Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 7:1 2 इतिहास 7:2 2 इतिहास 7:3 2 इतिहास 7:4 2 इतिहास 7:5 2 इतिहास 7:6 2 इतिहास 7:7 2 इतिहास 7:8 2 इतिहास 7:9 2 इतिहास 7:10 2 इतिहास 7:11 2 इतिहास 7:12 2 इतिहास 7:13 2 इतिहास 7:14 2 इतिहास 7:15 2 इतिहास 7:16 2 इतिहास 7:17 2 इतिहास 7:18 2 इतिहास 7:19 2 इतिहास 7:20 2 इतिहास 7:21 2 इतिहास 7:22



2 इतिहास 7:14 – प्रवेश की पथ-निर्देशन
वर्ष 1 इतिहास के संदर्भ में यह पंक्ति परमेश्वर के घरदेवता के मंच पर दिए गए एक उद्धोषण के रूपांतरण के समान है। नौका-शास्त्र के बाद शालह और सोलोमन के आराधन-स्थल के ठहराव के बीच, परमेश्वर स्पष्ट करते हैं कि कोई भी राष्ट्रीय संकट पर आकर चूक नहीं सकता जब तक उसका पश्चात्ताप और प्रार्थना ध्वनि-प्रतीक बनती है। इस पाठ में परमेश्वर अपने लोगों से सीधे अपेक्षा रखते हैं—न केवल भक्ति का प्रदर्शन, बल्कि दीनता, प्रार्थना और पाप से मुक्ति की सत्य-चाल।
ईश्वर का संदेश और विश्वास का प्रकृति
यह वाक्य दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ सत्ता-उन्मुख सम्बन्ध बनाते हैं, परन्तु वे शुद्ध हृदय और सत्य के अनुरोध को सुनते हैं। यदि लोग दीन होकर祈Prarthना करें, दर्शन-खोजी बनें और अपनी बुरी चाल से मुड़ें, तब परमेश्वर आकाश से सुनकर क्षमा करेंगे और देश को पुनः स्थिर करेंगे। यह संदेश यह दर्शाता है कि श्रद्धा और नैतिक परिवर्तन परमेश्वर की कृपा के मार्ग हैं, न कि केवल औपचारिकता।
शब्दार्थ और दृश्य-रूप
अन्य प्रतिनिधि पाठ
इसी विषय से सम्बंधित कुछ क्रॉस-रेफरेंसेज़: राजाओं के समान अवसरों पर दीन-प्रार्थना और ईश्वर के प्रतिफल के बारे में, और दिव्य कृपा के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक परिशोधन की आवश्यकता। ये संदर्भ एक ही धागे को शृंखला की तरह जोड़ते हैं: विनय, प्रार्थना, और परिवर्तन।
प्रयोगगत अनुप्रयोग
आज के समय में यह पाठ सामूहिक और राष्ट्रीय दीनता के लिए एक प्रेरणा है—यदि समुदाय या राष्ट्र संकट में फँस जाए, तो पहले आंतरिक निरीक्षण, संयुक्त प्रार्थना और पाप से मुक्ति का संकल्प आवश्यक है। परमेश्वर के करीब लौटकर ही स्थायित्व मिल सकता है।
पन्ने के संकलन से एकीकृत दृष्टिकोण
हेडिंग के अनुसार यह पंक्ति यह स्पष्ट करती है कि
संक्षिप्त टिप्पणी
नैतिकता और आध्यात्मिकता की वह कसौटी जो परमेश्वर के सामने खरे उतरती है, वही हैं दीनता, प्रार्थना और परिवर्तन।
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से किसी सचित्र कथन का छोटा उद्धरण चाहते हों, तो उपलब्ध होने पर उद्धरण शाब्दिक रूप से संक्षेप में उल्लेखित किया जाएगा।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
नीति-पश्चात्ताप, दीनता और आश्वासन की धारणा को सीधे संबद्ध करने वाले अन्य बाइबल अंशों पर विचार करें (छोटे टीका-उद्धरण सहित):