Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 18:1 प्रेरितों के काम 18:2 प्रेरितों के काम 18:3 प्रेरितों के काम 18:4 प्रेरितों के काम 18:5 प्रेरितों के काम 18:6 प्रेरितों के काम 18:7 प्रेरितों के काम 18:8 प्रेरितों के काम 18:9 प्रेरितों के काम 18:10 प्रेरितों के काम 18:11 प्रेरितों के काम 18:12 प्रेरितों के काम 18:13 प्रेरितों के काम 18:14 प्रेरितों के काम 18:15 प्रेरितों के काम 18:16 प्रेरितों के काम 18:17 प्रेरितों के काम 18:18 प्रेरितों के काम 18:19 प्रेरितों के काम 18:20 प्रेरितों के काम 18:21 प्रेरितों के काम 18:22 प्रेरितों के काम 18:23 प्रेरितों के काम 18:24 प्रेरितों के काम 18:25 प्रेरितों के काम 18:26 प्रेरितों के काम 18:27 प्रेरितों के काम 18:28



प्रेरितों के काम 18:3 का निहितार्थ
सीधे शब्दों में यह पंक्ति बताती है कि पौलुस और उसकी टोली के साथ एक कारीगर का व्यवसाय था—तम्बू बनाने का काम—जो उनकी जीवनयापन का स्रोत बना। इससे यह स्पष्ट होता है कि सेवा के साथ व्यावसायिक मेहनत एक साथ चल सकती है और कलीसिया के संस्थापकों के लिए जीविका का यह साधन सामान्य था।
संदर्भ-प्रस्तावना
प्रेरितों के काम 18 अध्याय में पौलुस का मिस्र/आर्केन शहर कॉरिन्थ में प्रवेश और वहाँ के मार्गदर्शकों के साथ उनकी साझेदारी दिखाई देती है। 18:1-3 में वे गलील के एक व्यापारी तम्बू-निर्माता की सहायता लेते हैं ताकि वे स्वयं अपनी कमाई से जीविका चला सकें और बार-बार धार्मिक-यात्राओं और चर्च स्थापना-कार्य पर अधिक ध्यान दे सकें। यह बताता है कि प्रेरित लोग शारीरिक रूप से सक्षम और बाह्य सेवाओं के साथ जुड़े रहे ताकि प्रेरणा और प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिले।
व्याख्यात्मक विचार
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अन्य प्रचलित उद्धरणों के साथ क्रॉस-रेफरेंस
यही विचार पुराने कथनों में भी मिलते हैं कि पवित्र-कार्य के साथ कर्म-कार्य भी साथ चलने चाहिए।
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि प्रेरित-समुदाय अपने समय के दैनिक-जीवन को धार्मिक-कार्य के साथ संतुलित रखने में सक्षम रहे, ताकि वे स्वयं भी निर्भर न रहें और संदेश पर अड़ंगा न लगे।
संक्षिप्त निष्कर्ष और व्यावहारिक takeaway
18:3 से हम सीखते हैं कि - जीवन-यापन के लिए व्यावसायिक कौशल अपनाने में बुराई नहीं है; यह सरल और स्पष्ट मार्ग हो सकता है ताकि संदेश पर कम निर्भरता रहे, और प्रेरित व्यक्ति समुदाय के साथ घुलमिलकर काम कर सके। - आत्म-निर्भरता और समुदाय-निर्भरता के बीच संतुलन बनाए रखने से प्रभु की सेवकाई में स्थिरता आती है।
निष्कर्षित टिप्पणी
यह दृढ़ प्रमाण देता है कि किसी भी धार्मिक कार्य के आयोजन में व्यावहारिक जीवन के संबंधों का सम्मान करना चाहिए। यदि नेता समुदाय के साथ मिलकर काम करते हैं और अपनी जीविका भी सुरक्षित रखते हैं, तो संदेश अधिक विश्वसनीय और प्रभावी रहता है।
नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्वीकृत संक्षिप्त उद्धरण (जहाँ उपलब्ध) केवल उसी रूप में प्रस्तुत किए गए हैं जिन्हें पब्लिक-डोमेन स्रोतों से लिया गया है। उपयुक्त संदर्भ-टिप्पणियाँ सहज अंत-भाग में संक्षेप हैं।