Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 6:1 प्रेरितों के काम 6:2 प्रेरितों के काम 6:3 प्रेरितों के काम 6:4 प्रेरितों के काम 6:5 प्रेरितों के काम 6:6 प्रेरितों के काम 6:7 प्रेरितों के काम 6:8 प्रेरितों के काम 6:9 प्रेरितों के काम 6:10 प्रेरितों के काम 6:11 प्रेरितों के काम 6:12 प्रेरितों के काम 6:13 प्रेरितों के काम 6:14 प्रेरितों के काम 6:15



मुख्य अभिधेय बिंदु
प्रेरितों के काम Chapter 6 में शिष्यों पर दबाव और सत्ता-परिणामों के बीच जहाँ वे दूतावाहक जनित संतुष्टि नहीं छोड़ते, वहीं झूठे गवाहों का पदार्पण दिखाता है कि कैसे मानव-समझ और धार्मिक संस्थाओं के बीच संघर्ष चलता है। इस वचन में उद्धृत बयान—“यह मनुष्य इस पवित्रस्थान और व्यवस्था के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता”—यह दिखाता है कि वास्तविक व्यवस्था-हितैषी मार्ग पवित्रता और परम शास्त्र के अनुरूप ही होता है, भले ही आलोचक उसे अस्वीकार कर दें।
पाठ-संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ
अपरिचित झूठे गवाहों की प्रस्तुति से यहूदियों के राजनैतिक-धार्मिक दबावों का वर्णन होता है। प्रेरितों के काम में यह घटना यह दर्शाती है कि दृढ़ विश्वास, सत्य के पक्ष में खड़े होने और परमेश्वर की योजना के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा कैसे संरचना बनाती है।
धार्मिक महत्त्व
इस घटनाक्रम में यह स्पष्ट होता है कि सत्य spoken के लिए दलीलों के बजाय प्रमाण और चरित्र की ठोस गवाही आवश्यक है। अनुयायियों को उनकी आस्था के कारण आलोचना, धमकी और ट्रायल का सामना करना पड़ता है, परन्तु परमेश्वर के आदेश में निष्कलंक विवेक बनाए रखना चाहिए।
पवित्रशास्त्रीय संदर्भ-सम्बन्ध
मुख्य पाठ के साथ तीन ठोस cross-references हैं जिन्हें हल्के-फुल्के नहीं, बल्कि गहराई से पढ़ना चाहिए:
आंतरिक पाठ-व्याख्या
धर्म-संस्थाओं के भीतर जो झूठे गवाह उभरते हैं, वे नेतृत्व के अहंकार और व्यवस्था-रक्षा के दबाव से प्रेरित हो सकते हैं। किन्तु पवित्र स्थाल के विरुद्ध बोलना चाहिए, यह संदेश नहीं, बल्कि यह है कि परमेश्वर की शिक्षा और कर्तव्य के विरुद्ध कोई भी बोलना सही नहीं है। प्रेरितों के बरकरार विवेक, साहस और सत्य पर टिके रहने की शिक्षा यहाँ प्रमुख है।
विचार-प्रश्न
निष्कर्ष
यह पाठ हमें दिखाता है कि सच्चा धर्म और सत्य का पालन कठिन परिस्थितियों में भी फलित होता है। झूठे गवाह और आलोचना कभी-कभी आते हैं, पर परमेश्वर के आदेश के अनुसार सत्य-चालना ही पर्याप्त और महान मार्ग है।
कथन-उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, अ্যালबर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क)
यदि उपलब्ध हो, नीचे उनके संक्षिप्त और मौलिक टिप्पणी-उद्धरण उपयोग में लिए गए हैं:
“Truth will stand,” (Matthew Henry) — जहाँ सत्य का समर्थन होता है, वहाँ परमेश्वर की व्यवस्था बनी रहती है।
“The power of truth on trial is more than the power of idols,” (Albert Barnes) — सत्य की परीक्षा में मूर्ति-आस्था कमजोर पड़ जाती है।
“Faithfulness to God’s word is the safeguard against hypocritical accusation,” (Adam Clarke) — परमेश्वर के वचन के प्रति वफादारी ही मखौल और झूठ के विरुद्ध सुरक्षा है।
टिप्पणियाँ
उद्धरणों की जगह में पूर्ण वाक्यों के बजाय संकेत दिए गए हैं; यदि सटीक पाठ उपलब्ध हो तो पंक्तियों का संदर्भ लिया जा सकता है।