Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 24:1 लूका 24:2 लूका 24:3 लूका 24:4 लूका 24:5 लूका 24:6 लूका 24:7 लूका 24:8 लूका 24:9 लूका 24:10 लूका 24:11 लूका 24:12 लूका 24:13 लूका 24:14 लूका 24:15 लूका 24:16 लूका 24:17 लूका 24:18 लूका 24:19 लूका 24:20 लूका 24:21 लूका 24:22 लूका 24:23 लूका 24:24 लूका 24:25 लूका 24:26 लूका 24:27 लूका 24:28 लूका 24:29 लूका 24:30 लूका 24:31 लूका 24:32 लूका 24:33 लूका 24:34 लूका 24:35 लूका 24:36 लूका 24:37 लूका 24:38 लूका 24:39 लूका 24:40 लूका 24:41 लूका 24:42 लूका 24:43 लूका 24:44 लूका 24:45 लूका 24:46 लूका 24:47 लूका 24:48 लूका 24:49 लूका 24:50 लूका 24:51 लूका 24:52 लूका 24:53



पाठ के भीतर व्याख्या: लूका 24:25
यह पद यीशु मसीह के पश्चात के अनुभवों के क्रम में आता है, जब दो स्मृतिपरक यात्री शाम के बारे में बात कर रहे थे। वे पुराने घटनाक्रमों को समझने की कोशिश कर रहे थे, परन्तु वे स्पष्ट दिशा नहीं पा रहे थे। यीशु उनसे मिले और उनको मार्गदर्शित करते हुए उन तथ्यों की समझ में कमी को पहचानते हैं। इस पंक्ति में Jesus उन्हें निर्बुद्धि और भविष्यद्वक्ताओं की बातों पर विश्वास करने में ढील ही नहीं, बल्कि मन्दमति भी बताते हैं—यानी वे अपनी दृष्टि से सत्य की परख करने की कोशिश में सच का हिस्सा चूक रहे थे।
पाठ के संदर्भ में सार तत्व
लूका 24, यीशु के पुनर्जीवन के बाद के दिनों के घटनाक्रम को प्रस्तुत करता है। इन बाइबल घटनाओं में, दो शिष्यों की यात्रा पर यीशु उनसे मिलने आता है; वे उसे पहचान नहीं पाते, क्योंकि उनकी उम्मीदों के अनुसार मसीह का मार्ग वही नहीं था जो उन्होंने सोचा था। इस वाक्य में Jesus उन्हें इस बात के लिए चिट्ठी देते हैं कि उन्होंने भविष्यद्वक्ता तथा परमेश्वर के प्रस्तावों को अपने पूर्वाग्रह से पढ़ा है—यही कारण है कि वे सत्य के कुछ भागों को नहीं समझ पाए।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पद का सबसे स्पष्ट पाठ है—हम कितनी बार परमेश्वर की योजना को अपने पूर्वाग्रहों से समझ लेते हैं और वही देखते हैं जो हमारी अपेक्षा के अनुरूप हो। ईश्वर के कार्य समय और दूरी से परे होते हैं; हमें खुले मन से Scripture के प्रकाश में चलना चाहिए ताकि हमारे भ्रम दूर हों और धार्मिक समझ मजबूत हो।
अन्य बाइबल संदर्भों के साथ तुलना
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि परमेश्वर की बात पढ़ने और वहां की गहराई को पाने के लिए ईमानदार मन, नम्रता और आत्मिक प्रेरणा आवश्यक है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संदर्भ-आलेख
जब आप इस वाक्य के साथ अन्य भागों को देखें, तो यीशु के पुनर्जीवन के संदेश और शांति के साथ जुड़े संकेतों पर ध्यान दें। साथ ही, यह भी देखें कि शिष्य कैसे अपने “दृष्टि” में स्पष्टता के लिए ईश्वर की उद्घोषणा को ग्रहण करते हैं।
संक्षेप
लूका 24:25 में यीशु का कथन एक प्रामाणिक सच प्रस्तुत करता है—हमारी निर्बुद्धि और मन्दमतियाँ अक्सर ईश्वर की योजनाओं को समझने से रोकती हैं। पर यदि हम सच को खुली आत्मा से पढ़ें, पवित्र आत्मा की दिशा में चलें, तो हम भी उन घटनाओं के पुनराविष्कार को पहचानेंगे, जो हमारे जीवन में जो भी कठिनाइयाँ हों, उनकी सत्यता को दर्शाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस के संकेत: यह अध्याय विश्वास की निरन्तर वृद्धि, पवित्र आत्मा की मार्गदर्शना, और दिल की संवेदना के महत्व को दर्शाते हैं, जिसे ऊपर दिए गए संदर्भ-आलेख में संक्षेपित किया गया है।
- उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की संक्षिप्त धारणा—यदि उपलब्ध हों, तो नीचे दिए गए संकेतों में संग्रहीत हैं:
यह क्लस्टर पंक्ति मूल दायरे के अनुसार संकेतित उद्धरणों का संक्षेप है; पूर्ण शब्दावली के लिए उनके प्रकाशित PD स्रोतों को देखें।