Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 50:7 का सारगर्भित अर्थ
यह पद कहता है कि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करेगा; इसके कारण मैं संकोच नहीं करूँगा और अपना माथा चकमक-पूर्वक कड़ा कर लूँगा ताकि मुझे लज्जित न होना पड़े। यह भविष्यवाणी यह दर्शाती है कि दृढ़ विश्वास और निर्भयता असहमत परिस्थितियों में भी अडिग रहती है, क्योंकि ईश्वर समर्थक है और उसकी सहायता से चुनौतियाँ पार हो सकती हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह की किताब का यह भाग परमेश्वर के सेवकों के बारे में है जो कठिनाईयों के बीच दृढ़ता से खड़े रहते हैं। यह अत्याचार, अपमान और परीक्षणों के समय की प्रेरक प्रतिज्ञा है कि परमेश्वर सहयोगी है और उसकी सहायता से आशंकित परिणामों का सामना किया जा सकता है। अध्याय 50 में दास-व्यक्ति की भूमिका और उसकी निष्ठा उभरी है, जहाँ वह अपने निर्णय और आस्थायुक्त आचरण के लिए परमेश्वर पर निर्भर है।
व्याख्यात्मक विचार
1-2 पंक्तियों के मुख्य निष्कर्ष
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत-विचार)
यशायाह 41:10— परमेश्वर की सहायता और साथ में रहने का संदेश, भय न करने की प्रेरणा देता है।
रोमियों 8:31— “यदि परमेश्वर हमारे पक्ष में है, तो कौन हमारे विरुद्ध?” की अनुभूति इस पद के साथ सामंजस्य रखती है।
कुलुस्सियों 1:27— आशा की महिमा ईश्वर नवीन प्रभाषित करता है; आश्वासन से जीवन में स्थिरता मिलती है।
अनुवादित टिप्पणी से मिलने वाले संकेत (संक्षेप)
इस पवित्र दाय से हमें क्रमिक पाठ मिलता है कि परमेश्वर के साथ विश्वास स्थिरता देता है और मानवीय भय को कम कर देता है। यह दासी-जन के लिए भी एक प्रेरक संदेश है कि वे अपने दायित्व और साहस के साथ आगे बढ़ें।
क्रियात्मक निष्कर्ष
इस पद से सीखें कि कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर की सहायता की उम्मीद बनाए रखें। अपनी मेहनत, प्रार्थना और निर्णय में ईमानदारी रखें; अपने माथे को बिना भय के उठाएं, ताकि किसी भी परिस्थिति में आप लज्जित न हों और परमेश्वर के साथ स्थित रहें।
संदर्भित विचारधारा के लिए कुछ विश्वसनीय पूर्व-यथार्थ टिप्पणीकारों के संक्षिप्त संकेत:
Matthew Henry: उद्धृत अंश के अनुसार ईश्वर की सहायता से स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और विनयपूर्वक कठिनाई से पार उतरना संभव है।
Albert Barnes: विश्वास निश्चय की कुंजी है और यहोवा के साथ संबंध भय को हर देता है।
Adam Clarke: आत्म-निर्भरता और दृढ़ता का संयोजन, दास-जीवन में भी ईश्वरीय सहायता से विपरीत परिस्थितियों को पार कराने वाला है।