Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 6:1 दानिय्येल 6:2 दानिय्येल 6:3 दानिय्येल 6:4 दानिय्येल 6:5 दानिय्येल 6:6 दानिय्येल 6:7 दानिय्येल 6:8 दानिय्येल 6:9 दानिय्येल 6:10 दानिय्येल 6:11 दानिय्येल 6:12 दानिय्येल 6:13 दानिय्येल 6:14 दानिय्येल 6:15 दानिय्येल 6:16 दानिय्येल 6:17 दानिय्येल 6:18 दानिय्येल 6:19 दानिय्येल 6:20 दानिय्येल 6:21 दानिय्येल 6:22 दानिय्येल 6:23 दानिय्येल 6:24 दानिय्येल 6:25 दानिय्येल 6:26 दानिय्येल 6:27 दानिय्येल 6:28



परिचय
दानिय्येल 6:10 में हमें एक दृश्य मिलता है जहाँ दानिय्येल पर जान को खतरा मंडराने के बावजूद अपनी आस्था और प्रार्थना की दिनचर्या नहीं छोड़ता। यह एक सामान्य-सा दिग्दर्शक वाक्य है, पर इसके पीछे दृढ़ विश्वास, नियत प्रार्थना और परमेश्वर के प्रति निष्ठा का सबक छिपा है।
वर्णन और संदर्भ
यह पद नबू-कद्नेज़र और बाद में दारेवश (दर्यावेश) के राजकाल के दौरान आता है, जब दानिय्येल की सफलता ने कुछ अधिकारियों में ईर्ष्या पैदा कर दी। उन्होंने ऐसा शासकीय आदेश करवा लिया कि किसी के लिए भी तीस दिन के भीतर किसी देवता या मनुष्य की प्रार्थना करना अपराध होगा। दानिय्येल को जब पता चलता है कि राज्य पत्र पर हस्ताक्षर हो चुका है, तब भी वह अपनी परिचित प्रार्थना-आदत न छोड़े। वह अपनी ऊपरी कोठरी से यरूशलेम की ओर मुंह करके तीन बार नित्य की भांति प्रार्थना और धन्यवाद करता रहा।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षाएँ
- प्रतिज्ञा और अनुशासन: दानिय्येल की प्रार्थना की नियमितता दिखाती है कि धर्म केवल भावनाओं का विषय नहीं, बल्कि नियत व अनुशासन है।
- निर्भीक निष्ठा: वह जानता था कि आदेश उल्टा है, पर वह परमेश्वर के प्रति अपनी निष्ठा पर समझौता नहीं करता।
- सार्वजनिक-निजी संतुलन: दानिय्येल ने न तो सार्वजनिक विरोध चुनकर विद्रोह किया, न ही गोपनीय रूप से प्रार्थना न करना चुना; वह खुले मन से परंपरा निभाता है।
अन्य बाइबिल पदों से तुलना
अमल के लिए सावधानीपूर्ण निर्देश
दानिय्येल की मिसाल हमें निम्न व्यवहार सिखाती है:
कमेंटैटोरियल सूक्ष्मबिंदु
परंपरागत टिप्पणीकारों की दृष्टि में दानिय्येल का यह आचरण चरित्र की परीक्षा है। मैथ्यू हेनरी ने कहीं कहा है (संक्षेप उद्धरण): "उसने निश्चय कर लिया था कि वह परमेश्वर की उपासना छोड़ेगा नहीं।" अल्बर्ट बार्न्स ने भी इस तरह के दृढ़ विश्वास को रेखांकित किया। (यहाँ उद्धरण छोटे और सटीक रखे गए हैं।)
समाप्ति—संक्षेप में अर्थ
दानिय्येल 6:10 सिखाता है कि धर्म के अनुष्ठान और वास्तविक आस्था संकट में प्रकट होते हैं। नियमित प्रार्थना न केवल आध्यात्मिक जीवन की शक्ति है, बल्कि संकट में शांति और साहस की जड़ भी है। इस पद से हमें अनुशासन, निर्भीक निष्ठा और धन्यवाद को अपने जीवन में कायम रखने का प्रेरणादायक पाठ मिलता है।