Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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लूका 24:47 — संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
यह वचन फिर जीवित हुए मसीह की आवाज में दिया गया आदेश का सार है। यीशु ने शिष्यों को निर्देश दिया कि वे सुसमाचार का प्रचार यरूशलेम से शुरू कर वैश्विक स्तर पर फैलाएँ। यहाँ "मन फिराव" और "पापों की क्षमा" दो तरह के आध्यात्मिक परिणाम बताए गए हैं जो सुसमाचार के प्रचार से जुड़ते हैं। परमेश्वर की योजना यह है कि उद्धार की खबर केवल सुनने तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों के ह्रदय में परिवर्तन और पापों की क्षमा का वास्तविक अनुभव लाए।
मुख्य अर्थ
प्रधान संदेश यह है कि मसीही संदेश जीवन-बदली वाला है: यह लोगों को पाप से मुक्ति और परमेश्वर के साथ नए संबंध की ओर निर्देशित करता है। "मन फिराव" से तात्पर्य केवल विचार या बाहरी आचरण का परिवर्तन नहीं, बल्कि अंतर्निहित मन की ओर पूर्ण परिवर्तन है—जो पश्चाताप और विश्वास में प्रकट होता है। "यही के नाम से" बताता है कि यह परिवर्तन और क्षमा यीशु के कार्य, मृत्यु और पुनरुत्थान पर आधारित है।
दो प्रमुख विषय
संबंधित पद और उनकी व्याख्या
कई अन्य स्थान इस वचन की गहराई को उजागर करते हैं:
व्यावहारिक चिंतन
यह वचन हमें व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर सोचने को कहता है: क्या हमारा जीवन उस सुसमाचार के साथ मेल खाता है जो मन बदलता और पापों को क्षमा कराता है? प्रचार का अर्थ केवल शब्द कहना नहीं, बल्कि प्रेम, सच्चाई और दानशीलता के साथ वे जीवन चरित्र प्रदर्शित करना है जो यीशु की पहचान को स्पष्ट करे। इससे प्रेरित होकर स्थानीय चर्च और विश्व मिशन दोनों में सक्रियता और नम्रता की आवश्यकता दिखती है।
मशहूर टिप्पणीकारों से छोटा उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने इस प्रकार कहा है: "यही के नाम से करने का मतलब यह है कि सब कुछ मसीह की वास्तविकता पर निर्भर है।" (सटीक उद्धरण संक्षेप में यहाँ प्रस्तुत किया गया है।)
निष्कर्ष
लूका 24:47 हमें याद दिलाता है कि सुसमाचार का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि मन का परिवर्तन और पापों की क्षमा कराकर जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। यह आदेश स्थानीय से वैश्विक तक फैला हुआ मिशन और मसीह के नाम में मिलने वाली मुक्ति की सार्वभौमिकता पर जोर देता है।