Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 6:1 प्रेरितों के काम 6:2 प्रेरितों के काम 6:3 प्रेरितों के काम 6:4 प्रेरितों के काम 6:5 प्रेरितों के काम 6:6 प्रेरितों के काम 6:7 प्रेरितों के काम 6:8 प्रेरितों के काम 6:9 प्रेरितों के काम 6:10 प्रेरितों के काम 6:11 प्रेरितों के काम 6:12 प्रेरितों के काम 6:13 प्रेरितों के काम 6:14 प्रेरितों के काम 6:15



बिंदुवार अर्थ와 संदर्भ
इस पद का तात्पर्य है कि परमेश्वर के वचन का प्रसार बढ़ता गया और साथ ही विश्वासियों की संख्या यरूशलेम में तेज़ी से बढ़ी; साथ ही यह भी दिखा कि यह नए विश्वास के पक्ष में बना एक बड़ा मत समाज बन गया, जो यहूदियों के प्रमुख नेताओं के बीच प्रतिरोध का कारण बना।
पार्श्वभूमि
प्रेरितों के कार्य 6 अध्याय का समय रामायणी चर्च की स्थापना के कुछ दशकों के भीतर है। आरम्भिक समुदाय ने लोगों के बीच Maundy-पोषण और वितरण के कारण जनसंख्या वृद्धि देखी, परन्तु कुछ धार्मिक नेताओं की आपत्ति और पवित्रात्मा के शक्तिशाली कार्य के साथ-साथ चर्च में चयनित व्यवस्था के मुद्दे उठे। इस पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि पवित्र वचन के प्रचार से न सिर्फ प्रेरितों की संख्या बढ़ी, बल्कि यहूदियों के एक बड़े गिरोह—याजकों—का भी एक नया दृष्टिकोण बनाने में सफलता मिली।
व्याख्यात्मक संकेत
- परमेश्वर का वचन फैलना: प्रेरितों के संदेश ने यहूदियत के बाहर भी प्रभावशाली रूप लिया, जिससे प्रेषित कार्य का मूल उद्देश्य स्पष्ट हुआ—याद दिलाते हैं कि साक्षी बनना और वचन को फैलाना चर्च का केंद्र है।
- चेलों की गिनती बढ़ना: समुदाय में विश्वास का परिणाम स्पष्ट रूप से दिखता है—विश्वासियों की संख्या में निरंतर वृद्धि, जो संस्थागत बाधाओं के बावजूद ईश्वर की कृपा से संभव हुई।
- याजकों का एक बड़ा समाज इस मत के अधीन होना: धार्मिक नेताओं के भीतर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ दिखती हैं; कुछ ने सत्य के पक्ष में सामंजस्य रखा, अन्य विरोध किया, परन्तु यह वृद्धि परमेश्वर की योजना से संचालित थी।
यानीखोज: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलित विचार
नोट: नीचे संक्षेप उद्धरण केवल उनके पारंपरिक प्रकाशनों के भीतर के संदर्भ-आधार से हैं; पूर्ण वाक्यों की पुनरावृत्ति नहीं की गई है।
Matthew Henry ने यह बताया है कि परमेश्वर का वचन न केवल चर्च को मजबूत बनाता है, बल्कि उसके शत्रुओं के प्रति भी आत्म-नियमन और पुष्टि देता है।
Albert Barnes ने संकेत किया है कि वचन के प्रसार के साथ संस्थागत ढांचे में भी सुधार आ सकता है, और यह भी कि प्रेरितों के वितरण-कार्य और प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन आवश्यक है।
Adam Clarke ने आस्था और समझ के मिश्रण पर बल दिया है—याजकों की प्रतिक्रियाओं के बावजूद यह.directory चर्च का मिशन बढ़ता रहा, क्योंकि पवित्रात्मा उद्धारक के संदेश को उच्चतर बनाता रहा।
संकेतार्थ क्रॉस-रेफरेंसे
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि आत्मीय प्रेरणा और समुदाय के साथ मिलकर ही वचन का प्रसार संभव है, और विरोध के बावजुद यह गतिशील बना रहा।
त्वरित निष्कर्ष और प्रेरक takeaway