Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 15:1 2 शमूएल 15:2 2 शमूएल 15:3 2 शमूएल 15:4 2 शमूएल 15:5 2 शमूएल 15:6 2 शमूएल 15:7 2 शमूएल 15:8 2 शमूएल 15:9 2 शमूएल 15:10 2 शमूएल 15:11 2 शमूएल 15:12 2 शमूएल 15:13 2 शमूएल 15:14 2 शमूएल 15:15 2 शमूएल 15:16 2 शमूएल 15:17 2 शमूएल 15:18 2 शमूएल 15:19 2 शमूएल 15:20 2 शमूएल 15:21 2 शमूएल 15:22 2 शमूएल 15:23 2 शमूएल 15:24 2 शमूएल 15:25 2 शमूएल 15:26 2 शमूएल 15:27 2 शमूएल 15:28 2 शमूएल 15:29 2 शमूएल 15:30 2 शमूएल 15:31 2 शमूएल 15:32 2 शमूएल 15:33 2 शमूएल 15:34 2 शमूएल 15:35 2 शमूएल 15:36 2 शमूएल 15:37



2 शमूएल 15:26 का मौजूदा संदर्भ और पाठ का आरम्भिक सेटिंग
इस पद्य में दाऊद परिवार में हुए विद्रोह और अपने पुत्र אבेशालेम के साथ हुए उथल-पुथल की कथा प्रकट होती है। दाऊद राजा के रूप में यह बताता है कि यदि सलाहकार और लोगों के सामने भी वह भय या क्रोध के कारण दूर खड़े हो जाए, तब भी वह परमप्रिय ईश्वर के साथ अपना संबंध बनाए रखना चाहता है; यानी ईश्वर के बिना सत्ता या मनुष्य की कृपा से नहीं, सिर्फ़ परमेश्वर के साथ हृदय की एकनिष्ठता पर निर्भर रहते हुए अपने ऊपर उसका स्वामित्व मानता है। यह दृश्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर के पक्ष में निष्ठा रखने वाला आदमी अस्थिर राजनीतिक परिस्थितियों में भी आस्था का स्थायित्व खोज सकता है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में टेक्स्ट से प्रमुख सीख
यह वचन एक खुला निमंत्रण है कि परमेश्वर से जुड़ाव, भले परिस्थिति कैसी भी हो, अटल होना चाहिए। दाऊद का उत्तरदायित्व है कि चाहे परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों, वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप चले, न कि अपने लाभ-हानि के अनुसार। इससे यह स्पष्ट होता है कि विश्वास केवल तब नहीं जब सब कुछ आसान हो, बल्कि कठिन समय में भी ईश्वर के प्रति वफ़ादारी बनाए रखना है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टीकरण
संबद्ध पाठ और उनका संक्षेप
— निर्माणात्मक संबंध: पवित्रता के साथ परमेश्वर के सामने निष्ठा बनाये रखना, खासकर सामाजिक-राजनीतिक दबाव में।
— प्रेरणा: यदि कोई विरोध करे, पर परमेश्वर के साथ संबंध अडिग रहे, तब भी वह संकल्पित रहता है कि परमेश्वर चाहे जैसा भी करे, वह उसी के अनुसार चले।
— संरक्षण: यह विश्वास एक आन्तरिक सुरक्षा देता है जो बाहरी दुश्चक्रों से ऊपर उठकर निर्देशित करता है।
2-3 क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेपित)
आज के लिए अनुप्रयोग
सूक्ष्म टिप्पणी (प्रस्तावित समेकित सार)
इस दृष्टी से यह पाठ हमें सिखाता है कि ईश्वर के प्रति अडिग निष्ठा ही वास्तविक सुरक्षा और नेतृत्व की कुंजी है। मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के पारंपरिक प्रवचनों के स्वर से यह संदेश मजबूत होता है: परमेश्वर के साथ सीधी निष्ठा राजनीति और मतभेद की आड़ में भी सर्वोपरि है।
उद्धरण—महत्वपूर्ण संकेत: यदि उपलब्ध हो, ऊपर के टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण पाठ में मिलेंगे; यहाँ पाठ के निजता के अनुसार, वे संकुल रूप में समाहित किए गए हैं।