लूका 24:46 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उनसे कहा, “यह लिखा है कि मसीह दुःख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा, (यशा. 53:5, लूका 24:7)

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लूका 24:46 पद-दर-पद बाइबल टीका

सेवित पाठ का अवलोकन

Luke 24:46 में यीशु अपने विद्यार्थियों से बोल उठते हैं कि मसीह दुःख उठाकर तीसरे दिन जी उठेगा। यह शब्द उन घटनाओं के बाद के दृष्यों के बीच एक सारभूत संदेश है: मिंत्रित निर्भयता के साथ उद्धार का रास्ता दुखों के भीतर से निकलता है, और परमेश्वर का नियम पूरा होता है। यह उद्धार का स्पष्ट लक्ष्य नहीं पूछता, बल्कि यह प्रभु यीशु की मृत्यु और जी resurrection की योजना को एक साथ स्पष्ट करता है।

पंक्ति-वार विभाग: अध्याय के भीतर यह वाक्य

यह वाक्य उन घटनाओं के क्रम में आता है जहाँ यीशु अपने शिष्यों को बताते हैं कि मसीह को दुःख उठाने होंगे और तीसरे दिन जी उठेंगे। यह संदेश उन पर स्पष्ट किया गया कि उद्धार का कार्य, जो क्रूस पर चलता है, परमेश्वर की ₹योजना का प्रमुख भाग है और यह मृत से जीवन की दिशा बनाता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

मुख्य पाठ यह है कि परमेश्वर का उद्धार-कार्य दर्द, अस्वीकृति और मृत्यु के बावजूद पूर्ण होता है। यीशु की भूमिका, दुःख से पूर्वाग्रहित नहीं बल्कि परमेश्वर की महिमा के प्रदर्शन के लिए है; तीसरे दिन की जी उठान से विश्वास के लिए नई आशा और प्रमाण मिलता है कि मसीह ही दुःख का अंत और जीवन की शुरुआत है।

हेतु तुलना: संबंधित बाइबल अंश

यशायाह 53 अध्याय में प्रभु के दु:खों और पीड़ाओं का प्रत्यक्ष वर्णन उद्धार के लिए भविष्यवाणी के रूप में मिलता है—जो Luke 24:46 के साथ पूर्णता का एक साक्ष्य बनता है। लूका 24:7 में यीशु की ओर संकेत है कि आत्मिक उद्धार मृत्यु के बाद जी उठने में है; यह क्रूस के विचित्र सम्मान और जीवित व्यक्ति के अनुभव के साथ जुड़ा है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • विश्वास के लिए आशा: दुःख के भीतर भी परमेश्वर की योजना प्रभावी रूप से आगे बढ़ती है, जैसा कि यीशु के जी उठने से स्पष्ट है।
  • प्रभु की स्मरणशक्ति: मसीह के दुःख और जी उठान पर स्मरण रखना हमारे विश्वास की स्थिरता बढ़ाता है, खासकर कठिन समय में।
  • उद्धार की गतिशीलता: हमारे जीवन में भी दुख-समाचार के बीच ईश्वरीय उद्धार का रास्ता खुला रहता है; हमारा उत्तर विश्वास और पवित्र जीवन से दिखना चाहिए।

संवहनीय निष्कर्ष

यह वाक्य प्रेरित करता है कि हम जीवन के हर क्षण में परमेश्वर के उद्धार-कार्य की दिशा में चलें: दुःख के बावजूद आशा रखिए, क्रूस की विनम्रता को समझिए, और जी उठाने की 삶 के साथ प्रभु की महिमा को मानिए।

क्रॉस-रेफ़रेंस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

यशायाह 53:5 — प्रभु के दुःख और विश्राम के संकेतक; लूका 24:7 — मसीह की मृत्यु और जी उठान की योजना, ताकि 우리 विश्वास में नया जीवन आये।

नोट: नीचे के संदर्भ सूक्ष्म रूप से उद्धृत संकेत हैं; पूर्ण पद नहीं दिए गए हैं, ताकि पाठ्य सामग्री का स्फुट समझ बना रहे।

कार्यकारी कमेंटरी का संकलन: यह पाठ कई पुरातन टिप्पणीकारों के नैतिक-संदेश को संजोता है—मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क—के सामान्य निष्कर्षों के साथ। उनमें से किसी भी स्पष्ट शब्दों का सीधा उद्धरण यहाँ संक्षेप में दिया गया है ताकि पाठक को प्रामाणिक स्पर्श मिल सके:

“यह लिखा है कि मसीह दुःख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा।”

नोट: उपर्युक्त उद्धरण केवल संदर्भ के लिए है; पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 24:46 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि वह उसके सामने अंकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते। (मत्ती 2:23)

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यशायाह 50:6 (HINIRV) »
मैंने मारनेवालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचनेवालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और उनके थूकने से मैंने मुँह न छिपाया। (मत्ती 26:67, इब्रा. 12:2)

लूका 24:44 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लूका 24:44 (HINIRV) »
फिर उसने उनसे कहा, “ये मेरी वे बातें हैं, जो मैंने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों।”

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