Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 5:1 प्रेरितों के काम 5:2 प्रेरितों के काम 5:3 प्रेरितों के काम 5:4 प्रेरितों के काम 5:5 प्रेरितों के काम 5:6 प्रेरितों के काम 5:7 प्रेरितों के काम 5:8 प्रेरितों के काम 5:9 प्रेरितों के काम 5:10 प्रेरितों के काम 5:11 प्रेरितों के काम 5:12 प्रेरितों के काम 5:13 प्रेरितों के काम 5:14 प्रेरितों के काम 5:15 प्रेरितों के काम 5:16 प्रेरितों के काम 5:17 प्रेरितों के काम 5:18 प्रेरितों के काम 5:19 प्रेरितों के काम 5:20 प्रेरितों के काम 5:21 प्रेरितों के काम 5:22 प्रेरितों के काम 5:23 प्रेरितों के काम 5:24 प्रेरितों के काम 5:25 प्रेरितों के काम 5:26 प्रेरितों के काम 5:27 प्रेरितों के काम 5:28 प्रेरितों के काम 5:29 प्रेरितों के काम 5:30 प्रेरितों के काम 5:31 प्रेरितों के काम 5:32 प्रेरितों के काम 5:33 प्रेरितों के काम 5:34 प्रेरितों के काम 5:35 प्रेरितों के काम 5:36 प्रेरितों के काम 5:37 प्रेरितों के काम 5:38 प्रेरितों के काम 5:39 प्रेरितों के काम 5:40 प्रेरितों के काम 5:41 प्रेरितों के काम 5:42



अर्थ का प्रत्यक्ष सार
प्रेरितों के काम 5:31 बताते हैं कि परमेश्वर ने यीशु को प्रभु और उद्धारकर्ता ठहराया है—अपने दाहिने हाथ से उसे ऊँचा उठाया है—ताकि वह इस्राएलियों को मन फिराव (ताप से मुक्ति) और पापों की क्षमा प्रदान करे। यह प्रत्यक्ष रूप से उद्धार की योजना की पुष्टि है: ঈশ্বর ने मसीह के माध्यम से पापी मनों में परिवर्तन के लिए अवसर दिया है, और यह परिवर्तन विश्वास के द्वारा प्राप्त होता है।
प्रसंगीय पृष्ठभूमि
यूहन्नीसभामयायित पाठ के बाद प्रेरितों के बीच पवित्र आत्मा की कृपा से चमत्कार दिखे, किन्तु फिर लोगों ने प्रेरितों पर क्रोध किया। प्रेरित पतरस ने जान लिया कि उद्धारकर्ता के रूप में यीशु की महिमा स्पष्ट रूप से स्थापित हो चुकी है; परमेश्वर ने उसे अधिकार से ऊँचा किया ताकि वह पाप और दोष से मन वालों को फिराव दे। यह उद्धार का प्रचार इसी क्रम में शुरू होता है: मसीह के पुनर्जीवन और क्षेत्र-उद्धार की घोषणा, ताकि सभी इस्राएलियों के लिए पथ साफ हो जाए।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
3 प्रमुख विषय
अन्य सुसमाचारों से संलग्न संदर्भ
लूका 24:47 में वही संदेश है कि मसीह के नाम से पश्चाताप और पापों की क्षमा दी जाएगी; यह प्रेरितों के पहले प्रचार का मूल है। कबूल करने योग्य यह है कि प्रेरितों के कार्यों में यह सिद्धान्त बारम्बार मिलता है कि यीशु पर विश्वास से उद्धार मिलता है।
संयोजन-निहितार्थ
यह पद यह स्पष्ट करता है कि उद्धार केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना का परिणाम है: यीशु को प्रभु और उद्धारकर्ता मानना, पवित्र आत्मा के प्रभाव से मन फिराव और पापों की क्षमा की अनुभूति। प्रेरित पतरस इसे अपने preaching के आधे शब्दों में आबद्ध करते हैं कि मसीह के द्वारा चमत्कार और कृत्य हों—परिणामस्वरूप लोगों के दिल किसी प्रकार के परिवर्तन से गुजरते हैं।
छोटी क्रियात्मक सीख
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षेप स्पष्टीकरण
- कार्य 13:38-39: मसीह के नाम से पापों की क्षमा का अधिकार यहाँ स्पष्ट रूप से दोहराया गया है; यह बताता है कि विश्वास के साथ वास्तविक क्षमा संभव है।
- रोम 3:24: पापों से मुक्ति केवल अनुग्रह से है; यीशु के नाम की प्रत्याक्षमता से ही यह संभव है।
- क्लिस 1:14: उद्धार की कथनात्मक धारणा—उसके द्वारा हमें उद्धार, बक्शा और विश्वास के साथ ईश्वर के राज्य में प्रवेश मिलता है।
निष्कर्ष: परमेश्वर की महिमा में यीशु की स्थिति उद्धार का केंद्र बनाती है। यह पाठ याद दिलाता है कि पाप से मुक्ति और अनुभवात्मक मन फिराव यीशु के राज्यमार्ग के बिना नहीं मिल सकता; उसके दाहिने हाथ से उठना यह दर्शाता है कि वह सभी चीजों में प्रभु है और उसी के नाम पर जीवन की दिशा मिलती है।
कृतित्व उद्धरण: इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; नीचे दिए गए पारंपरिक विचारधाराओं के सारांश संरक्षण हेतु संकेतित टिप्पणी दी गई है।