यशायाह 50:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैंने मारनेवालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचनेवालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और उनके थूकने से मैंने मुँह न छिपाया। (मत्ती 26:67, इब्रा. 12:2)

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यशायाह 50:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 50:6 का हिंदी विश्लेषण (HINIRV)

सीधे शब्दों में अर्थ: मसीह-सम्बन्धी यह वचन बतलाता है कि दास ने अपने आप को दुःख के सामने समर्पित कर दिया, अपने पीठ पर मार सहना, गाल पर ठोकरें खाना, अपमान और थूकना भी स्वीकार करना—यह सब इसलिए ताकि योजना के अनुसार परमेश्वर के संदेश को पूरा किया जा सके।

परिप्रेक्ष्य

यह यशायाह का साहित्य उन दास-भावनाओं के बीच आता है जो परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए दुःख उठाते हैं। 50वाँ अध्याय दास के दर्द, विश्वास और दृढ़ आगे बढ़ने का चित्र प्रस्तुत करता है। यहाँ दास अपने मार्ग को त्याग नहीं रहा, बल्कि निष्क्रिय विरोध के बीच भी拚कर आगे बढ़ रहा है। उद्धार की दिशा में यह एक आत्म-स्वीकृति है, जिसमें भविष्य की सेवकाई का स्पष्ट संकेत मिलता है।

व्याख्या के मुख्य बिंदु

  • स्वीकृत यातना: दास अपने संघर्ष पर अधिकार जमाने के बजाय उसे स्वीकार करता है, ताकि वह परमेश्वर की योजना को सत्यापित कर सके।
  • आश्वासन का सम्मान: ठोंकने, थूकने और अपमान का सामना आत्म-नियंत्रण के साथ किया गया है, जो मसीह की पीड़ा के समानता का संकेत देता है।
  • अनुवाद के संकेत: “अपना गाल” देना और “थूकना” स्वीकार करना—यह समाजिक और धार्मिक अपमान के बीच आस्था की दृढ़ता को दर्शाता है।

सूक्ष्म टिप्पणियाँ और समानांतर विचार

यह पंक्तियाँ मसीह के अनुभव से सामंजस्य रखती हैं जिन्हें मत्ती 26:67 और इब्रानियों 12:2 में संदर्भित किया गया है। मसीह ने गोपनीयता और धैर्य के साथ अन्याय को सहन किया, ताकि परमेश्वर की योजना पूरी हो सके। यह दास की पीड़ा और उसके उद्देश्य के बीच एक समान धारा बनाती है — विश्वास में दृढ़ रहना, विपरीत परिस्थितियों में भी परमेश्वर की योजना को प्राथमिकता देना।

हमें किन बातों से सीख मिलती है

  1. पीड़ा के बीच भी ईमान का केंद्र: कठिन समय में भी परमेश्वर के उद्देश्य को याद रखना चाहिए।
  2. आत्म-नियंत्रण: अन्याय के सामने भी अपने शब्दों और आचरण से विजय पाना संभव है।

अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)

- मत्ती 26:67: प्रत्यक्ष प्रतिशोध के बदले शांति में धैर्य बनाए रखना; - इब्रानियों 12:2: रोशन करने वाले विश्वास के साथ क्रूस की राह पकड़ना; - क्लेमेंटाइन संदर्भ: दास की भाव-स्थिति में उद्धारकर्ता के दर्द का स्मरण।

संक्षिप्त निष्कर्ष: यह विनम्रता, धैर्य और परमेश्वर की योजना के अनुरूप रहने की प्रेरणा देता है। दुख के समय भी दास-गीत की तरह ईश्वर के उद्देश्य को पहले रखें, ताकि मसीह की पीड़ा हमारे लिए उद्धार का मार्ग बन जाए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 50:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब उन्होंने उसके मुँह पर थूका और उसे घूँसे मारे, दूसरों ने थप्पड़ मार के कहा,

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वे उसके सिर पर सरकण्डे मारते, और उस पर थूकते, और घुटने टेककर उसे प्रणाम करते रहे।

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तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुँह ढाँपने और उसे घूँसे मारने, और उससे कहने लगे, “भविष्यद्वाणी कर!” और पहरेदारों ने उसे पकड़कर थप्पड़ मारे।

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