Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 6:1 दानिय्येल 6:2 दानिय्येल 6:3 दानिय्येल 6:4 दानिय्येल 6:5 दानिय्येल 6:6 दानिय्येल 6:7 दानिय्येल 6:8 दानिय्येल 6:9 दानिय्येल 6:10 दानिय्येल 6:11 दानिय्येल 6:12 दानिय्येल 6:13 दानिय्येल 6:14 दानिय्येल 6:15 दानिय्येल 6:16 दानिय्येल 6:17 दानिय्येल 6:18 दानिय्येल 6:19 दानिय्येल 6:20 दानिय्येल 6:21 दानिय्येल 6:22 दानिय्येल 6:23 दानिय्येल 6:24 दानिय्येल 6:25 दानिय्येल 6:26 दानिय्येल 6:27 दानिय्येल 6:28



शब्दार्थ में स्पष्ट अर्थ
दानिय्येल 6:20 में राजा दारियाविश (गहेराईमन) के द्वारा दानिय्येल के लिए प्रेषित पंक्ति उस स्थिति के बीच में है जब राजा सिंहlios के भोजन-काल में शोकस्पदभाव से दानिय्येल को बुलाते हैं। वे पूछते हैं कि “हे दानिय्येल, जीवित परमेश्वर के दास, क्या तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, तुझे सिंहों से बचा सका है?” यह पंक्ति प्रभु के भरोसे के कारण निःसंदेह अद्भुत उद्धार की आशा को दर्शाती है, जो कि दानिय्येल के विश्वास से प्रेरित है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
दानिय्येल अध्याय 6 बाबत, बेबीलोन के भयावह शासन के बाद पनाह पाने वाले यहूदियों के विरुद्ध, पर्सिया साम्राज्य के राष्ट्रपति व्यवस्था में दानिय्येल एक संरक्षित मान्य प्रतीक बनते हैं। राज्य के नवीन प्रधान मंत्री और विद्वान वर्ग ने दानिय्येल के विरुद्ध एक जाल बिछाया, ताकि वह कानून के विरुद्ध न जाए—परन्तु दानिय्येल ने अपने दैनिक आराधना नियम, जो कि केवल परमेश्वर के लिए थे, को नहीं बदला। परिणामस्वरूप उसे सिंहों के नीचे डालना पड़ा।
interpretive observations
- विरुद्ध परिस्थिति में भी दानिय्येल का दृढ़ विश्वास दिखता है; वह भयभीत नहीं होता क्योंकि वह अपने परमेश्वर को पहचानता है और उसकी सुरक्षा पर निर्भर है।
- राजा का कथन एक विवेकपूर्ण परीक्षण है: वह दानिय्येल के ईश्वर के प्रति आस्था को प्रमाणित करना चाहता है, पर वह स्वयं भी परमेश्वर की शक्ति के आगे विवश हो जाता है।
- यह पाठ यह दिखाता है कि ईश्वर अपने लोगों के लिए बने रहते हैं, भले ही मानव सत्ता उनके विरुद्ध क्यों न हो।
एक विचारशील सूची
Cross-references
- भीवेल के समय की दासता के बीच धैर्य और विश्वास: डॉर 6:10-12 (उद्धार के लिए माँग) — इस प्रकार के अनुभव में परमेश्वर की कृपा स्पष्ट होती है।
- फरोह के समय विश्वासी की सुरक्षा: तपता 4:18-19 (परमेश्वर की सहायता में शांति) — संकट के बीच ईश्वर की सहायता का प्रमाण।
- शत्रुता के बावजूद विश्वास का पुरस्कार: रोम 8:31-37 (जो हमारे साथ है, वह हमारे खिलाफ कौन हो सकता है?) — विश्वास की जीत पर बल देता है।
प्रमुख निष्कर्ष और व्यवहारिक अनुप्रयोग
इस पंक्ति से हमें यह सीख मिलती है कि क्रोध, दबाव या दमन के समय भी एक विश्वासी अपने आराध्य के प्रति अटल रहता है। प्रभु की सुरक्षा में आशा रखें, भले ही दिखाई दें कि परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों।
उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से सम्मिलित सार निकाला गया है; किसी एक वाक्य का शाब्दिक उद्धरण केवल आवश्यक रूप से प्रयोजित रहा है:
“हे दानिय्येल, हे जीविते परमेश्वर के दास…” — यह अभिवादन राजा की तरफ से एक परीक्षण का संकेत है और दानिय्येल के परमेश्वर के प्रति विश्वसनीय समर्पण की पुष्टि करता है (Barnes/Clarke के सार से मेल खाने वाले संकेत)।