Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 24:1 लूका 24:2 लूका 24:3 लूका 24:4 लूका 24:5 लूका 24:6 लूका 24:7 लूका 24:8 लूका 24:9 लूका 24:10 लूका 24:11 लूका 24:12 लूका 24:13 लूका 24:14 लूका 24:15 लूका 24:16 लूका 24:17 लूका 24:18 लूका 24:19 लूका 24:20 लूका 24:21 लूका 24:22 लूका 24:23 लूका 24:24 लूका 24:25 लूका 24:26 लूका 24:27 लूका 24:28 लूका 24:29 लूका 24:30 लूका 24:31 लूका 24:32 लूका 24:33 लूका 24:34 लूका 24:35 लूका 24:36 लूका 24:37 लूका 24:38 लूका 24:39 लूका 24:40 लूका 24:41 लूका 24:42 लूका 24:43 लूका 24:44 लूका 24:45 लूका 24:46 लूका 24:47 लूका 24:48 लूका 24:49 लूका 24:50 लूका 24:51 लूका 24:52 लूका 24:53

लूका 24:7 के महत्व का परिचय
यह वाक्य यीशु मसीह के जीवन-कार्य के निर्णायक पहलू को स्पष्ट करता है: दुखदापूर्वक विफल नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना के पूरे क्रम में लिप्त एक प्रसिद्ध उद्देश्य के साथ। पवित्र शास्त्र का यह संदेश बताता है कि मसीह को जानबूझकर पश्चाताप-हृदय लोगों की सुरक्षा के लिए पापियों के हाथों में पकड़वाया गया, क्रूस पर चढ़ाया गया और तीसरे दिन जी उठे—यह इतिहास का वह क्षण है जो ईमान का आधार बनता है। इस वाक्य के आधार पर ईसाई जीवन का केंद्र ज्ञान—पाप, क्षमा, और पुनर्जीवन—का त्रिकोण है, जो विश्वासियों को आशा में स्थिर करता है।
पार्श्विक संदर्भ और मूल संदर्भ
यह कथन लूका के Gospel के अंतर्गत उन घटनाओं से जुड़ा है जहाँ यीशु अपने चेलों के साथ यात्रा कर रहे थे और अपनी मृत्यु-योजना की सूचना स्पष्ट करके कहना चाहते थे कि यह परमेश्वर की पूर्व-योजना के अनुसार था। मूल-context में यह समझना आवश्यक है कि धार्मिक नेताओं और पंरम्परागत समझ के बावजूद यीशु ने कहाः यह सब मेरे अनुयायियों के उद्धार के लिए घट रहा है।
मुख्य संदेश
वैचारिक ताने-बाने और थीम्स
- पाप और प्रायश्चित: मसीह की पच्चीसाई में हुई पीड़ा पाप के लिए कयामत नहीं, बल्कि परमेमश्वर की दया का मार्ग है।
- क्रूस की भूमिका: क्रूस केवल एक यातना-संयोग नहीं, बल्कि उद्धार के लिए एक योजनाबद्ध उपाय है।
- जी उठना: मृत्यु पर विजय और जीवन का आश्वसन—प्रत्येक विश्वासी के लिए नई संभावना।
संदर्भ-क्रॉसरेफरेंसे
1) मत्ती 16:21 — यीशु अपने आप को समझाते हैं कि उन्हें दुख उठानी होगी, फिर तीसरे दिन जी उठना होगा; यह संदेश कड़ी तरह से इस घटना के साथ मेल खाता है।
2) मरकुस 8:31 — वह पहले से बतलाते हैं कि वे कैसे मरेंगे, कैसे जी उठेंगे; यह लूका के साथ एक समान धारा में है।
3) योहान 11:25–26 — जी उठना और जीवन का प्रतिफल—जो मसीह में है, वह पाप और मृत्यु पर विजय देता है।
एहम उद्धरण और संस्कार-समझ
एमाथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डिजिटल पाठों में इस प्रकार के कथन के व्याख्यान में उनके प्रमुख विचार मिलते हैं: वे तीनों इस घटना को उद्धार-कार्य का पूर्ण प्रकाशन मानते हैं—यानी यीशु का क्रूस और पुनर्जीवन परमेश्वर के प्रेम और न्याय का संयोजन है। (ध्यान दें: अगर आपके पाठ में उनके शब्द सीधे उद्धृत हों, तो नीचे उल्लेखित संक्षेप उद्धरण संकुलित रूप में प्रस्तुत हैं।)
देवotional reflection
यह verses एक ऐसी राह दिखाता है जिसमें संकट के बीच भी आशा की किरण टूटती नहीं—क्योंकि प्रभु ने स्वयं उद्धार का मार्ग चुना और तीसरे दिन पुनर्जीवित होकर यह दिखा दिया कि जीवन की कठिन अवधि के बाद भी भय का स्थान नहीं होता। आप अपने जीवन में जो बोझ उठाते हैं, उसे आप यीशु के क्रूस-यज्ञ से जोड़कर देखें; कृपया विश्वास और प्रार्थना के साथ उसके पुनर्जीवन की शक्ति को अपने दैनिक जीवन में अनुभव करें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 24:7 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की योजना में पीड़ा कभी बेवजह नहीं होती; क्रूस और जी उठना मानवता के लिए उद्धार का अनिवार्य चक्र हैं। इन घटनाओं के भीतर का गहरा संदेश है कि परमेश्वर का प्रेम मृत्यु पर भी हावी है और विश्वासी लोग इस प्रेम को अपने जीवन का स्रोत मानें।