Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 6:1 प्रेरितों के काम 6:2 प्रेरितों के काम 6:3 प्रेरितों के काम 6:4 प्रेरितों के काम 6:5 प्रेरितों के काम 6:6 प्रेरितों के काम 6:7 प्रेरितों के काम 6:8 प्रेरितों के काम 6:9 प्रेरितों के काम 6:10 प्रेरितों के काम 6:11 प्रेरितों के काम 6:12 प्रेरितों के काम 6:13 प्रेरितों के काम 6:14 प्रेरितों के काम 6:15



प्रेरितों के काम 6:10 — परन्तु उस ज्ञान और उस आत्मा का जिससे वह बातें करता था, वे सामना न कर सके।
मुख्य interpretive point: पहले चर्च के द्वारा प्रचार-कार्य बढ़ते समय, याजकों, शिक्षकों और समाज के दबाव के विरुद्ध आत्मिक प्रेरणा और ज्ञान ने ही प्रेरितों को अडिग रखा। यहाँ पर पतरस-यहूदा के सामुदायिक दबाव के खिलाफ, दिव्य ज्ञान और पवित्र आत्मा की शक्ति से वे विरोध का सामना करते हैं और प्रभु के वचन को निर्भीकता से आगे बढ़ाते हैं।
साहित्यिक संदर्भ (Literary context)
यह वाक्य गतिशील रूप से संत सुलभता को दर्शाता है जब कारण-संवाद और बहसों के बीच लोग नया साक्षात्कार चाहते हैं, पर प्रेरित साफ़-साफ़ उत्तर देते हैं। इतिहास-निर्मित संदर्भ में, वे धार्मिक नेताओं के कठोर आग्रहों के बीच शुद्ध सत्संग और पवित्र कारण का प्रतिपादन करते हैं। इस आयाम में “ज्ञान” से आशय वह सूझ-बूझ है जो परमेश्वर के वचन से मिलती है, और “आत्मा” से तात्पर्य दिव्य प्रेरणा से है जो उनके गद्य-उच्चारण, विवेक और साहस को संचालित करती है।
पदार्थिक महत्व (Theological significance)
इस वाक्य में 발견 होता है कि ज्ञान और आत्मा एक साथ कैसे पराक्रमी शक्तिघटित बनते हैं। ज्ञान से तात्पर्य गहरा बोध है—जो शास्त्र की गहराइयों से आता है—और आत्मा से संकेतित है वह जीवन-प्रेरक शक्ति जो विश्वासियों के भीतर काम करती है। जब इन दोनों का संयोजन होता है, तब विरोधी भी सामना नहीं कर पाते; इसका अर्थ है कि देहाती-तर्क से अलग, दिव्य प्रेरणा से भरी बातें सत्य की दिशा बनाती हैं और कफन-समूह के दबाव के बावजूद आगे बढ़ती हैं।
आत्मिक-राजनीति और चर्च के भीतर प्रवाह (Theological and biblical cross-connections)
- प्रेरितों के चरणों में जब सामाजिक दबाव बढ़े, तब परन्तु उस ज्ञान और आत्मा का सहारा उन्हें दृढ़ बनाता है।
- प्रेरितों 2:4 के साथ, पवित्र आत्मा में वाचा-परिच्छेद और boldness का संगम दिखता है, जहाँ आत्मा मनुष्यों के भीतर विश्वास-चेतना को प्रज्वलित करता है।
- यह पद मिसाल देता है कि सत्य के लिए ज्ञान और आत्मा एक साथ मार्गदर्शन करते हैं, भले ही तर्क-वितर्क कितने भी कठिन क्यों न हों।
पढ़ने योग्य सवाल (Questions for reflection)
संयुक्त निष्कर्ष (Integrated summary)
इस वाक्य में उद्धृत शक्ति है: परमेश्वर के वचन का ज्ञान और पवित्र आत्मा की प्रेरणा मिलकर विश्वासियों को असहाय विरोध के बावजूद भी आगे बढ़ाते हैं। विविध आयामों में, यह संदेश देता है कि सत्य की राह पर सफलता केवल भाषण-तर्क से नहीं, बल्कि दिव्य ज्ञान और आत्मा-समर्थन से संभव है।
प्रमाणिक विचार (Quoted insights from classic commentaries, selectively)
मैथ्यू हेनरी के अनुसार, यह दर्शन सिद्ध करता है कि教 के प्रतिशोध के विरुद्ध शास्त्र-ज्ञान और आत्मा-प्रेरणा एक अप्रत्यक्ष सुरक्षा कवच बनाते हैं। एक सारगर्भित टिप्पणी में Barnes कहते हैं कि ईश्वर की शिक्षा और आत्म-प्रेम से संचालित भक्ति के बिना इन विरोधों का सामना कठिन होता है। एडक Clarke भी यह बताने का प्रयास करते हैं कि प्रेरितों को बहस के बजाय दिल से गवाही देना था। (सूचियाँ यहाँ संक्षेप हैं, पूर्ण ग्रंथ देखें).
cross-references (संक्षिप्त रूप में)
1) प्रेरितों के काम 4:31 — आत्मा की उथल-पुथल में विश्वासियों की नई boldness. यह दिखाता है कि आत्मा की शक्ति कैसे भय को नहीं बल्कि विश्वास को बढ़ाती है.
2) प्रेरितों 2:4 — पवित्र आत्मा ने चमत्कारिक आत्म-उत्पादन दिया और साक्षी बनने की क्षमता बढ़ाई. ज्ञान और आत्मा का ऐक्य यहाँ स्पष्ट है.
3) यशायाह 11:2 — मसीह-अन्तर्निहित ज्ञान और परमेश्वर की आत्मा से प्रेरित बुद्धिमत्ता. यह प्रेरितों के संदेश के मूल में है कि आत्मा से दी गई समझ कितनी गहरी है।
नोट: नीचे उद्धृत प्रमुख टिप्पणीकारों के विचार संक्षेप में शामिल हैं और यदि पूर्ण पाठ उपलब्ध होता, तो उनके विशिष्ट शब्द सीधे उद्धृत किये जाते।