Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 24:1 लूका 24:2 लूका 24:3 लूका 24:4 लूका 24:5 लूका 24:6 लूका 24:7 लूका 24:8 लूका 24:9 लूका 24:10 लूका 24:11 लूका 24:12 लूका 24:13 लूका 24:14 लूका 24:15 लूका 24:16 लूका 24:17 लूका 24:18 लूका 24:19 लूका 24:20 लूका 24:21 लूका 24:22 लूका 24:23 लूका 24:24 लूका 24:25 लूका 24:26 लूका 24:27 लूका 24:28 लूका 24:29 लूका 24:30 लूका 24:31 लूका 24:32 लूका 24:33 लूका 24:34 लूका 24:35 लूका 24:36 लूका 24:37 लूका 24:38 लूका 24:39 लूका 24:40 लूका 24:41 लूका 24:42 लूका 24:43 लूका 24:44 लूका 24:45 लूका 24:46 लूका 24:47 लूका 24:48 लूका 24:49 लूका 24:50 लूका 24:51 लूका 24:52 लूका 24:53

सीधा निष्कर्ष: खालेखाने के साथ पुष्टि किया गया कि यीशु जी उठ गया है
सूत्र के अनुसार लूका 24:43 में प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों के सामने खाया। इसका अर्थ यह है कि जी उठे हुए मसीह की वास्तविकता bodily रूप में प्रमाणित है, न कि मायावी भ्रम। यह घटना यूहन्ना की गवाही और पौलुस के लेखन से जुड़कर पुनर्जीवन के सत्य को ठोस रूप में दर्शाती है: जीवन-चालू निकास, शरीर की वास्तविकता और भविष्य की आशा के संकेत।
सं contextual पृष्ठभूमि
येरुशलेम के मैग्दी द्वारा प्रेषित यीशु के शिष्यों के सामने यह घटना घटित होती है, जब उन्होंने पहले उनके मरने की पुष्टि की थी, परंतु पवित्र आत्मा की सहायता से वे अब जी उठे होने का अनुभव कर रहे थे। लूका 24 अध्याय में यह स्पष्ट किया गया है कि यीशु ने अपने पुराने शरीर-धर्म के साथ उपस्थित होकर प्रशंसा, शिक्षा और आशीर्वाद दिया, जिससे शिष्य यकीन कर सकें कि वह वही है जिसने उद्धार किया।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
पवित्र-वचन से संबंधी विचार
यह वाक्या निम्न संबंधित विचारों से मेल खाता है:
संक्षिप्त थेमैटिक सूची
अन्य दूरी वाले उद्धरणों से संक्षिप्त संदर्भ
यह दृश्य भिन्न-भिन्न प्राचीन टिप्पणीकारों के मार्गदर्शन में एक सामंजस्यपूर्ण चित्र बनता है:
हेन्री (Matthew Henry) ने संकेत किया है कि जी उठना इस बात का प्रमाण था कि यीशु की शिक्षाओं में शक्ति है और वह मृत्यु पर विजय रखते हैं।
बर्न्स (Albert Barnes) ने तर्क किया कि भोजन के साथ उपस्थिति शिष्य-अनुभव की स्पष्टता देता है और यह दर्शाता है कि यीशु ने अपने शरीर के साथ आत्मा नहीं छोड़ा।
एडम क्लार्क (Adam Clarke) ने भी इसे एक ठोस प्रमाण माना कि यीशु का नया जीवन पृथ्वी-समय के साथ जुड़ा नहीं था, बल्कि पूर्ण पुनरुत्थान शरीर का अनुभव था।
सीधे उद्धरण (जहाँ उपलब्ध)
यदि नीचे के टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-domain उद्धरण मिलते हैं, तो संकेत दिए जाते हैं: “उसने लेकर उनके सामने खाया।” यह पाठ सीधे पाठ का मानक स्पष्टिकरण बनता है, और अन्य टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण वास्तविक रूप में संदर्भित हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम किस प्रकार आज के जीवन में इसकी सीख ग्रहण करें? पहला, यीशु के जी उठना आशा-आधार है—हमें दुखों के बीच भी जीवन का वास्तविक नये आरम्भ दिखाता है। दूसरा, विश्वास में स्पष्ट प्रमाण चाहिए: ईश्वर की तथ्य-परक नीतियाँ जीवित हैं और हमारे दैनिक जीवन में प्रकाशित हो सकती हैं। अंत में, शांति और सेवा का आह्वान—मसीह की प्रस्तुत उपस्थिति से प्रेरित होकर हम एक दूसरे की सहायता करें।