपा कभी समाप्त नहीं होती।
Adam Clarke के अनुसार यह दृश्य कि परमेश्वर का तेज भवन के ऊपर स्थिर हो गया, यह कहता है कि परमेश्वर अपने निवास-स्थल पर अपनी शक्ति के साथ है और उसकी करुणा अनंत है।
उल्लेखित उद्धरणों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की विश्वसनीयता और सामर्थ्य परिभाषाओं के बिना भी हमारी आध्यात्मिक स्थिरता बनती है।